प्रदेश की सड़कों, पुलों और रणनीतिक सुरंगों के लिए की मज़बूत केंद्रीय सहयोग की मांग
प्रदेश की सड़कों, पुलों और रणनीतिक सुरंगों के लिए की मज़बूत केंद्रीय सहयोग की मांग
खबर खास, शिमला/नई दिल्ली :
हिमाचल प्रदेश के लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने बुधवार को नई दिल्ली स्थित संसद भवन में केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी से शिष्टाचार भेंट की। इस अवसर पर राज्यसभा सांसद एवं हिमाचल प्रदेश कांग्रेस की प्रभारी माननीया रजनी पाटिल भी उनके साथ रहीं। इस बैठक में हिमाचल प्रदेश में सड़कों, पुलों और सुरंगों से संबंधित महत्त्वपूर्ण परियोजनाओं को गति देने, सर्व‑मौसमीय संपर्क को सुदृढ़ करने तथा संवेदनशील पर्वतीय क्षेत्रों के लिए मज़बूत और सुरक्षित अवसंरचना सुनिश्चित करने पर विस्तार से चर्चा हुई।
लोक निर्माण मंत्री ने गडकरी को हिमाचल प्रदेश की भौगोलिक परिस्थितियों, बार‑बार होने वाले भूस्खलन, प्राकृतिक आपदाओं और संकरी पहाड़ी सड़कों पर बढ़ते दबाव के बारे में विस्तार से अवगत कराया। उन्होंने कहा कि राज्य में अनेक स्वीकृत परियोजनाएँ विभिन्न चरणों में चल रही हैं, जिनके समयबद्ध क्रियान्वयन के लिए केंद्र सरकार की सतत सहायता, समय पर धनराशि की रिहाई और पर्वतीय राज्यों के लिए कुछ मानकों में लचीलापन अत्यंत आवश्यक है।
बैठक में विशेष रूप से घाटासनी–शिल्हा–बढाणी–भूभू जॉट–कुल्लू सड़क और भूभू (भू–भू) जोत के नीचे प्रस्तावित सुरंग का मुद्दा प्रमुख रूप से उठाया गया। विक्रमादित्य सिंह ने आग्रह किया कि भूभू जोत सुरंग और उससे जुड़ी सड़क को प्राथमिकता प्राप्त परियोजना के रूप में लिया जाए तथा इसकी रणनीतिक, आर्थिक और पर्यटन दृष्टि से महत्ता को देखते हुए इस संपूर्ण मार्ग को राष्ट्रीय राजमार्ग घोषित करने पर विचार किया जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह सुरंग जोगिंद्रनगर क्षेत्र को लुग घाटी के माध्यम से कुल्लू से एक सर्व‑मौसमीय वैकल्पिक मार्ग द्वारा जोड़ेगी, जिससे पठानकोट, जोगिंद्रनगर, मंडी और कुल्लू के बीच दूरी एवं यात्रा समय में उल्लेखनीय कमी आएगी और वर्तमान मार्गों पर दबाव घटेगा।
लोक निर्माण मंत्री ने बताया कि भूभू जोत कॉरिडोर के विकसित होने से लुग घाटी और आसपास के क्षेत्रों में पर्यटन को नई दिशा मिलेगी, होम‑स्टे, छोटे व्यापार, परिवहन सेवाओं और स्थानीय रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि ऊँचाई वाले सीमांत क्षेत्रों की ओर जाने वाली सेना और अन्य सुरक्षा बलों के लिए भी यह एक अतिरिक्त विश्वसनीय मार्ग उपलब्ध कराएगा, विशेषकर उन दिनों में जब भारी बर्फ़बारी के कारण कुछ दर्रे बंद रहते हैं।
विक्रमादित्य सिंह ने अनुरोध किया कि राष्ट्रीय हित तथा सीमा क्षेत्र की आवश्यकताओं को देखते हुए भूभू जोत सुरंग और इससे जुड़ी सड़क उन्नयन की प्रक्रिया को प्राथमिकता के आधार पर आगे बढ़ाया जाए।
