दुनिया के सबसे प्रदूषित शहरों की सूची में कोलकाता चौथे, नई दिल्ली पांचवें और मुंबई छठे स्थान पर; पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में जहरीले धुंध के कारण स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं बढ़ीं।
दुनिया के सबसे प्रदूषित शहरों की सूची में कोलकाता चौथे, नई दिल्ली पांचवें और मुंबई छठे स्थान पर; पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में जहरीले धुंध के कारण स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं बढ़ीं।
खबर खास | लाहौर/नई दिल्ली
पाकिस्तान का लाहौर शुक्रवार को दुनिया का सबसे प्रदूषित शहर बनकर सामने आया। एक वायु गुणवत्ता निगरानी मंच के अनुसार, यहां वायु गुणवत्ता सूचकांक 410 के खतरनाक स्तर पर पहुंच गया।
रिपोर्ट में भारत के तीन शहर भी दुनिया के 10 सबसे प्रदूषित शहरों की सूची में शामिल रहे। पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता चौथे स्थान पर रही, जबकि नई दिल्ली पांचवें और देश की आर्थिक राजधानी मुंबई छठे स्थान पर दर्ज की गई।
प्रांतीय सरकार के अनुसार, लाहौर और पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के अन्य इलाकों में हर साल धुंध की समस्या सामने आती है। यह समस्या विशेष रूप से अक्टूबर से फरवरी के बीच गंभीर हो जाती है। पिछले कुछ वर्षों में बिगड़ता वायु प्रदूषण पूरे प्रांत में सार्वजनिक स्वास्थ्य और पर्यावरण के लिए बड़ी चिंता बन गया है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों और वायु गुणवत्ता से जुड़ी एजेंसियों ने गंभीर धुंध के दौरान लोगों को हानिकारक प्रदूषकों के संपर्क में आने से बचने के लिए सावधानी बरतने की सलाह दी है।
पीएम2.5 का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन के वार्षिक दिशानिर्देश से 45.2 गुना अधिक
आईक्यूएयर की रिपोर्ट के अनुसार, लाहौर में पीएम2.5 प्रदूषकों की सांद्रता विश्व स्वास्थ्य संगठन के वार्षिक दिशानिर्देश में निर्धारित स्तर से 45.2 गुना अधिक थी।
पीएम2.5 का मतलब ऐसे सूक्ष्म कणों से है, जिनका व्यास 2.5 माइक्रोमीटर या इससे कम होता है। ये छोटे कण फेफड़ों में गहराई तक पहुंच सकते हैं और रक्त प्रवाह में भी प्रवेश कर सकते हैं। इनके लंबे समय तक संपर्क में रहने से गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं पैदा होने का खतरा रहता है।
300 से अधिक वायु गुणवत्ता सूचकांक को खतरनाक श्रेणी में रखा जाता है
वायु गुणवत्ता सूचकांक हवा में प्रदूषण के स्तर का आकलन करने का एक पैमाना है। इसका स्तर जितना अधिक होता है, हवा की गुणवत्ता उतनी ही खराब होती है और स्वास्थ्य संबंधी जोखिम भी बढ़ जाते हैं।
स्विट्जरलैंड स्थित वायु गुणवत्ता निगरानी मंच आईक्यूएयर के अनुसार, 300 से अधिक वायु गुणवत्ता सूचकांक को खतरनाक श्रेणी में रखा जाता है। यह हवा की बेहद खराब स्थिति को दर्शाता है, जिससे लोगों के स्वास्थ्य को गंभीर खतरा हो सकता है।
लाहौर में दर्ज किया गया चिंताजनक स्तर इस क्षेत्र में हर साल होने वाली धुंध की गंभीरता और वायु प्रदूषण से सार्वजनिक स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभावों को लेकर बढ़ती चिंता को उजागर करता है।
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