महंगाई पर राहत, अर्थव्यवस्था पर भरोसा—आरबीआई ने बढ़ाया GDP ग्रोथ का अनुमान, ब्याज दरों में नहीं किया कोई बदलाव
महंगाई पर राहत, अर्थव्यवस्था पर भरोसा—आरबीआई ने बढ़ाया GDP ग्रोथ का अनुमान, ब्याज दरों में नहीं किया कोई बदलाव
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने अगस्त 2026 की समीक्षा बैठक में रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर यथावत रखने का फैसला किया है। इसका सीधा असर यह होगा कि होम लोन, ऑटो लोन और अन्य फ्लोटिंग रेट वाले कर्जों की EMI फिलहाल पहले की तरह ही रहेगी। आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने तीन दिवसीय एमपीसी बैठक के फैसलों की घोषणा करते हुए बताया कि मौजूदा घरेलू और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों को देखते हुए समिति ने सर्वसम्मति से रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं करने का निर्णय लिया है। साथ ही केंद्रीय बैंक ने अपना 'तटस्थ' (Neutral) रुख भी बरकरार रखा है, जिससे भविष्य में आर्थिक जरूरतों के अनुसार ब्याज दरों में बदलाव की संभावना बनी रहेगी। रेपो रेट क्या है? रेपो रेट वह ब्याज दर होती है जिस पर वाणिज्यिक बैंक अपनी अल्पकालिक वित्तीय जरूरतों के लिए आरबीआई से कर्ज लेते हैं। जब रेपो रेट में बदलाव होता है तो उसका असर बैंकों की लोन ब्याज दरों और आम लोगों की EMI पर भी पड़ता है। चूंकि इस बार रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं हुआ है, इसलिए फ्लोटिंग रेट वाले होम लोन, ऑटो लोन और अन्य कर्जों की EMI फिलहाल स्थिर रहेगी। पिछले फैसलों पर एक नजर फरवरी से दिसंबर 2025 के बीच आरबीआई कुल 1.25 प्रतिशत की रेपो रेट कटौती कर चुका है। इसके बाद फरवरी, अप्रैल, जून और अब अगस्त 2026 की मौद्रिक नीति समीक्षा में रेपो रेट 5.25 प्रतिशत पर स्थिर रखा गया है। लगातार चौथी बार रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं होने से संकेत मिलता है कि फिलहाल आरबीआई ब्याज दरों में बड़े बदलाव के पक्ष में नहीं है और आर्थिक स्थिरता को प्राथमिकता दे रहा है।
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January 18, 2026
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