भूभू जोत प्रस्ताव के अतिरिक्त, विक्रमादित्य सिंह ने प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से संबंधित कई महत्त्वपूर्ण पुल और सड़क परियोजनाओं पर भी चर्चा की। उन्होंने ब्यास नदी पर बसंतिपत्तन–खेरी के बीच दो‑लेन पुल निर्माण का मामला उठाया, जो कांगड़ा और हमीरपुर ज़िलों को सीधे जोड़ते हुए वर्तमान राष्ट्रीय राजमार्ग पर यातायात का दबाव घटाएगा और यात्रियों तथा व्यावसायिक वाहनों के लिए छोटा व सुरक्षित मार्ग प्रदान करेगा। इसी प्रकार मंडी ज़िले में पंडोह के निकट ब्यास पर मोटरेबल स्टील ट्रस पुल निर्माण का प्रस्ताव भी रखा गया, जो आंतरिक संपर्क को बेहतर बनाते हुए आपदा या राजमार्ग अवरोध की स्थिति में वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध कराएगा और स्थानीय आर्थिक गतिविधियों को प्रोत्साहन देगा।
लोक निर्माण मंत्री ने सेंट्रल रोड एंड इन्फ्रास्ट्रक्चर फंड (CRIF) तथा अन्य केंद्रीय योजनाओं के अंतर्गत हिमाचल प्रदेश के लिए स्वीकृत कार्यों का उल्लेख करते हुए अब तक प्रदान किए गए सहयोग के लिए केंद्र सरकार के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि सड़कों के चौड़ीकरण, सुदृढ़ीकरण एवं उन्नयन, सुरक्षा दीवारों, ढलान सुरक्षण, बाईपास और सुरंगों से जुड़े अतिरिक्त प्रस्ताव भी विचाराधीन हैं, जिनको शीघ्र स्वीकृति मिलने से राज्य की कनेक्टिविटी में व्यापक सुधार होगा। उन्होंने आश्वस्त किया कि हिमाचल प्रदेश सरकार ने अपनी प्राथमिकताएँ तय कर ली हैं और लोक निर्माण विभाग इन परियोजनाओं के गुणवत्तापूर्ण और समयबद्ध क्रियान्वयन के लिए प्रतिबद्ध है।
विक्रमादित्य सिंह ने रोपवे परियोजनाओं को बढ़ावा देने, पर्वतीय क्षेत्रों के लिए कुछ मानकों में व्यावहारिक छूट और वैकल्पिक परिवहन साधनों के प्रोत्साहन संबंधी नीतिगत पहल के लिए भी केंद्र सरकार का धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि हिमाचल जैसे पहाड़ी राज्य में बेहतर सड़क और रोपवे कनेक्टिविटी केवल सुविधाजनक यात्रा का साधन भर नहीं, बल्कि आर्थिक विकास, आपदा प्रबंधन, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और आम जनजीवन की गुणवत्ता से सीधे जुड़ा हुआ प्रश्न है।
केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री श्री नितिन गडकरी ने हिमाचल प्रदेश के लोक निर्माण मंत्री और श्रीमती राजनी पाटिल द्वारा रखे गए सभी मुद्दों को गंभीरता और सहानुभूति से सुना। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार पर्वतीय एवं सीमांत राज्यों में सड़क और पुल अवसंरचना को सुदृढ़ करने के लिए प्रतिबद्ध है और हिमाचल प्रदेश की वास्तविक आवश्यकताओं पर सकारात्मक विचार किया जाएगा।
विक्रमादित्य सिंह ने विश्वास व्यक्त किया कि मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व में हिमाचल प्रदेश सरकार, केंद्र सरकार के साथ निकट समन्वय बनाकर भूभू जोत सुरंग सहित सड़कों, पुलों और सुरंगों की महत्त्वपूर्ण परियोजनाओं को आगे बढ़ाएगी। उन्होंने कहा कि मज़बूत केंद्रीय सहयोग के साथ, प्रदेश के दूरदराज, सीमांत और आपदा‑प्रवण क्षेत्रों को क्रमिक रूप से बेहतर, सुरक्षित और सर्व‑मौसमीय सड़कों से जोड़ा जा सकेगा, जिससे रोज़गार, निवेश और समावेशी विकास के नए द्वार खुलेंगे और हिमाचल प्रदेश के लोगों का जीवन स्तर और अधिक सुदृढ़ होगा।
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