ट्रंप प्रशासन का बड़ा प्रस्ताव, नियम लागू हुआ तो नौकरी छूटते ही कम समय में लेना होगा फैसला; भारतीय पेशेवरों पर पड़ सकता है सबसे ज्यादा असर
ट्रंप प्रशासन का बड़ा प्रस्ताव, नियम लागू हुआ तो नौकरी छूटते ही कम समय में लेना होगा फैसला; भारतीय पेशेवरों पर पड़ सकता है सबसे ज्यादा असर
अमेरिका में काम कर रहे भारतीय पेशेवरों की मुश्किलें आने वाले दिनों में बढ़ सकती हैं। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का प्रशासन H-1B वीजाधारकों को नौकरी जाने के बाद मिलने वाली 60 दिन तक की राहत खत्म करने की तैयारी कर रहा है। हालांकि, यह बदलाव अभी लागू नहीं हुआ है और प्रस्ताव को अंतिम नियम का रूप देने से पहले जरूरी कानूनी प्रक्रिया पूरी करनी होगी। फिलहाल H-1B कर्मचारियों के लिए मौजूदा 60 दिन की व्यवस्था जारी है।
वर्तमान नियमों के तहत नौकरी खत्म होने के बाद पात्र H-1B कर्मचारी सामान्य तौर पर अधिकतम 60 दिन या अपनी अधिकृत प्रवास अवधि समाप्त होने तक अमेरिका में रह सकते हैं। इस दौरान वे नई नौकरी तलाश सकते हैं, नए नियोक्ता के जरिए वीजा संबंधी प्रक्रिया शुरू कर सकते हैं या अपनी इमिग्रेशन स्थिति बदलने की कोशिश कर सकते हैं।
अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग ने अब इस 60 दिन की वैकल्पिक राहत को समाप्त करने का प्रस्ताव तैयार किया है। यह प्रस्ताव अगस्त में राष्ट्रपति कार्यालय के नियामकीय समीक्षा विभाग तक पहुंचा और समीक्षा के बाद आगे बढ़ा है। हालांकि, अभी इसे अंतिम नियम नहीं माना जा सकता। प्रस्ताव के सार्वजनिक होने, उस पर लोगों से राय लेने और इसके बाद अंतिम नियम तैयार करने की प्रक्रिया अभी बाकी है।
अगर प्रस्ताव मौजूदा स्वरूप में अंतिम नियम बन जाता है, तो नौकरी गंवाने वाले विदेशी कर्मचारियों के पास अमेरिका में अपनी स्थिति संभालने के लिए पहले की तुलना में काफी कम समय रह सकता है। ऐसी स्थिति में नए नियोक्ता को जल्दी से वीजा संबंधी जरूरी आवेदन दाखिल करना होगा। वहीं कर्मचारी को अपनी इमिग्रेशन स्थिति बदलने या अमेरिका छोड़ने की तैयारी भी जल्द करनी पड़ सकती है।
इस बदलाव को लेकर भारतीय पेशेवरों में खास चिंता है, क्योंकि H-1B कार्यक्रम के सबसे बड़े लाभार्थियों में भारत शामिल है। वित्त वर्ष 2024 में स्वीकृत H-1B याचिकाओं में भारतीय नागरिकों की हिस्सेदारी करीब 71 प्रतिशत थी। ऐसे में 60 दिन की राहत समाप्त होने का असर बड़ी संख्या में भारतीय आईटी कर्मचारियों और अन्य कुशल पेशेवरों पर पड़ सकता है।
भारतीय H-1B कर्मचारियों की परेशानी केवल नौकरी जाने तक सीमित नहीं है। रोजगार आधारित स्थायी निवास यानी ग्रीन कार्ड की प्रक्रिया में भारतीय आवेदकों को लंबे समय से लंबी प्रतीक्षा का सामना करना पड़ता है। इसके कारण कई भारतीय पेशेवर वर्षों तक H-1B वीजा पर अमेरिका में काम करते रहते हैं और स्थायी निवास की प्रक्रिया पूरी होने का इंतजार करते हैं।
ऐसे में नौकरी जाने के बाद मिलने वाले 60 दिन भारतीय कर्मचारियों के लिए नई नौकरी तलाशने और कानूनी स्थिति बनाए रखने का महत्वपूर्ण समय होता है। यदि यह राहत खत्म होती है तो नौकरी छूटते ही नई नौकरी या वैकल्पिक इमिग्रेशन विकल्प तलाशने का दबाव काफी बढ़ जाएगा।
इस संभावित बदलाव का असर केवल H-1B कर्मचारी तक सीमित नहीं रहेगा। अमेरिका में उनके साथ रहने वाले परिवारों की पढ़ाई, घर, स्वास्थ्य बीमा और अन्य व्यवस्थाएं भी प्रभावित हो सकती हैं। खासकर उन परिवारों के लिए स्थिति चुनौतीपूर्ण हो सकती है जिनका लंबे समय से अमेरिका में रहना और रोजगार H-1B स्थिति पर निर्भर है।
ट्रंप प्रशासन की आव्रजन नीतियों में लगातार हो रहे बदलावों के बीच H-1B वीजाधारकों को लेकर अनिश्चितता भी बढ़ रही है। हालांकि, जब तक प्रस्ताव अंतिम नियम के रूप में लागू नहीं होता, तब तक नौकरी गंवाने वाले पात्र H-1B कर्मचारियों के लिए मौजूदा 60 दिन की राहत व्यवस्था बनी रहेगी।
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