मंडी और शिमला सबसे ज्यादा प्रभावित, मानसून में अब तक 261 लोगों की मौत; सड़क हादसों में 154 ने गंवाई जान
मंडी और शिमला सबसे ज्यादा प्रभावित, मानसून में अब तक 261 लोगों की मौत; सड़क हादसों में 154 ने गंवाई जान
हिमाचल प्रदेश में मानसून की बारिश से जनजीवन अब भी बुरी तरह प्रभावित है। लगातार बारिश और भूस्खलन के कारण राज्य के कई हिस्सों में सड़क, बिजली और पेयजल व्यवस्था चरमरा गई है। राज्य आपातकालीन संचालन केंद्र (SEOC) की 3 सितंबर सुबह 10 बजे की रिपोर्ट के मुताबिक प्रदेश में 110 सड़कें बंद हैं। इसके अलावा 198 बिजली वितरण ट्रांसफार्मर यानी DTR बाधित हैं, जबकि 56 पेयजल आपूर्ति योजनाओं पर भी बारिश का असर पड़ा है।
सड़कें बंद होने के मामले में मंडी जिला सबसे ज्यादा प्रभावित है। यहां 51 सड़कें बंद पड़ी हैं। इसके बाद कुल्लू में 22, शिमला और सिरमौर में आठ-आठ, चंबा और कांगड़ा में सात-सात, ऊना में चार, सोलन में दो और लाहौल-स्पीति में एक सड़क बंद है। कई इलाकों में भूस्खलन और मलबा आने के कारण यातायात व्यवस्था प्रभावित हुई है।
बारिश ने प्रदेश की बिजली व्यवस्था को भी नुकसान पहुंचाया है। रिपोर्ट के अनुसार कुल 198 DTR प्रभावित हैं। इनमें सोलन में सबसे अधिक 65 ट्रांसफार्मर ठप हैं। इसके अलावा शिमला में 53, चंबा में 35, कुल्लू में 26, हमीरपुर में 23, सिरमौर में 11 और मंडी में आठ DTR प्रभावित बताए गए हैं। बिजली आपूर्ति बहाल करने के लिए संबंधित विभागों की ओर से काम किया जा रहा है।
पेयजल व्यवस्था पर भी मानसून की मार पड़ी है। प्रदेश में 56 पेयजल आपूर्ति योजनाएं प्रभावित हुई हैं, जिसके चलते कई इलाकों में लोगों को पानी की समस्या का सामना करना पड़ सकता है। लगातार बारिश के कारण ग्रामीण और पहाड़ी क्षेत्रों में बुनियादी सेवाओं को सुचारु बनाए रखना प्रशासन के लिए चुनौती बना हुआ है।
इस बीच मानसून सीजन के दौरान प्रदेश में हुई तबाही का आंकड़ा भी चिंताजनक है। 30 जून से 2 सितंबर तक की संचयी रिपोर्ट के मुताबिक आपदा से संबंधित घटनाओं में हिमाचल प्रदेश में 261 लोगों की मौत हुई है, जबकि 471 लोग घायल हुए हैं। जिलेवार आंकड़ों में शिमला में 35, कांगड़ा में 33, सिरमौर में 33, चंबा में 31, कुल्लू में 25, मंडी में 23 और ऊना में 21 मौतें दर्ज की गई हैं।
मानसून के दौरान सड़क हादसे भी जानलेवा साबित हुए हैं। रिपोर्ट के अनुसार सड़क दुर्घटनाओं में अब तक 154 लोगों की मौत हुई है। चंबा, शिमला और सिरमौर में सड़क हादसों में 19-19 मौतें दर्ज की गई हैं। वहीं कांगड़ा में 17 और कुल्लू में 16 लोगों की जान गई है।
आपदा से हुई मौतों के कारणों की जिलेवार रिपोर्ट में लाहौल-स्पीति का आंकड़ा भी सामने आया है। यहां भूस्खलन समेत अन्य आपदा संबंधी घटनाओं में 13 मौतें दर्ज की गई हैं, जबकि जिले में सभी कारणों को मिलाकर संचयी मौतों का आंकड़ा 20 बताया गया है।
हिमाचल में बारिश का दौर अभी भी कई क्षेत्रों में परेशानी का कारण बना हुआ है। सड़कें बंद होने, बिजली ट्रांसफार्मर प्रभावित होने और पेयजल योजनाओं के ठप पड़ने से लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पर असर पड़ा है। प्रशासन और संबंधित विभाग प्रभावित सेवाओं को बहाल करने में जुटे हैं, लेकिन पहाड़ी क्षेत्रों में लगातार बारिश और भूस्खलन के चलते चुनौतियां बनी हुई हैं।
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