नेपाल और तिब्बत में 633 लोगों की मौत की खबर, करीब 2,500 लापता; सैकड़ों भारतीय अब भी फंसे
नेपाल और तिब्बत में 633 लोगों की मौत की खबर, करीब 2,500 लापता; सैकड़ों भारतीय अब भी फंसे
खबर खास | काठमांडू
बुधवार को आई विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन के बाद नेपाल में हालात बेहद गंभीर बने हुए हैं। खतरा अभी टला नहीं है। नेपाल-चीन सीमा के पास भूस्खलन के कारण दो नई झीलें बन गई हैं, जिससे आसपास के इलाकों में फिर से बाढ़ और भूस्खलन का खतरा बढ़ गया है।
इनमें से एक झील से लगातार पानी का रिसाव हो रहा है, जबकि दूसरी झील का आकार लगातार बढ़ रहा है। इससे निचले इलाकों में अचानक बाढ़ आने की आशंका जताई जा रही है।
बुधवार को अचानक आई बाढ़ ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई। तेज बहाव के साथ कीचड़, रेत, बजरी और बड़े-बड़े पत्थर निचले इलाकों में जा पहुंचे, जिससे कई क्षेत्रों में भारी नुकसान हुआ।
ताजा आंकड़ों के मुताबिक, नेपाल और तिब्बत में इस आपदा के कारण 633 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि करीब 2,500 लोग अब भी लापता हैं। लापता लोगों में 320 भारतीय नागरिक भी शामिल हैं। इसके अलावा करीब 400 भारतीय नागरिक अभी भी तिब्बत में फंसे हुए हैं।
संयुक्त राष्ट्र (UN) ने चेतावनी दी है कि नेपाल में हजारों परिवारों को तत्काल भोजन और सुरक्षित पेयजल की जरूरत है। बचाव और राहत अभियान लगातार जारी हैं, जबकि प्रभावित इलाकों तक जरूरी सामान पहुंचाने की कोशिश की जा रही है।
इस बीच कई देशों और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों ने नेपाल की मदद के लिए कदम आगे बढ़ाए हैं। यूरोपीय संघ, कनाडा और अमेरिका ने नेपाल के लिए राहत सामग्री और वित्तीय सहायता की घोषणा की है।
नेपाल सरकार ने भी आपदा से निपटने के लिए बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने पांच जिलों के 15 स्थानीय निकायों को आपदा प्रभावित आपातकालीन क्षेत्र घोषित किया है। इस फैसले का उद्देश्य सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों में राहत, बचाव और पुनर्वास कार्यों में तेजी लाना है।
हालांकि राहत एवं बचाव अभियान जारी है, लेकिन नई बनी झीलों से उत्पन्न खतरे ने प्रशासन और स्थानीय लोगों की चिंता बढ़ा दी है। अधिकारियों के सामने अब प्रभावित क्षेत्रों को सुरक्षित रखने के साथ-साथ संभावित नए जलप्रवाह और भूस्खलन से निपटने की चुनौती है।
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