जालंधर के सुरजीत हॉकी स्टेडियम में जिला प्रशासन की विशेष पहल; पारंपरिक चारपाइयां, कढ़ाई, पुरानी शैली के कुएं और हॉकी गौरव दीवार के जरिए नई पीढ़ी को विरासत से जोड़ने का प्रयास
जालंधर के सुरजीत हॉकी स्टेडियम में जिला प्रशासन की विशेष पहल; पारंपरिक चारपाइयां, कढ़ाई, पुरानी शैली के कुएं और हॉकी गौरव दीवार के जरिए नई पीढ़ी को विरासत से जोड़ने का प्रयास
खबर खास | जालंधर
जालंधर के बर्ल्टन पार्क स्थित सुरजीत हॉकी स्टेडियम में चल रही एशियन हॉकी चैंपियंस ट्रॉफी के दौरान जिला प्रशासन की ओर से तैयार किया गया विशेष सांस्कृतिक परिसर ‘साडा पिंड’ दर्शकों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र बन गया है। यहां आने वाले लोगों को पंजाब की समृद्ध ग्रामीण विरासत और पारंपरिक गांव के जीवन की झलक देखने को मिल रही है। इस पहल को देखने के लिए रोजाना सैकड़ों लोग पहुंच रहे हैं, जिनमें स्कूल और कॉलेज के विद्यार्थी भी शामिल हैं।
एडीसी अमनिंदर कौर बराड़ ने किया ‘साडा पिंड’ का दौरा
अतिरिक्त उपायुक्त अमनिंदर कौर बराड़ ने शुक्रवार को ‘साडा पिंड’ का दौरा किया और वहां पहुंचे लोगों से बातचीत की। उन्होंने कहा कि इस परिसर में पंजाब की पारंपरिक जीवनशैली को वास्तविक रूप में प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया है। ग्रामीण परिवेश और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ी वस्तुएं यहां आने वाले लोगों को खास अनुभव दे रही हैं।

पारंपरिक चारपाइयों से लेकर विरासत के कुएं तक की झलक
‘साडा पिंड’ में पंजाबी गांव के जीवन से जुड़ी कई पारंपरिक चीजों को प्रदर्शित किया गया है। इनमें हाथ से बुनी देसी मंजी, पारंपरिक कढ़ाई, गेहूं भंडारण के पुराने ढांचे, विरासत शैली का पानी का कुआं और रंग-बिरंगी दीवारों पर बनी कलाकृतियां शामिल हैं। इसके अलावा परिसर में हॉकी गौरव को समर्पित एक विशेष दीवार भी बनाई गई है, जो पंजाब की हॉकी परंपरा और खेल उपलब्धियों को दर्शाती है।
नई पीढ़ी को पंजाब की सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने की पहल
अमनिंदर कौर बराड़ ने कहा कि ‘साडा पिंड’ तैयार करने का मुख्य उद्देश्य नई पीढ़ी, खासकर शहरों में रहने वाले युवाओं और विद्यार्थियों को पंजाब की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराना है। उन्होंने बताया कि रोजाना सैकड़ों लोग इस परिसर को देखने पहुंच रहे हैं। विद्यार्थियों की भागीदारी से यह पहल सांस्कृतिक जागरूकता बढ़ाने का माध्यम भी बन रही है।

हॉकी और पंजाबी विरासत का अनूठा संगम
एडीसी ने कहा कि हॉकी का पंजाब की संस्कृति और परंपराओं से गहरा जुड़ाव रहा है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजन के साथ पारंपरिक पंजाबी गांव की झलक प्रस्तुत करने से चैंपियंस ट्रॉफी को एक अलग सांस्कृतिक पहचान मिली है। इससे दर्शकों को केवल रोमांचक हॉकी मुकाबले देखने का ही नहीं, बल्कि पंजाब की ग्रामीण जीवनशैली और विरासत को करीब से समझने का अवसर भी मिल रहा है।
‘साडा पिंड’ के माध्यम से जिला प्रशासन ने खेल और संस्कृति को एक मंच पर लाने का प्रयास किया है। एशियन हॉकी चैंपियंस ट्रॉफी के दौरान यह परिसर दर्शकों के लिए खेल के साथ पंजाब की परंपराओं को जानने और अनुभव करने का खास आकर्षण बन गया है।
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