मेरठ-प्रयागराज रूट पर सड़क धंसने से निर्माण की गुणवत्ता पर उठे सवाल, UPEIDA ने जांच के दिए संकेत
मेरठ-प्रयागराज रूट पर सड़क धंसने से निर्माण की गुणवत्ता पर उठे सवाल, UPEIDA ने जांच के दिए संकेत
खबर खास | मेरठ
उत्तर प्रदेश के बहुप्रतीक्षित गंगा एक्सप्रेसवे को लेकर उस समय हड़कंप मच गया, जब उद्घाटन के महज तीन महीने बाद ही मेरठ-प्रयागराज रूट पर सड़क का एक हिस्सा धंस गया। सड़क के बीचोंबीच करीब 10 मीटर गहरा गड्ढा दिखाई देने के बाद मौके पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया। घटना ने एक्सप्रेसवे के निर्माण और सड़क की गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जानकारी के मुताबिक, गंगा एक्सप्रेसवे के जिस हिस्से पर यह घटना सामने आई है, वहां सड़क की सतह अचानक नीचे धंस गई। देखते ही देखते सड़क पर बड़ा गड्ढा बन गया। गहराई अधिक होने के कारण आसपास से गुजरने वाले वाहन चालकों के लिए भी खतरा पैदा हो गया। हालांकि, प्रशासन की ओर से तत्काल सुरक्षा को लेकर जरूरी कदम उठाए जाने की बात कही जा रही है।
घटना सामने आने के बाद उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवेज इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी (UPEIDA) में भी हलचल तेज हो गई। शुरुआती तौर पर सड़क धंसने के कारणों का पता लगाने के लिए तकनीकी जांच की जरूरत बताई जा रही है। अधिकारियों की निगाह अब इस बात पर है कि सड़क के नीचे मिट्टी की स्थिति, जल निकासी, बेस लेयर और निर्माण सामग्री में कहीं कोई तकनीकी कमी तो नहीं रही।
गंगा एक्सप्रेसवे को उत्तर प्रदेश के सबसे बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में शामिल किया गया है। मेरठ से प्रयागराज तक फैला यह एक्सप्रेसवे पश्चिमी उत्तर प्रदेश को पूर्वी हिस्से से जोड़ने में अहम भूमिका निभाने वाला है। ऐसे में इसके निर्माण के कुछ ही समय बाद सड़क धंसने की घटना ने परियोजना की मजबूती पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर एक्सप्रेसवे का हिस्सा महज तीन महीने में धंस सकता है, तो इसके निर्माण में गुणवत्ता नियंत्रण कितना प्रभावी था? अब जांच रिपोर्ट से ही साफ होगा कि यह घटना किसी स्थानीय तकनीकी समस्या का नतीजा है या इसके पीछे निर्माण से जुड़ी कोई बड़ी खामी है।
फिलहाल संबंधित विभाग की जांच पर सबकी नजरें टिकी हैं। रिपोर्ट सामने आने के बाद ही जिम्मेदारी और सड़क की मरम्मत को लेकर तस्वीर साफ हो सकेगी।
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