कांग्रेस अध्यक्ष ने पूछा—दुनिया के बड़े चीनी उत्पादक देशों में शामिल भारत विदेश से चीनी क्यों मंगा रहा है, जबकि खुदरा कीमतें बढ़ रही हैं और स्टॉक नौ साल के निचले स्तर पर पहुंच गया है
कांग्रेस अध्यक्ष ने पूछा—दुनिया के बड़े चीनी उत्पादक देशों में शामिल भारत विदेश से चीनी क्यों मंगा रहा है, जबकि खुदरा कीमतें बढ़ रही हैं और स्टॉक नौ साल के निचले स्तर पर पहुंच गया है
खबर खास | नई दिल्ली
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने शनिवार को त्योहारों के मौसम से पहले चीनी की बढ़ती कीमतों और घटते स्टॉक को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की नीतियों के कारण त्योहारों से पहले चीनी की मिठास आम लोगों के लिए कड़वाहट में बदल गई है।
खरगे ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक पोस्ट में सवाल उठाया कि दुनिया के सबसे बड़े चीनी उत्पादक और निर्यातक देशों में शामिल भारत में चीनी का स्टॉक नौ साल के निचले स्तर पर कैसे पहुंच गया। उन्होंने आपूर्ति की कमी दूर करने के लिए 31 अक्टूबर तक 10 लाख टन कच्ची चीनी के शुल्क-मुक्त आयात की अनुमति देने के केंद्र के फैसले पर भी सवाल उठाए।
खरगे ने सरकार से तीन सवाल करते हुए पूछा कि एक ओर देश आत्मनिर्भर भारत की बात करता है, वहीं दूसरी ओर विदेश से चीनी आयात क्यों की जा रही है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि गन्ने का इस्तेमाल ईंधन मिश्रण के लिए इथेनॉल बनाने में बढ़ाया जा रहा है, जबकि घरेलू बाजार में चीनी की उपलब्धता कम हो रही है। उनके अनुसार, यह नीतिगत विरोधाभास उपभोक्ताओं और चीनी बाजार दोनों को प्रभावित कर रहा है।
कई शहरों में चीनी की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं और यह 70 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई है। पिछले तीन महीनों में चीनी के दाम करीब 40 प्रतिशत यानी लगभग 19 रुपये प्रति किलोग्राम बढ़े हैं। इसी अवधि में गुड़ की कीमत में 24 प्रतिशत, चावल में 16 प्रतिशत और मक्के के आटे में 11 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
उद्योग के आंकड़ों के अनुसार, चीनी मिलों के पास उपलब्ध स्टॉक में भी बड़ी गिरावट आई है। मौजूदा पेराई सत्र से पहले शुरुआती स्टॉक 32 लाख टन था, जबकि एक साल पहले यह 47 लाख टन था। चीनी की कम उपलब्धता को कीमतों में तेजी का प्रमुख कारण माना जा रहा है।
हालांकि, केंद्र सरकार ने चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी के लिए इथेनॉल उत्पादन को मुख्य वजह मानने से इनकार किया है। खाद्य सचिव संजीव चोपड़ा ने कहा कि कीमतों में वृद्धि के पीछे कई कारण हैं, जिनमें घरेलू उत्पादन में कमी, त्योहारों के दौरान बढ़ी मांग, मौसम के कारण गन्ने की फसल को हुआ नुकसान और अंतरराष्ट्रीय बाजार में आपूर्ति का दबाव शामिल हैं।
चोपड़ा के मुताबिक, चीनी का औसत खुदरा मूल्य 20 जुलाई को 48 रुपये प्रति किलोग्राम था, जो बढ़कर 56 रुपये प्रति किलोग्राम हो गया। वहीं, एक्स-मिल कीमत 47-48 रुपये से बढ़कर 62 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई। उन्होंने चीनी मिलों द्वारा अचानक की गई इस मूल्य वृद्धि को अनुचित बताया।
सरकार ने यह भी कहा कि इथेनॉल उत्पादन में चीनी की हिस्सेदारी पिछले कुछ वर्षों में कम हुई है। अधिकारियों के अनुसार, देश में बनने वाले इथेनॉल का करीब एक-चौथाई हिस्सा ही अब चीनी आधारित स्रोतों से आता है, जबकि बाकी का बड़ा हिस्सा मक्का जैसे अनाज से तैयार किया जाता है।
अधिकारियों के अनुसार, इथेनॉल के लिए चीनी की हिस्सेदारी 2022-23 में 12 प्रतिशत से घटकर 2025-26 में करीब 9 प्रतिशत रह गई है। इस सीजन में इथेनॉल उत्पादन के लिए करीब 28 लाख टन चीनी का इस्तेमाल किया गया है।
वहीं, ऑल इंडिया डिस्टिलर्स एसोसिएशन ने कहा कि पिछले साल इथेनॉल उत्पादन में अनाज और गन्ने से मिलने वाले दोनों तरह के कच्चे माल की बड़ी मात्रा का इस्तेमाल हुआ। संगठन ने यह भी चेतावनी दी कि खराब अनाज की उपलब्धता कम होने से पशु और पोल्ट्री फीड की कीमतों में 8-10 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हुई है।
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