पंचकूला में ‘जनप्रतिनिधि सम्मेलन’ के दौरान मुख्यमंत्री ने विधानसभा की गरिमा और जनता से संवाद को बताया लोकतंत्र की ताकत; 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य में हरियाणा की भागीदारी बढ़ाने का किया आह्वान
पंचकूला में ‘जनप्रतिनिधि सम्मेलन’ के दौरान मुख्यमंत्री ने विधानसभा की गरिमा और जनता से संवाद को बताया लोकतंत्र की ताकत; 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य में हरियाणा की भागीदारी बढ़ाने का किया आह्वान
खबर खास | पंचकूला
हरियाणा की तरक्की सभी का साझा लक्ष्य
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि राजनीतिक दल और विचारधाराएं अलग होने के बावजूद सभी जनप्रतिनिधियों का मूल उद्देश्य हरियाणा की प्रगति और प्रदेशवासियों की खुशहाली होना चाहिए। उन्होंने कहा कि जनता ने प्रतिनिधियों को अपनी समस्याएं उठाने और विकास की प्रक्रिया में भागीदारी निभाने की जिम्मेदारी सौंपी है। ऐसे में जरूरी है कि जनप्रतिनिधि राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर प्रदेश के हित में मिलकर काम करें।
संविधान पखवाड़े के तहत हुआ सम्मेलन
मुख्यमंत्री पंचकूला में हरियाणा विधानसभा की ओर से संविधान पखवाड़ा कार्यक्रम के तहत आयोजित ‘जनप्रतिनिधि सम्मेलन’ के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि हरियाणा के गठन के 60 वर्ष पूरे होने पर यह सम्मेलन प्रदेश की उपलब्धियों का आकलन करने और आने वाले समय की दिशा तय करने का अवसर है। कार्यक्रम में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला की उपस्थिति का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि संसदीय प्रक्रियाओं और सदन की मर्यादा से जुड़े उनके अनुभव जनप्रतिनिधियों के लिए उपयोगी हैं।
54 सदस्यों से 90 सीटों तक पहुंची विधानसभा
सैनी ने हरियाणा की लोकतांत्रिक यात्रा का जिक्र करते हुए बताया कि 1 नवंबर 1966 को प्रदेश के गठन के समय विधानसभा में 54 सदस्य थे। वर्ष 1967 में सीटों की संख्या बढ़कर 81 और 1977 में 90 हो गई। उन्होंने कहा कि बदलती जरूरतों और व्यापक जनभागीदारी को देखते हुए विधानसभा सीटों की संख्या बढ़ाने की आवश्यकता पर भी विचार होना चाहिए। हरियाणा अब 15वीं विधानसभा के दौर में है, जबकि विधानसभा की पहली बैठक 6 दिसंबर 1966 को हुई थी।
किसानों, मजदूरों और युवाओं की मेहनत से आगे बढ़ा प्रदेश
मुख्यमंत्री ने कहा कि हरियाणा की छह दशक की विकास यात्रा केवल सड़कों, उद्योगों और संस्थानों के विस्तार तक सीमित नहीं है। इसमें किसानों, श्रमिकों, महिलाओं, युवाओं और आम नागरिकों की मेहनत का बड़ा योगदान है। कृषि क्षेत्र की उपलब्धियों से लेकर औद्योगिक विकास, गांवों की सड़कों से आधुनिक एक्सप्रेसवे और पारंपरिक खेलों से अंतरराष्ट्रीय खेल मंचों तक प्रदेश ने अपनी पहचान बनाई है। उन्होंने शुरुआती वर्षों में शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, बिजली, सिंचाई और सड़क जैसी बुनियादी सुविधाएं विकसित करने में सामने आई चुनौतियों को भी याद किया।
संविधान के आदर्श फैसलों और व्यवहार में दिखें
सैनी ने कहा कि संविधान की प्रस्तावना में शामिल न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व के सिद्धांतों को केवल औपचारिक रूप से याद करना पर्याप्त नहीं है। इनका असर सरकारी नीतियों, फैसलों और जनप्रतिनिधियों के व्यवहार में भी दिखाई देना चाहिए। पात्र नागरिकों को बिना भेदभाव अधिकार मिलना, कमजोर वर्गों की समस्याओं को सुनना और समाज में आपसी सम्मान बढ़ाना संवैधानिक मूल्यों को मजबूत करता है।
