अमेरिकी उपराष्ट्रपति का आरोप- कंपनियां कम वेतन पर विदेशी पेशेवरों को रखकर अमेरिकी कर्मचारियों की जगह ले रही हैं; कथित उल्लंघनों के बीच कई बड़ी कंपनियों के श्रम प्रमाणन आवेदनों पर रोक लगाने की कार्रवाई
अमेरिकी उपराष्ट्रपति का आरोप- कंपनियां कम वेतन पर विदेशी पेशेवरों को रखकर अमेरिकी कर्मचारियों की जगह ले रही हैं; कथित उल्लंघनों के बीच कई बड़ी कंपनियों के श्रम प्रमाणन आवेदनों पर रोक लगाने की कार्रवाई
खबर खास | वॉशिंगटन
अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने माइक्रोसॉफ्ट समेत कई बड़ी सूचना प्रौद्योगिकी कंपनियों पर एच-1बी वीजा कार्यक्रम के दुरुपयोग का आरोप लगाया है। उन्होंने दावा किया कि ये कंपनियां अमेरिकी कर्मचारियों को नौकरी से निकालकर उनकी जगह कम वेतन पर काम करने के लिए तैयार विदेशी कर्मचारियों को रख रही हैं।
वेंस ने विदेशी आउटसोर्सिंग कंपनियों के माध्यम से अमेरिका लाए जाने वाले कर्मचारियों को “बंधुआ मजदूर” भी बताया। उनका आरोप है कि इस तरीके से कंपनियां अपनी लागत कम करती हैं, जबकि अमेरिकी कर्मचारियों के वेतन पर दबाव बढ़ता है।
वेंस के अनुसार, अमेरिका में एच-1बी वीजा पर काम करने वाले कर्मचारियों का औसत वेतन समान पदों पर काम करने वाले अमेरिकी नागरिकों से 20,000 डॉलर कम है। उन्होंने दावा किया कि विदेशी आउटसोर्सिंग कंपनियों के माध्यम से अमेरिका लाए गए कर्मचारियों के मामलों में यह अंतर 48,000 डॉलर तक पहुंच सकता है।
माइक्रोसॉफ्ट को निशाने पर लेते हुए वेंस ने आरोप लगाया कि कंपनी ने 2025 में करीब 6,000 अमेरिकी कर्मचारियों को नौकरी से निकाला, जबकि इसी दौरान 6,000 से अधिक एच-1बी वीजा के लिए मंजूरी हासिल की। उन्होंने यह भी दावा किया कि माइक्रोसॉफ्ट ने विदेशी कर्मचारियों को स्थायी निवास दिलाने की प्रक्रिया से जुड़े 3,682 श्रम प्रमाणन आवेदन दाखिल किए। इनमें से करीब 1,000 आवेदन कथित तौर पर उन पदों से जुड़े थे, जिन पर पहले अमेरिकी कर्मचारी काम करते थे।
ये आरोप विदेशी कर्मचारियों की नियुक्ति और बड़ी प्रौद्योगिकी कंपनियों द्वारा वीजा कार्यक्रमों के इस्तेमाल पर अमेरिकी प्रशासन की व्यापक कार्रवाई का हिस्सा हैं।
माइक्रोसॉफ्ट के अलावा इस कार्रवाई के संदर्भ में कॉग्निजेंट, इन्फोसिस, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस), विप्रो, एचसीएल टेक्नोलॉजीज, कैपजेमिनी और एडोबी जैसी कंपनियों के नाम भी सामने आए हैं।
कार्रवाई से संबंधित विवरण के अनुसार, अमेरिकी श्रम विभाग प्रभावित कंपनियों से नए श्रम प्रमाणन आवेदन स्वीकार नहीं करेगा, जबकि पहले से लंबित आवेदनों पर भी आगे कार्रवाई नहीं होगी। यह कदम अमेरिकी कर्मचारियों के हितों की कीमत पर वीजा संबंधी प्रक्रियाओं के कथित दुरुपयोग के आरोपों के बाद उठाया गया है।
इससे जुड़े एक अन्य घटनाक्रम में अमेरिकी प्रशासन ने हार्वर्ड, येल और स्टैनफोर्ड समेत नौ विश्वविद्यालयों के खिलाफ जांच की घोषणा की है। जांच में इस आशंका पर ध्यान दिया जाएगा कि विदेशी छात्रों से जुड़े कुछ कार्यक्रमों का इस्तेमाल अमेरिकी कर्मचारियों के वेतन और रोजगार के अवसरों को नुकसान पहुंचाने के लिए किया जा सकता है।
अमेरिकी श्रम विभाग के महानिरीक्षक एंथनी डी'एस्पोसिटो ने कहा कि जांच के तहत विश्वविद्यालयों को समन जारी किए गए हैं।
जांच में यह भी देखा जाएगा कि क्या विदेशी प्रभाव, अनुचित वित्तीय संबंधों या वीजा नियमों के संभावित उल्लंघन का असर सरकारी वित्तपोषण से चलने वाले शोध कार्यक्रमों पर पड़ा है।
कंपनियों और विश्वविद्यालयों के खिलाफ लगाए गए ये आरोप अमेरिकी अधिकारियों की जारी जांच और निगरानी का हिस्सा हैं। इन आरोपों और संभावित उल्लंघनों की जांच अभी जारी है।
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