करीब 19 साल जेल में रहा था कोली; नवंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने आखिरी लंबित निठारी केस में किया था बरी
करीब 19 साल जेल में रहा था कोली; नवंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने आखिरी लंबित निठारी केस में किया था बरी
खबर खास | नई दिल्ली
निठारी हत्याकांड मामले में आरोपी रहे और सभी लंबित मामलों में अदालत से बरी हो चुके सुरेंद्र कोली की शुक्रवार, 18 सितंबर को हरिद्वार में मौत हो गई। पुलिस के अनुसार, करीब 50 वर्षीय कोली का शव उत्तरी हरिद्वार के भूपतवाला इलाके में एक चाय की दुकान के अंदर फंदे से लटका मिला। शुरुआती जानकारी में इसे आत्महत्या का मामला माना जा रहा है। मौके से कोई सुसाइड नोट मिलने की बात सामने नहीं आई है। पुलिस मौत के कारणों और परिस्थितियों की जांच कर रही है।
कुछ महीने पहले ही हरिद्वार आया था
स्थानीय रिपोर्टों के मुताबिक, कोली पिछले कुछ महीनों से हरिद्वार में अकेला रह रहा था। बताया जा रहा है कि करीब चार दिन पहले उसने सड़क किनारे एक छोटी सी दुकान किराए पर ली थी और वहां चाय बेचने का काम शुरू किया था। उसने दुकान के मालिक को कई महीनों का किराया भी कथित तौर पर पहले ही दे दिया था।
कुंभ की तैयारियों के बीच दुकान हटने की आशंका?
स्थानीय लोगों के अनुसार, इलाके में कुंभ की तैयारियों को लेकर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई चल रही थी। इसी वजह से कोली अपनी नई दुकान हटाए जाने को लेकर परेशान हो सकता था। हालांकि, पुलिस ने अभी तक इस बात की पुष्टि नहीं की है कि दुकान हटने की आशंका ही उसकी मौत की वजह थी। पुलिस सभी संभावित पहलुओं को ध्यान में रखकर जांच कर रही है।
2005-06 में सामने आया था निठारी कांड
निठारी मामला वर्ष 2005-06 में सामने आया था, जब नोएडा के निठारी इलाके से बच्चों और महिलाओं के लापता होने की घटनाओं ने लोगों को झकझोर दिया था। 29 दिसंबर 2006 को नोएडा के सेक्टर-31 स्थित कारोबारी मोनिंदर सिंह पंढेर के डी-5 आवास के पीछे नाले और आसपास के इलाकों से मानव अवशेष, जिनमें खोपड़ियां और हड्डियां शामिल थीं, बरामद किए गए थे।
सुरेंद्र कोली पंढेर के घर में घरेलू सहायक के रूप में काम करता था। इसके बाद कोली और पंढेर को गिरफ्तार किया गया था।
सीबीआई ने संभाली थी जांच
जनवरी 2007 में निठारी मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को सौंप दी गई थी। लापता होने और कथित अपराधों से जुड़े कई मामले दर्ज किए गए। कोली पर हत्या, दुष्कर्म, अपहरण और सबूत नष्ट करने समेत कई गंभीर धाराओं के तहत मुकदमे चले।
कई मामलों में कोली को मौत की सजा सुनाई गई थी। हालांकि, अक्टूबर 2023 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उससे जुड़े 12 मामलों में उसे बरी कर दिया।
सुप्रीम कोर्ट ने भी बरकरार रखी थी बरी होने की बात
जुलाई 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने इन मामलों में कोली की बरी किए जाने की स्थिति को बरकरार रखा। इसके बाद नवंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने आखिरी लंबित मामले में उसकी क्यूरेटिव याचिका स्वीकार करते हुए उसकी दोषसिद्धि को रद्द कर दिया था।
सुप्रीम कोर्ट ने उसे आईपीसी की धारा 302, 364, 376 और 201 के तहत लगे आरोपों से बरी कर दिया था। अदालत ने यह भी निर्देश दिया था कि यदि किसी अन्य मामले या कार्यवाही में उसकी जरूरत नहीं है, तो उसे रिहा कर दिया जाए।
इस तरह करीब 19 साल जेल में रहने के बाद सुरेंद्र कोली जेल से बाहर आया था। हरिद्वार में उसकी मौत जेल से बाहर आने के एक साल से भी कम समय बाद हुई है। पुलिस अब उसकी मौत से जुड़े सभी पहलुओं की जांच कर रही है।
Like
Dislike
Love
Angry
Sad
Funny
Wow
पंजाब : सभी पुलिस थानों व सरकारी स्थानों पर मौजूद लावारिस वाहन 30 दिन के भीतर हटाने के आदेश
January 18, 2026
Comments 0