उन्होंने कहा वर्तमान सरकार ने इस बिल को जनगणना और परिसीमन की ऐसी शर्तों में उलझा दिया है, जिससे यह अगले एक दशक तक लागू नहीं हो पाएगा।
उन्होंने कहा वर्तमान सरकार ने इस बिल को जनगणना और परिसीमन की ऐसी शर्तों में उलझा दिया है, जिससे यह अगले एक दशक तक लागू नहीं हो पाएगा।
खबर खास, शिमला :
हिमाचल प्रदेश के लोक निर्माण एवं शहरी विकास मंत्री विक्रमदित्य सिंह ने महिला आरक्षण बिल को महिलाओं के हक की बजाए राजनीतिक लाभा के लिए देश के चुनावी भूगोल को बदलने की एक सोची-समझी योजना बताया है। शिमला में शनिवार को एक पत्रकारवार्ता में विक्रमादित्य ने इस बिल को लेकर दृष्टिकोण रखा।
विक्रमादित्य ने कहा कि कांग्रेस पार्टी का इतिहास महिलाओं को शासन में भागीदारी दिलाने का रहा है। उन्होंने कहा कि पूर्व दिवंगत पीएम राजीव गांधी ने पंचायत राज में आरक्षण से लेकर 2010 में राज्यसभा में बिल पास करने तक, कांग्रेस की नीयत हमेशा स्पष्ट रही है। उन्होंने कहा कि लेकिन वर्तमान सरकार ने इस बिल को जनगणना और परिसीमन की ऐसी शर्तों में उलझा दिया है, जिससे यह अगले एक दशक तक लागू नहीं हो पाएगा। उन्होंने इसे सशक्तिकरण नहीं बलकि भारत की बेटियों के साथ एक कड़वा मजाक बताया।
विक्रमादित्य ने कहा कि इस बिल का असली उद्देश्य महिला आरक्षण की आड़ में लोकसभा सीटों का नए सिरे से परिसीमन करना है। उन्होंने कहा कि यह सीधे तौर पर उन राज्यों को राजनीतिक रूप से कमजोरक रने की कोशिशा है जिन्होंने जनसंख्या नियंत्रण और सामाजिक विकास में सफलता पाई है। उन्होंने कहा कि दक्षिण भारत और हिमाचल प्रदेश जैसे राज्यों, जिन्होंने राष्ट्रीय लक्ष्यों को पूरा किया है, उन्हें उनकी कम जनसंख्या के आधार पर सजा दी जा रही है जबकि जनसंख्या विस्फोट करने वाले क्षेत्रों को अधिक राजनीतिक शक्ति दी जा रही है।
विक्रमादित्य ने लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाकर 800 से अधिक करने और निर्वाचन क्षेत्रों की जनसांख्यिकी को बदलने को भारत के संघीय ढांचे पर प्रहार बताया। उन्होंने कहा कि महिलाओं के नाम पर राजनीतिक वर्चस्व का यह खेल खतरनाक है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस महिलाओं के लिए 33 फीसद आरक्षण का पूरा समर्थन करती है लेकिन इसे देश की लोकतांत्रिक विविधता एवं क्षेत्रीय संतुलन को खत्म करने का हथियार नहीं बनने देंगे।
विक्रमादित्य ने सरकार से मांग करते हुए कहा कि सरकार को जनगणना व परिसीमन का इंतजार किए बिना, वर्तमान 543 सीटों पर ही 2029 के चुनावों से महिला आरक्षण लागू करे। उन्होंने कहा कि यदि सरकार की मंशा साफ है, तो वह तत्काल कार्रवाई क्यों नहीं कर रही। उन्होंने कहा कि महिलाओं को हक देने के लिए नक्शे बदलने की नहीं बल्कि राजनीति इच्छाशक्ति की जरूरत है।
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