₹4.41 करोड़ का खर्च अमान्य करार, मंजूरी प्रक्रिया पर भी उठे सवाल
₹4.41 करोड़ का खर्च अमान्य करार, मंजूरी प्रक्रिया पर भी उठे सवाल
खबर खास | शिमला
भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) ने हिमाचल प्रदेश में पंचवटी पार्कों के निर्माण के लिए महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के धन के इस्तेमाल पर गंभीर आपत्ति जताई है। सीएजी की वर्ष 2023-24 की ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार, प्रदेश में पंचवटी योजना के तहत 180 पार्कों के विकास पर 15.75 करोड़ रुपये खर्च किए गए, जिसमें से 4.41 करोड़ रुपये के खर्च को अमान्य करार दिया गया है।
ऑडिट के दौरान पाया गया कि पंचवटी पार्क मनरेगा के तहत स्वीकृत कार्यों की सूची में शामिल नहीं थे। इसके बावजूद इन पार्कों के निर्माण और विकास पर मनरेगा के धन का इस्तेमाल किया गया। रिपोर्ट के मुताबिक, इसके लिए केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय से पूर्व अनुमति या किसी तरह की छूट भी नहीं ली गई थी।
सीएजी ने राज्य की प्राथमिकता वाली योजना के लिए केंद्र सरकार की योजना के धन के इस्तेमाल पर भी सवाल उठाया है। पंचवटी योजना का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में वरिष्ठ नागरिकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना है। इसके तहत पार्कों में सैर के लिए रास्ते, बैठने की व्यवस्था, खुले व्यायाम स्थल, हरित क्षेत्र और औषधीय पौधों जैसी सुविधाएं विकसित की जाती हैं।
ऑडिट रिपोर्ट में पंचवटी योजना के जनकल्याणकारी उद्देश्य को स्वीकार किया गया है, लेकिन मनरेगा के धन के इस्तेमाल के तरीके पर आपत्ति जताई गई है। सीएजी ने सवाल उठाया कि जब पंचवटी पार्क मनरेगा के तहत स्वीकृत कार्यों की सूची में शामिल नहीं थे, तो जिला और राज्य स्तर के अधिकारियों ने इन कार्यों के लिए धन जारी करने की मंजूरी किस आधार पर दी।
रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि विकास कार्यों के लिए केंद्र की योजना के धन के इस्तेमाल से पहले निर्धारित नियमों और मंजूरी प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। इससे वित्तीय निगरानी और प्रशासनिक जवाबदेही को लेकर सवाल खड़े हुए हैं।
सीएजी की टिप्पणियों के बाद हिमाचल प्रदेश में सरकारी योजनाओं के लिए धन के इस्तेमाल, अधिकारियों की जवाबदेही और केंद्र सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुपालन को लेकर चर्चा तेज हो गई है। ऑडिट रिपोर्ट ने यह भी सवाल खड़ा किया है कि ऐसी परियोजनाओं को मंजूरी देने और उनके लिए धन जारी करने से पहले संबंधित विभागों ने नियमों की पर्याप्त जांच क्यों नहीं की।
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