हरियाणा की खिलाड़ी ने 9.81 मीटर का सत्र का सर्वश्रेष्ठ थ्रो किया, जबकि समीक्षा के बाद शिल्पा के. शायला ने नाटकीय अंदाज में कांस्य पदक जीताb
हरियाणा की खिलाड़ी ने 9.81 मीटर का सत्र का सर्वश्रेष्ठ थ्रो किया, जबकि समीक्षा के बाद शिल्पा के. शायला ने नाटकीय अंदाज में कांस्य पदक जीताb
खबर खास | नई दिल्ली
भारत की शर्मिला धनखड़ ने सोमवार को राष्ट्रमंडल खेलों में महिलाओं की पैरा शॉट पुट एफ57 स्पर्धा में शानदार प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक अपने नाम किया। उन्होंने 9.81 मीटर का सत्र का सर्वश्रेष्ठ थ्रो कर देश को गौरवान्वित किया।
इसी स्पर्धा में भारत की शिल्पा के. शायला ने कांस्य पदक जीता। इन दोनों पदकों के साथ राष्ट्रमंडल खेलों में भारत के कुल पदकों की संख्या बढ़कर 10 हो गई और पदक तालिका में भारत आठवें स्थान पर पहुंच गया।
यह भारत का राष्ट्रमंडल खेलों में दूसरा स्वर्ण पदक है। इससे पहले रविवार को मीराबाई चानू ने महिलाओं की 48 किलोग्राम भारोत्तोलन स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीता था।
एफ57 वर्ग उन पैरा एथलीटों के लिए होता है, जिनके निचले अंग प्रभावित होते हैं या जिनकी मांसपेशियों की ताकत कम होती है। इस स्पर्धा में खिलाड़ी बैठकर शॉट पुट करते हैं।
संघर्षों से भरी रही शर्मिला धनखड़ की यात्रा
हरियाणा के महेंद्रगढ़ जिले के चित्रौली गांव की रहने वाली शर्मिला धनखड़ दो वर्ष की उम्र में पोलियो से प्रभावित हो गई थीं, जिसके कारण उनका एक पैर कमजोर हो गया। उनके पिता छोटे किसान थे, जबकि उनकी मां दृष्टिबाधित हैं। आर्थिक तंगी के कारण परिवार उनके बेहतर इलाज का खर्च नहीं उठा सका।
पैरा एथलेटिक्स तक पहुंचने का उनका सफर भी आसान नहीं रहा। 34 वर्ष की उम्र में उन्होंने कोच टेकचंद और देवेंद्र के मार्गदर्शन में एफ57 सीटेड शॉट पुट स्पर्धा का प्रशिक्षण शुरू किया। आर्थिक स्थिति इतनी कमजोर थी कि वर्ष 2023 में प्रशिक्षण का खर्च उठाने के लिए उन्होंने कथित तौर पर अपना घर तक बेच दिया। इसके बाद उनका परिवार किराए के मकान में रहने लगा। तमाम कठिनाइयों के बावजूद उन्होंने लगातार अभ्यास जारी रखा।
शर्मिला को निजी जीवन में भी कई बड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ा। बताया जाता है कि 26 वर्ष की उम्र में उनके पहले पति ने उन्हें छोड़ दिया था, जिसके बाद वह अपनी दो बेटियों के साथ अपने माता-पिता के घर लौट आईं। 28 वर्ष की उम्र में उन्होंने अजीत से विवाह किया। अजीत ने एक अखबार में पैरा एथलीटों के बारे में पढ़ने के बाद शर्मिला को पैरा खेलों में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया और पूरे सफर में उनका साथ दिया।
समीक्षा के बाद शिल्पा को मिला कांस्य पदक
महिलाओं की एफ57 शॉट पुट स्पर्धा के फाइनल में शिल्पा के. शायला ने 7.26 मीटर का अपना व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ थ्रो किया। शुरुआत में उन्हें चौथे स्थान पर रखा गया था, जबकि नाइजीरिया की यूकारिया इयाजी को कांस्य पदक दिया गया था।
भारतीय दल द्वारा आधिकारिक विरोध दर्ज कराने के बाद अधिकारियों ने नाइजीरियाई खिलाड़ी के प्रयासों की दोबारा समीक्षा की। समीक्षा के दौरान उनके एकमात्र वैध माने गए थ्रो को फाउल घोषित कर दिया गया। संशोधित परिणामों में शिल्पा चौथे स्थान से तीसरे स्थान पर पहुंच गईं और उन्हें कांस्य पदक प्रदान किया गया।
पदक की पुष्टि होने के बाद भावुक शिल्पा को शर्मिला धनखड़ के साथ जश्न मनाते देखा गया। खुशी के इस पल में उनकी आंखों से आंसू छलक पड़े। हालांकि, नाइजीरिया अभी आधिकारिक अपील कर सकता है और यदि उसकी अपील स्वीकार होती है तो पदक तालिका में बदलाव संभव है।
अन्य स्पर्धाओं में भारत ने जीते रजत और कांस्य पदक
भारत को अन्य खेल स्पर्धाओं में भी सफलता मिली।
पुरुषों की ऊंची कूद के फाइनल में सर्वेश कुशारे ने 2.25 मीटर की छलांग लगाकर रजत पदक जीता। जमैका के रोमेन बेकफोर्ड ने काउंटबैक के आधार पर स्वर्ण पदक हासिल किया, जबकि इंग्लैंड के किमानी जैक ने 2.20 मीटर की छलांग के साथ कांस्य पदक जीता।
भारोत्तोलन में अजय बाबू ने पुरुषों की 79 किलोग्राम स्पर्धा में रजत पदक हासिल किया। महिलाओं की 58 किलोग्राम स्पर्धा में बिंदियारानी देवी ने कांस्य पदक जीता, जबकि ज्ञानेश्वरी यादव ने महिलाओं की 53 किलोग्राम स्पर्धा में रजत पदक अपने नाम किया।
पदक तालिका में ऑस्ट्रेलिया शीर्ष पर
राष्ट्रमंडल खेलों की पदक तालिका में ऑस्ट्रेलिया 26 स्वर्ण सहित कुल 59 पदकों के साथ शीर्ष स्थान पर बना हुआ है। वहीं, पैरा एथलेटिक्स और भारोत्तोलन में भारत के शानदार प्रदर्शन से देश का अभियान लगातार मजबूत हो रहा है।
गरीबी, आर्थिक तंगी और निजी जीवन के कठिन संघर्षों से निकलकर राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक जीतने वाली शर्मिला धनखड़ की कहानी इस टूर्नामेंट की सबसे प्रेरणादायक कहानियों में से एक बनकर उभरी है।
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