विधानसभा में सवाल और सुझाव बन सकते हैं बदलाव का आधार
मुख्यमंत्री ने विधानसभा को कानून बनाने, सार्वजनिक धन के उपयोग पर चर्चा करने और सरकार की जवाबदेही सुनिश्चित करने वाला महत्वपूर्ण मंच बताया। उन्होंने कहा कि प्रश्नकाल, ध्यानाकर्षण प्रस्ताव, बजट चर्चा और विधानसभा समितियों की कार्यवाही के जरिए जनता से जुड़े मुद्दों को प्रभावी ढंग से उठाया जा सकता है। सदन में किसी गांव की समस्या पर उठाया गया सवाल उसके समाधान का रास्ता खोल सकता है, जबकि किसी विधेयक पर दिया गया रचनात्मक सुझाव लाखों लोगों के जीवन को प्रभावित कर सकता है।
राजनीतिक मतभेद हों, लेकिन सदन की मर्यादा बनी रहे
सैनी ने कहा कि लोकतंत्र में सरकार से सवाल करना और विपक्ष की ओर से आलोचना करना जरूरी है। सरकार को जनहित के मुद्दों को गंभीरता से सुनना चाहिए, वहीं विपक्ष को आलोचना के साथ व्यावहारिक सुझाव भी देने चाहिए। उन्होंने जनप्रतिनिधियों से बहस के दौरान संयमित भाषा और तर्कपूर्ण संवाद बनाए रखने की अपील की। उनके अनुसार, डिजिटल माध्यमों के दौर में लोगों और खासकर युवाओं की नजर जनप्रतिनिधियों के व्यवहार पर रहती है, इसलिए तथ्यों की पुष्टि और व्यक्तिगत टिप्पणियों से बचना आवश्यक है।
संविधान की समझ गांवों और शिक्षण संस्थानों तक पहुंचे
मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘जनप्रतिनिधि सम्मेलन’ की सार्थकता तभी बढ़ेगी, जब संविधान और लोकतांत्रिक व्यवस्था से जुड़ी चर्चाएं सम्मेलन कक्षों तक सीमित न रहें। उन्होंने विधायकों और पूर्व विधायकों से अपने क्षेत्रों में युवाओं के साथ संवाद आयोजित करने का आग्रह किया। स्कूलों और कॉलेजों में युवा संसद, संविधान की प्रस्तावना का पाठ और स्थानीय मुद्दों पर चर्चा जैसे कार्यक्रमों के जरिए विद्यार्थियों को विधानसभा की कार्यप्रणाली और नागरिक जिम्मेदारियों से परिचित कराया जा सकता है।
2047 के विकसित भारत के लिए अभी से तैयारी का आह्वान
सैनी ने कहा कि विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने में हरियाणा की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। इसके लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, कौशल विकास, रोजगार, आधुनिक कृषि और बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं पर लगातार काम करना होगा। जल संरक्षण, स्वच्छ पर्यावरण और संतुलित शहरी विकास को भी प्राथमिकता देनी होगी। उन्होंने कहा कि नई तकनीकों से मिलने वाले अवसर समाज के हर वर्ग तक पहुंचने चाहिए और विकास का लाभ गांवों तथा शहरों दोनों को मिलना चाहिए।
जनता और सरकार के बीच मजबूत कड़ी बनें प्रतिनिधि
मुख्यमंत्री ने कहा कि जनप्रतिनिधियों को सरकार और समाज के बीच प्रभावी संवाद का माध्यम बनना चाहिए। विकास योजनाओं की तैयारी में महिलाओं, किसानों, मजदूरों, युवाओं, उद्यमियों और वंचित वर्गों की राय शामिल करने से योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन में मदद मिलती है। उन्होंने सभी प्रतिनिधियों से विधानसभा की गरिमा बनाए रखने, जनता से संवाद मजबूत करने और संवैधानिक मूल्यों को अपने आचरण में अपनाने का संकल्प लेने की अपील की।
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