सोशल मीडिया से सियासत तक पहुंचा E20 का मुद्दा, पुराने वाहनों पर असर के दावों ने बढ़ाई बहस; सरकार और विपक्ष आमने-सामने
सोशल मीडिया से सियासत तक पहुंचा E20 का मुद्दा, पुराने वाहनों पर असर के दावों ने बढ़ाई बहस; सरकार और विपक्ष आमने-सामने
देशभर में इन दिनों E20 पेट्रोल को लेकर बहस तेज हो गई है। पहले सोशल मीडिया पर इसे लेकर तरह-तरह के दावे सामने आए, फिर मामला राजनीतिक विवाद में बदल गया। विपक्षी दल सरकार पर सवाल उठा रहे हैं, जबकि केंद्र सरकार लगातार यह स्पष्ट कर रही है कि E20 ईंधन सुरक्षित है और इसे वैज्ञानिक परीक्षणों के बाद ही लागू किया गया है। इसके बावजूद विवाद थमता नजर नहीं आ रहा। कहीं प्रधानमंत्री को लाखों हस्ताक्षरों वाली याचिका सौंपने की कोशिश हो रही है तो कहीं केंद्रीय मंत्री के आवास तक विरोध मार्च निकाले जा रहे हैं। आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने प्रधानमंत्री आवास तक मार्च निकालने का ऐलान किया और दावा किया कि उनकी पार्टी ने देशभर से 2.33 लाख लोगों के हस्ताक्षर जुटाए हैं। हालांकि दिल्ली पुलिस ने मार्च की अनुमति नहीं दी और फिरोजशाह रोड पर बैरिकेड लगाकर प्रदर्शनकारियों को रोक दिया। इसके बाद पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं ने वहीं धरना दिया। करीब एक घंटे से अधिक चले प्रदर्शन के बाद पुलिस ने शिकायत प्रधानमंत्री कार्यालय तक पहुंचाने का आश्वासन दिया, जिसके बाद धरना समाप्त हुआ। केजरीवाल ने साफ किया कि E20 के खिलाफ उनका आंदोलन जारी रहेगा। इससे पहले नागपुर में युवा कांग्रेस ने केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी के आवास तक मार्च निकालने की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रास्ते में ही रोक दिया और कई कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया। E20 ऐसा ईंधन है जिसमें 20 प्रतिशत इथेनॉल और 80 प्रतिशत पेट्रोल मिलाया जाता है। इथेनॉल गन्ने, मक्का और अन्य कृषि उत्पादों से बनने वाला जैव ईंधन है। सरकार का कहना है कि इसका उद्देश्य कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करना, प्रदूषण और कार्बन उत्सर्जन घटाना तथा किसानों और बायोफ्यूल उद्योग को बढ़ावा देना है। भारत ने वर्ष 2030 तक पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रण का लक्ष्य तय किया था, जिसे समय से पहले हासिल कर लिया गया। इसके बाद देशभर के अधिकांश पेट्रोल पंपों पर E20 को सामान्य पेट्रोल के रूप में उपलब्ध कराया जाने लगा और यहीं से विवाद ने जोर पकड़ लिया। कई वाहन मालिकों, विशेषकर अप्रैल 2023 से पहले बने वाहनों के उपयोगकर्ताओं ने शिकायत की कि E20 के इस्तेमाल से गाड़ियों का माइलेज कम हो रहा है, इंजन की कार्यक्षमता प्रभावित हो रही है, रबर पाइप और फ्यूल लाइन जल्दी खराब हो रही है तथा रखरखाव का खर्च बढ़ गया है। यही शिकायतें धीरे-धीरे सोशल मीडिया से निकलकर राजनीतिक मुद्दा बन गईं। आम आदमी पार्टी ने 'StopE20Petrol' अभियान के तहत ऑनलाइन हस्ताक्षर अभियान भी शुरू किया है। वहीं कांग्रेस का कहना है कि सरकार वैज्ञानिक परीक्षणों का हवाला दे रही है, लेकिन देशभर से वाहन मालिकों और मैकेनिकों की शिकायतों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने दावा किया कि लोगों को कम माइलेज, इंजन में खराबी, फ्यूल इंजेक्टर जाम होने, फ्यूल पाइप और रबर पार्ट्स के खराब होने जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। इस पूरे विवाद के बीच केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के अलग-अलग समय पर दिए गए बयान भी चर्चा का विषय बने। पहले उन्होंने कहा कि यदि E20 से किसी एक भी वाहन को नुकसान हुआ है तो उसका उदाहरण सामने लाया जाए। बाद में बॉम्बे हाईकोर्ट में दायर याचिका में उन्होंने स्पष्ट किया कि E20 नीति को तैयार करने और लागू करने की जिम्मेदारी पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय की है और उनके मंत्रालय की इसमें कोई भूमिका नहीं है। इसके बाद राज्यसभा में उन्होंने स्वीकार किया कि वर्ष 2005 से 2016 के बीच बने कुछ BS-III वाहनों में रबर पार्ट्स और गैस्केट बदलने की आवश्यकता पड़ सकती है तथा E20 के इस्तेमाल से कुछ वाहनों का माइलेज 2 से 6 प्रतिशत तक कम हो सकता है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि उपलब्ध अध्ययनों में इंजन पर किसी बड़े नकारात्मक प्रभाव के प्रमाण नहीं मिले हैं। इसी विवाद के बीच नितिन गडकरी ने बॉम्बे हाईकोर्ट का दरवाजा भी खटखटाया। उन्होंने आरोप लगाया कि सोशल मीडिया पर उनके और उनके परिवार के खिलाफ फर्जी तथा मानहानिकारक पोस्ट और डीपफेक सामग्री प्रसारित की जा रही है, जिनमें यह दावा किया जा रहा है कि उन्हें E20 कार्यक्रम से निजी आर्थिक लाभ हो रहा है। गडकरी ने इन आरोपों को पूरी तरह निराधार बताते हुए संबंधित सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की अनुमति मांगी, जिसे हाईकोर्ट ने स्वीकार कर लिया। सरकार और विशेषज्ञों का कहना है कि सभी वाहनों में E20 से समस्या नहीं आएगी। हालांकि पुराने वाहनों में इस्तेमाल किए गए कुछ रबर और प्लास्टिक के पुर्जे लंबे समय तक अधिक इथेनॉल वाले ईंधन के लिए पूरी तरह अनुकूल नहीं हो सकते। इसी वजह से पुराने वाहनों के लिए विशेष कन्वर्जन किट पर भी परीक्षण किए जा रहे हैं। माइलेज को लेकर सरकार ने पहली बार संसद में स्वीकार किया कि E20 के इस्तेमाल से कुछ वाहनों में 2 से 6 प्रतिशत तक माइलेज कम हो सकता है। इसकी वजह इथेनॉल की ऊर्जा क्षमता का सामान्य पेट्रोल से कम होना बताया गया है। हालांकि सरकार का कहना है कि इसका असर हर वाहन पर समान नहीं होगा। इस बीच सोशल मीडिया पर E20 को लेकर कथित भ्रामक जानकारियां फैलाने के आरोप में नागपुर साइबर पुलिस ने कई सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स और कंटेंट क्रिएटर्स के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज की है। पुलिस का आरोप है कि इन लोगों ने गलत और भ्रामक जानकारी फैलाकर आम लोगों को गुमराह करने का प्रयास किया।
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पंजाब : सभी पुलिस थानों व सरकारी स्थानों पर मौजूद लावारिस वाहन 30 दिन के भीतर हटाने के आदेश
January 18, 2026
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