16वें वित्त आयोग ने हिमाचल की ओपीएस स्कीम व बिजली सब्सिडी को बड़ा वितीय कुप्रबंधन माना है।
16वें वित्त आयोग ने हिमाचल की ओपीएस स्कीम व बिजली सब्सिडी को बड़ा वितीय कुप्रबंधन माना है।
अनुराधा शर्मा
हिमाचल
प्रदेश सरकार के सरकार को चलाने के खर्चों पर लगाम लगाने को 16वें वित्तायोग ने हिमाचल को मिलने वाले राजस्व घाटा अनुदान को खत्म किया जिससे प्रदेश में वित्तीय संकट गहराने का खतरा बढ़ गया है। हालांकि यह सिफारिशें राजनीति से प्रेरित नहीं हैं, यह कहना भी सही नहीं होगा क्योंकि इन सिफारिशों में देश के धन कुबेरों के लाखों करोड़ों के कर्ज माफ किए जाते रहे। लेकिन इस बाबत कहीं कोई एक शब्द भी सामने नहीं आता।
प्रदेश के नेताओं, नौकरशाहों और कारपोरेट घरानों ने समय-समय पर राज्य का पूरी तरह से दोहन किया। लेकिन आय के साधन बढ़ाने और अपने खर्च घटाने के लिए जो-जो कदम उठाने चाहिए थे, वह नहीं उठाए गए। इतना ही नहीं, उनसे सीख लेते हुए अभी भी कोई कदम नहीं उठाए जा रहे। जिसके चलते हिमाचल आज वित्तीय तौर पर लड़खड़ा रहा है। प्रदेश पर लगभग एक लाख करोड़ रुपए से अधिक का कर्ज हो गया है। वहीं, रही सही कसर 16वें वित्त आयोग ने पूरी कर दी है। इससे पूर्व 15वें वित्त आयोग की सिफारिशें के मुताबिक यह अनुदान 17 राज्यों को मिलता था, जिसे अब सभी राज्यों के लिए खत्म कर दिया गया है।
इसके अलावा 16वें वित्त आयोग ने हिमाचल को ओपीएस व बिजली सब्सिडी को बड़ा वितीय कुप्रबंधन माना है। लेकिन वहीं, दूसरी ओर जिन राज्यों को ये अनुदान लगातार मिल भी रहा था, उन्होंने भी अपने खर्चों पर लगाम नहीं लगाई।
अब केंद्र और प्रदेश के बीच राज्य के संसाधनों को लेकर एक नई जंग छिड़ गई है। जबकि भाजपा व कांग्रेस में भी राजनीतिक रस्साकशी शुरू हो गई है। इससे प्रदेश की राजनीति में तो उबाल आएगा।
हिमाचल को 1990 से लेकर अब तक मिले आरडीजी
नवें वितायोग के दौरान 1990 में उदारीकरण का उदय होने के बीच 1990 से 1995 के बीच हिमाचल को केंद्र सरकार से 1,340 करोड़ रुपए की रकम बतौर आरडीजी मिली थी। तभी हिमाचल जैसे प्रदेश के लिए 90:10 ग्रांट-लोन रेशो का फार्मूला सामने लाया गया था। इसके बाद 1995 से 2000 तक दसवें वितायोग की सिफारिशें लागू रही । वर्ष 1995 से 2000 के दौरान हिमाचल को केंद्र से 3,344 करोड़ रुपए की बतौर ग्रांट मिली। इस समय पाचवें वेतन आयोग की सिफारिशों की वजह से प्रदेश सरकार का खर्च बढ़ गया था।। इसी दौरान हिमाचल में हाइड्रो पावर प्रोजेक्टस का दौर भी चला। 11 वितायोग की सिफारिशें 2000 से 2005 तक लागू रही । इस दौरान हिमाचल को केंद्र से आरडीजी के तौर पर 5,782 करोड़ रुपए की रकम मिली। केंद्र सरकार ने 2003 में प्रदेश के लिए औद्योगिक पैकेज भी घोषित किया। नतीजतन हिमाचल को करों से आय में बढ़ोतरी हो गई।
12वें वितायोग की सिफारिशें 2005 से 2010 के बीच लागू रही। इस दौरान प्रदेश को केंद्र से 8,737 करोड़ रुपए के बतौर आरडीजी मिली। इसके बाद 13वें वितायोग की सिफारिशें 2010 से 2015 तक लागू रही और इस दौरान प्रदेश को मिली वाली आरडीजी की रकम में कटौती हो गई। 13वें वितायोग के दौरान हिमाचल को केंद्र से आरडीजी के रूप में 7,889 करोड़ की रकम मिली।
14वें वितायोग की सिफारिशें 2015 से 2020 तक लागू रहा। इस दौरान केंद्र से हिमाचल को 10 हजार 500 करोड़ रुपए बतौर आरडीजी के मिले।
कोविड के दौरान केंद्र ने दिए थे 48 हजार करोड़ बतौर आरडीजी
2019-2020 में दुनिया भर में कोविड महामारी ने हाहाकार मचा दिया। इस दौरान प्रदेश और केंद्र दोनों जगहों पर भाजपा की सरकारें थी। 2020 से 2025 तक प्रदेश के लिए 15वें वितायोग की सिफारिशें लागू रही। लेकिन इस दौरान केंद्र ने तमाम प्रदेशों को भारी मदद दी। ऐसे में हिमाचल को इन पांच सालों में केंद्र से 48 हजार करोड़ की रकम बतौर आरडीजी मिली।
आंकड़ों के मुताबिक 1990 से लेकर अब तक हिमाचल को 85 से 90 हजार करोड़ रुपए की रकम केंद्र से बतौर आरडीजी के मिली हैं। जिसे अब 16वें वितायोग ने बंद कर दिया हैं। जिसके चलते प्रदेश की सुक्खू सरकार पर वित्तीय संकट गहरा गया है।
आरडीजी को लेकर विस के बजट सत्र में प्रस्ताव पारित करेगी सरकार
वहीं, सीएम सुक्खू ने कहा कि सरकार आरडीजी को लेकर विधानसभा के सत्र में प्रस्ताव पारित करेगी। उन्होंने कहा कि विधानसभा के विशेष सत्र को लेकर राज्यपाल की ओर से दिए गए सुझाव को सरकार ने मान लिया है। यह बजट सत्र 16 फरवरी से शुरू हो रहा है जिसके लिए अधिसूचना भी जारी कर दी गई है। इस दौरान आरडीजी को लेकर चर्चा की जाएगी। सुक्खू ने कहा कि हिमाचल प्रदेश की जनता को यह पता लगना चाहिए कि केंद्र सरकार ने प्रदेश को क्या दिया है। जो करों की हिस्सेदारी है, वह हर साल बढ़ती है। विशेष ग्रांट जो हिमाचल प्रदेश को आरडीजी के रूप में मिलती थी, वह 72 साल बाद बंद हुई है। उन्होंने कहा कि वह भाजपा के विधायकों और सांसदों से इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री से मिलने की बात रखेंगे और उन्हें भी आमंत्रित करेंगे। वहीं, इस बाबत नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने भी कहा है कि यदि सरकार चाहे तो वह भी इस मुद्दे पर पीएम से मिलने के लिए सरकार के साथ जाएंगे।
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