करीब तीन दशक के सिनेमाई योगदान और महिला अधिकारों के लिए आवाज उठाने पर मिला सम्मान, शाहरुख खान के बाद रानी मुखर्जी को मिला विश्वविद्यालय का सर्वोच्च सम्मान
करीब तीन दशक के सिनेमाई योगदान और महिला अधिकारों के लिए आवाज उठाने पर मिला सम्मान, शाहरुख खान के बाद रानी मुखर्जी को मिला विश्वविद्यालय का सर्वोच्च सम्मान
खबर खास | मेलबर्न
बॉलीवुड की मशहूर अभिनेत्री रानी मुखर्जी को ऑस्ट्रेलिया की ला ट्रोब यूनिवर्सिटी ने मानद डॉक्टर ऑफ लेटर्स की उपाधि से सम्मानित किया है। उन्हें यह प्रतिष्ठित सम्मान भारतीय सिनेमा में करीब तीन दशक के योगदान के साथ-साथ महिलाओं, बच्चों और वंचित समुदायों के मुद्दों को मजबूती से उठाने के लिए दिया गया।
14 अगस्त को मेलबर्न के फेडरेशन स्क्वायर में आयोजित एक विशेष समारोह में रानी मुखर्जी को यह सम्मान प्रदान किया गया। यह कार्यक्रम इंडियन फिल्म फेस्टिवल ऑफ मेलबर्न 2026 के तहत आयोजित किया गया, जो 13 से 23 अगस्त तक चल रहा है।
इस सम्मान के साथ रानी मुखर्जी ला ट्रोब यूनिवर्सिटी से मानद डॉक्टरेट पाने वाली दूसरी भारतीय फिल्म हस्ती बन गई हैं। उनसे पहले बॉलीवुड अभिनेता शाहरुख खान को 2019 में सिनेमा और समाजसेवा के क्षेत्र में योगदान के लिए यह सम्मान दिया गया था। बाद में विश्वविद्यालय ने उनके नाम पर पीएचडी छात्रवृत्ति की भी घोषणा की थी।
सम्मान प्राप्त करने के बाद रानी मुखर्जी ने इसे अपने जीवन के सबसे विनम्र और भावुक पलों में से एक बताया। उन्होंने कहा कि सिनेमा उनके लिए केवल अभिनय का माध्यम नहीं रहा, बल्कि इसके जरिए उन्होंने ऐसी कहानियां सामने रखने का प्रयास किया, जिन पर समाज में चर्चा होना जरूरी था।
रानी ने अपने करियर को जोखिम उठाने वाला सफर बताते हुए कहा कि उन्होंने हमेशा उन कहानियों को चुना, जिन्होंने उन्हें भीतर से प्रभावित किया और समाज के महत्वपूर्ण मुद्दों को सामने रखा। उनकी फिल्मों ब्लैक, नो वन किल्ड जेसिका, हिचकी, मर्दानी श्रृंखला और मिसेज चटर्जी बनाम नॉर्वे में महिलाओं के अधिकार, लैंगिक न्याय, दिव्यांगता और सामाजिक बदलाव जैसे विषयों को प्रमुखता से दिखाया गया है।
ला ट्रोब यूनिवर्सिटी के कुलाधिपति जॉन ब्रम्बी ने रानी मुखर्जी के काम की सराहना करते हुए कहा कि उनका सिनेमा मनोरंजन से आगे बढ़कर सामाजिक न्याय, समानता और समावेशन जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा को जन्म देता है।
रानी मुखर्जी ने यह सम्मान भारत और दुनियाभर के अपने प्रशंसकों को समर्पित किया। उन्होंने कहा कि कलाकारों की जिम्मेदारी केवल अभिनय तक सीमित नहीं होती, बल्कि वे अपनी संस्कृति के अनौपचारिक राजदूत भी बनते हैं।
उन्होंने कहा कि अगर उनकी फिल्मों ने लोगों को भारत और भारतीय महिलाओं को बेहतर ढंग से समझने, संवाद शुरू करने और संवेदनशीलता विकसित करने में मदद की है, तो वह इसे अपने अभिनय जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक मानती हैं।
रानी ने कहा कि यह सम्मान भारतीय कलाकारों और सिनेमा की उस ताकत की पहचान है, जो कहानियों के माध्यम से देशों के बीच दोस्ती, समझ और आपसी संबंधों को मजबूत कर सकती है।
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