जिला जज की अदालत ने दोनों को हत्या और शव ठिकाने लगाने के मामले में दोषी माना, फैसले के दौरान वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से हुई पेशी
जिला जज की अदालत ने दोनों को हत्या और शव ठिकाने लगाने के मामले में दोषी माना, फैसले के दौरान वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से हुई पेशी
ख़बर खास | मेरठ
मेरठ के चर्चित सौरभ हत्याकांड में जिला एवं सत्र न्यायाधीश अरविंद कुमार मिश्रा की अदालत ने बुधवार को सौरभ की पत्नी मुस्कान रस्तोगी और उसके प्रेमी साहिल शुक्ला को दोषी करार दिया। दोनों पक्षों की अंतिम बहस पूरी होने के बाद अदालत ने अपना फैसला सुनाते हुए दोनों को दोषी माना और सजा के बिंदु पर निर्णय सुरक्षित रख लिया।
फैसले के दौरान अदालत परिसर में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। जिला कारागार में बंद मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को सुरक्षा कारणों के चलते वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अदालत के सामने पेश किया गया। शाम करीब साढ़े चार बजे जज अरविंद मिश्रा के कोर्ट में पहुंचते ही दोनों की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग शुरू कराई गई।
सुनवाई के दौरान जज ने मुस्कान से कहा, “हाथ उठाओ मुस्कान रस्तोगी, आज फैसले का दिन आ गया है, क्या लग रहा है?” इस पर मुस्कान ने जवाब दिया, “हमने जो करना था कर दिया।” इसके बाद जब उससे कुछ और कहने के लिए पूछा गया तो उसने कहा, “मुझे कुछ नहीं बोलना।”
अदालत ने फैसला सुनाते हुए कहा कि इस तरह के अपराध समाज में डर का माहौल पैदा करते हैं। अदालत परिसर में बड़ी संख्या में वकील भी मौजूद रहे।
अभियोजन के अनुसार, इंद्रानगर निवासी सौरभ लंदन में नौकरी करता था और 24 फरवरी 2025 को मेरठ स्थित अपने घर लौटा था। आरोप है कि सौरभ के वापस आने के बाद मुस्कान और साहिल के संबंधों में वह बाधा बन रहा था। अभियोजन के मुताबिक इसी वजह से दोनों ने उसकी हत्या की साजिश रची।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, 3 मार्च 2025 की रात सौरभ के खाने में नशीली दवा मिला दी गई। उसके बेसुध होने के बाद साहिल को घर बुलाया गया। आरोप है कि इसके बाद दोनों ने धारदार हथियार से हमला कर सौरभ की हत्या कर दी। हत्या के बाद शव को ठिकाने लगाने और साक्ष्य मिटाने के लिए उसके टुकड़े किए गए।
पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने शव के टुकड़ों को पॉलीथीन में लपेटकर एक बड़े नीले प्लास्टिक ड्रम में रखा और उसमें सीमेंट, बालू व डस्ट का इस्तेमाल कर शव को छिपाने की कोशिश की। जांच के दौरान घर से सीमेंट से जमा हुआ शव बरामद होने की बात सामने आई थी। इसके बाद दोनों के शिमला-मनाली जाने की जानकारी भी जांच में सामने आई।
बचाव पक्ष ने अदालत में तर्क दिया था कि मामले में कोई प्रत्यक्षदर्शी नहीं है और आरोपियों को संपत्ति विवाद के चलते फंसाया गया है। वहीं अभियोजन ने पुलिस जांच के साथ चिकित्सकीय और फॉरेंसिक साक्ष्यों के आधार पर अपना पक्ष रखा। पोस्टमार्टम करने वाले चिकित्सक डॉ. दिनेश सिंह चौहान का बयान भी अदालत में दर्ज किया गया। अभियोजन के मुताबिक, सौरभ की मौत अत्यधिक रक्तस्राव और शॉक के कारण हुई थी।
सौरभ के भाई की तहरीर पर 18 मार्च 2025 को मुकदमा दर्ज किया गया था। इसके बाद पुलिस ने मुस्कान और साहिल को गिरफ्तार किया। मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से कुल 22 गवाहों के बयान दर्ज कराए गए और दोनों पक्षों की अंतिम बहस पूरी होने के बाद अदालत ने दोषसिद्धि का फैसला सुनाया।
डीजीसी कृष्ण कुमार चौबे के अनुसार, मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्कालीन जिला जज ने प्रतिदिन सुनवाई के आदेश दिए थे। मुकदमे की सुनवाई के दौरान करीब 125 तारीखें लगीं। अब अदालत द्वारा दोनों दोषियों की सजा पर फैसला सुनाया जाना बाकी है।
फैसले से पहले सौरभ के परिजनों ने आरोपियों को कड़ी से कड़ी सजा देने की मांग की थी। सौरभ के बड़े भाई राहुल ने कहा था कि परिवार आरोपियों के लिए फांसी से कम सजा नहीं चाहता। वहीं सौरभ की मां रेनू देवी ने भी दोषियों को सजा मिलने की उम्मीद जताई थी।
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