फिरोजपुर के सीमावर्ती गांव के रहने वाले पति-पत्नी पर पाकिस्तान और मलेशिया में बैठे हैंडलरों को सैन्य ठिकानों की संवेदनशील जानकारी देने का आरोप; आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम के तहत मामला दर्ज
फिरोजपुर के सीमावर्ती गांव के रहने वाले पति-पत्नी पर पाकिस्तान और मलेशिया में बैठे हैंडलरों को सैन्य ठिकानों की संवेदनशील जानकारी देने का आरोप; आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम के तहत मामला दर्ज
खबर खास | फिरोजपुर
सेना की खुफिया इकाई और पंजाब पुलिस ने संयुक्त अभियान के दौरान पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (आईएसआई) के लिए जासूसी करने के संदेह में एक पति-पत्नी को गिरफ्तार किया है।
आरोपियों के फिरोजपुर जिले में भारत-पाकिस्तान सीमा के पास स्थित गांव कालू वाला का निवासी होने की जानकारी सामने आई है। उन पर भारतीय सेना के गुप्त ठिकानों और अन्य संवेदनशील स्थानों की जानकारी सीमा पार बैठे लोगों के साथ साझा करने का आरोप है। दोनों के खिलाफ आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम, 1923 के तहत मामला दर्ज किया गया है।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, दंपती पर भारतीय सेना के प्रतिष्ठानों और रणनीतिक महत्व वाले स्थानों से जुड़ी संवेदनशील जानकारियां पाकिस्तान और मलेशिया में मौजूद आईएसआई के हैंडलरों तक पहुंचाने का आरोप है। उन पर पाकिस्तानी तस्करों को सीमावर्ती क्षेत्र से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी देने का भी संदेह है।
जांच के दौरान पुलिस ने कथित तौर पर दंपती के मोबाइल फोन से राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े अत्यंत संवेदनशील दस्तावेज और जानकारियां बरामद की हैं। मोबाइल फोन की फोरेंसिक जांच की जा रही है, ताकि सीमा पार बैठे हैंडलरों और इस कथित नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों के साथ संभावित संबंधों का पता लगाया जा सके।
जांच से जुड़े सूत्रों के अनुसार, महिला पर लोगों को गुमराह करने के लिए खुद को पुलिस अधिकारी बताने का आरोप है। उस पर इंस्टाग्राम और स्नैपचैट जैसे सोशल मीडिया मंचों के जरिए भारतीय सेना के जवानों से संपर्क करने और हनी ट्रैप के माध्यम से गोपनीय जानकारी हासिल करने का प्रयास करने का भी संदेह है।
गिरफ्तारी के बाद पंजाब पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियां आरोपियों से आगे पूछताछ कर रही हैं। जांच का उद्देश्य कथित जासूसी नेटवर्क के विस्तार का पता लगाना और इसमें शामिल अन्य संदिग्धों की पहचान करना है।
जब्त किए गए मोबाइल फोन की फोरेंसिक जांच जारी है। जांचकर्ता डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर संदिग्ध विदेशी हैंडलरों के साथ संचार का पता लगाने और यह स्थापित करने का प्रयास कर रहे हैं कि संवेदनशील जानकारी साझा करने में भारत में मौजूद अन्य लोग भी शामिल थे या नहीं।
जांच आगे बढ़ने के साथ मामले में और जानकारी सामने आने की उम्मीद है।
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