164 देशों ने ‘इक्वल अर्थ’ प्रोजेक्शन का समर्थन किया, महाद्वीपों के वास्तविक आकार को अधिक सटीक रूप से दिखाने का दावा
164 देशों ने ‘इक्वल अर्थ’ प्रोजेक्शन का समर्थन किया, महाद्वीपों के वास्तविक आकार को अधिक सटीक रूप से दिखाने का दावा
खबर खास | नई दिल्ली
एक ऐतिहासिक फैसले में संयुक्त राष्ट्र महासभा ने दुनिया के मानचित्र के लिए नए प्रोजेक्शन को अपनाने का समर्थन किया है। इसके साथ ही करीब 457 वर्षों से प्रचलित मर्केटर प्रोजेक्शन की जगह अब ‘इक्वल अर्थ’ (Equal Earth) प्रोजेक्शन को बढ़ावा दिया जाएगा।
4 सितंबर को पेश किए गए प्रस्ताव के पक्ष में 164 देशों ने मतदान किया। अमेरिका इस प्रस्ताव के खिलाफ मतदान करने वाला एकमात्र देश रहा, जबकि छह देशों ने मतदान से दूरी बनाई। भारत, फ्रांस, ब्रिटेन समेत संयुक्त राष्ट्र के अधिकांश सदस्य देशों ने नए प्रोजेक्शन का समर्थन किया।
नए मानचित्र का उद्देश्य पृथ्वी के भू-भागों को उनके वास्तविक आकार के अधिक करीब दिखाना है। ‘इक्वल अर्थ’ प्रोजेक्शन में अफ्रीका जैसे महाद्वीप अपने वास्तविक आकार के मुकाबले अधिक सटीक दिखाई देते हैं। वहीं उत्तरी अमेरिका और यूरोप जैसे क्षेत्रों का आकार भी अपेक्षाकृत संतुलित नजर आता है।
यह प्रस्ताव टोगो के विदेश मंत्री रॉबर्ट डुसी ने अफ्रीकी संघ के सदस्यों के समर्थन से पेश किया। प्रस्ताव रखते हुए डुसी ने कहा कि मानचित्र केवल भौगोलिक जानकारी देने का माध्यम नहीं हैं, बल्कि वे शिक्षा, लोगों की सोच और दुनिया को समझने के नजरिए को भी प्रभावित करते हैं।
उन्होंने कहा कि मानचित्र शिक्षा को दिशा देते हैं, कल्पना को आकार देते हैं और सामूहिक सोच को प्रभावित करते हैं। इसलिए मानचित्र कभी पूरी तरह तटस्थ नहीं होते। उनके अनुसार, पृथ्वी के गलत चित्रण से जुड़ी धारणाएं एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक गलत जानकारी पहुंचा सकती हैं।
मर्केटर प्रोजेक्शन को फ्लेमिश कार्टोग्राफर जेरार्डस मर्केटर ने वर्ष 1569 में तैयार किया था। इसे मुख्य रूप से समुद्री यात्राओं और नौवहन के लिए उपयोगी बनाया गया था। समुद्री मार्गों को तय करने में यह बेहद प्रभावी रहा, लेकिन इसमें ध्रुवों के करीब स्थित क्षेत्रों का आकार वास्तविकता से काफी बड़ा और भूमध्य रेखा के पास के क्षेत्रों का आकार छोटा दिखाई देता है।
‘इक्वल अर्थ’ प्रोजेक्शन के समर्थकों का कहना है कि यह इन असमानताओं को कम करता है और दुनिया के महाद्वीपों का अधिक संतुलित चित्र प्रस्तुत करता है। संयुक्त राष्ट्र ने अब अपनी एजेंसियों और प्रकाशनों में मर्केटर प्रोजेक्शन की जगह ‘इक्वल अर्थ’ प्रोजेक्शन के इस्तेमाल की सिफारिश की है।
यह फैसला भौगोलिक सटीकता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। साथ ही इससे आने वाली पीढ़ियों के दुनिया को देखने और समझने के नजरिए में भी बदलाव आने की संभावना है।
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