500 यूनिट तक घरेलू उपभोक्ताओं को राहत, लेकिन व्यापारिक और औद्योगिक उपभोक्ताओं के लिए बिजली महंगी होने की तैयारी
500 यूनिट तक घरेलू उपभोक्ताओं को राहत, लेकिन व्यापारिक और औद्योगिक उपभोक्ताओं के लिए बिजली महंगी होने की तैयारी
ख़बर ख़ास | दिल्ली
दिल्ली के बिजली उपभोक्ताओं को जल्द ही महंगाई का एक और झटका लगने वाला है। दिल्ली विद्युत नियामक आयोग (DERC) ने बिजली वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) को फ्यूल एंड पावर परचेज एडजस्टमेंट कॉस्ट (PPAC) यानी फ्यूल सरचार्ज बढ़ाने की मंजूरी दे दी है। इसके बाद राजधानी के कई इलाकों में बिजली बिलों में बढ़ोतरी देखने को मिलेगी। हालांकि राहत की बात यह है कि जिन घरेलू उपभोक्ताओं की मासिक बिजली खपत 500 यूनिट तक है, उन्हें इस बढ़ोतरी का सीधा असर नहीं झेलना पड़ेगा।
दिल्ली में संचालित तीन प्रमुख बिजली वितरण कंपनियों के क्षेत्रों में PPAC की दरें अलग-अलग लागू होंगी। टाटा पावर के उपभोक्ताओं को बिजली बिल में करीब 1 प्रतिशत अतिरिक्त भुगतान करना होगा, जबकि बीएसईएस के विभिन्न क्षेत्रों में रहने वाले उपभोक्ताओं के बिलों में 2.5 प्रतिशत से 3.5 प्रतिशत तक की वृद्धि हो सकती है। इसके अलावा मार्च माह के 10 प्रतिशत बकाया फ्यूल सरचार्ज की वसूली भी जून के बिल में की जाएगी, जिससे उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा।
इस बढ़ोतरी का सबसे अधिक असर व्यावसायिक और औद्योगिक उपभोक्ताओं पर पड़ने की संभावना है। दुकानदारों, छोटे कारोबारियों और फैक्ट्री संचालकों को बढ़े हुए बिजली बिल का सामना करना पड़ेगा, जिससे उनकी परिचालन लागत में इजाफा होगा। व्यापारिक संगठनों ने भी इस फैसले पर चिंता जताई है और सरकार से हस्तक्षेप की मांग की है।
चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) के चेयरमैन बृजेश गोयल ने मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता को पत्र लिखकर कहा है कि बिजली दरों में वृद्धि का सीधा असर दिल्ली के व्यापारिक प्रतिष्ठानों पर पड़ेगा। उनके अनुसार करोल बाग जैसे प्रमुख बाजारों में दुकानों के बिजली बिल उत्तर प्रदेश और गुरुग्राम के समान कारोबारों की तुलना में चार से पांच हजार रुपये तक अधिक हो सकते हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि बढ़ी हुई बिजली लागत का असर उत्पादन और वस्तुओं की कीमतों पर भी पड़ेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि नई दरें लागू होने के बाद दिल्ली में कमर्शियल और औद्योगिक बिजली की कीमतें पड़ोसी राज्यों हरियाणा और उत्तर प्रदेश की तुलना में 15 से 20 प्रतिशत तक अधिक हो सकती हैं। ऐसे में जून का बिजली बिल राजधानी के लाखों उपभोक्ताओं, विशेषकर व्यापारिक वर्ग के लिए बड़ा झटका साबित हो सकता है।
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