उद्योग मंत्री ने औद्योगिक एवं व्यापार विकास नीति-2026 और एफटीए एवं निर्यात सुविधा प्रकोष्ठ की जानकारी दी; कृषि-व्यवसाय, खाद्य प्रसंस्करण, इंजीनियरिंग और ऑटो कंपोनेंट्स जैसे क्षेत्रों में निवेश की संभावनाओं पर चर्चा
उद्योग मंत्री ने औद्योगिक एवं व्यापार विकास नीति-2026 और एफटीए एवं निर्यात सुविधा प्रकोष्ठ की जानकारी दी; कृषि-व्यवसाय, खाद्य प्रसंस्करण, इंजीनियरिंग और ऑटो कंपोनेंट्स जैसे क्षेत्रों में निवेश की संभावनाओं पर चर्चा
खबर खास | चंडीगढ़
पंजाब को ब्रिटिश कंपनियों के लिए एक प्रमुख विनिर्माण और निर्यात केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में राज्य सरकार ने प्रयास तेज कर दिए हैं। भारत-ब्रिटेन व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौते (सीईटीए) के तहत प्रस्तावित शून्य शुल्क पर बाजार पहुंच के अवसरों का लाभ उठाने के लिए पंजाब के उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री अमन अरोड़ा ने इन्वेस्ट पंजाब में ब्रिटेन के उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल के साथ रणनीतिक बैठक की। इस दौरान उन्होंने राज्य की औद्योगिक क्षमता, निवेश अनुकूल नीतियों और द्विपक्षीय व्यापार एवं निवेश को बढ़ावा देने के लिए उठाए जा रहे कदमों की जानकारी दी।
ब्रिटिश प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व चंडीगढ़ में ब्रिटेन की उप उच्चायुक्त अल्बा स्मेरिग्लियो ने किया। प्रतिनिधिमंडल में प्रथम सचिव (व्यापार-भारत) डॉ. निकोलस ग्रिबिट और ब्रिटिश उच्चायोग के वरिष्ठ व्यापार सलाहकार अनूप नारायण भी शामिल थे। बैठक में ब्रिटिश कंपनियों के लिए पंजाब में विनिर्माण इकाइयां स्थापित करने, व्यावसायिक साझेदारी विकसित करने और राज्य के औद्योगिक तंत्र से जुड़ने की संभावनाओं पर चर्चा हुई।
बैठक की अध्यक्षता करते हुए अमन अरोड़ा ने पंजाब में हो रहे औद्योगिक विकास और अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति शृंखलाओं से जुड़ने की राज्य की तैयारियों को सामने रखा। चर्चा में कृषि-व्यवसाय, खाद्य प्रसंस्करण, इंजीनियरिंग, ऑटो कंपोनेंट्स और उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप कौशल विकास जैसे तेजी से बढ़ते क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया गया। इन क्षेत्रों में पंजाब की मौजूदा क्षमताओं और ब्रिटेन की विशेषज्ञता के बीच तालमेल से व्यावसायिक सहयोग की नई संभावनाएं तलाशने पर जोर दिया गया।
अमन अरोड़ा ने कहा कि पंजाब की रणनीतिक भौगोलिक स्थिति इसे उत्तर भारत के बड़े बाजार तक पहुंच बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र बनाती है। उन्होंने कहा कि पंजाब केवल देश का अन्न भंडार नहीं है, बल्कि तेजी से आधुनिक उद्योग, नवाचार और विनिर्माण के केंद्र के रूप में भी उभर रहा है। उनके अनुसार, ब्रिटिश प्रतिनिधिमंडल के साथ बातचीत का मुख्य उद्देश्य सीईटीए के तहत उपलब्ध अवसरों को समझना और कृषि आधारित व्यवसायों तथा इंजीनियरिंग में पंजाब की ताकत को ब्रिटिश कंपनियों की विशेषज्ञता के साथ जोड़ना था।
बैठक में राज्य की औद्योगिक एवं व्यापार विकास नीति-2026 प्रमुख चर्चा का विषय रही। मंत्री ने बताया कि इस नीति का उद्देश्य निवेशकों के लिए सरल, पारदर्शी और सुविधाजनक कारोबारी माहौल तैयार करना है। उन्होंने एफटीए एवं निर्यात सुविधा प्रकोष्ठ के बारे में भी जानकारी दी, जिसे अंतरराष्ट्रीय कंपनियों को व्यापार समझौतों का लाभ उठाने, नियामकीय प्रक्रियाएं पूरी करने और पंजाब से निर्यात बढ़ाने में सहायता देने के लिए स्थापित किया गया है।
अरोड़ा ने कहा कि नई नीति और विशेष सुविधा प्रकोष्ठ के माध्यम से ब्रिटिश कंपनियों को पंजाब में उद्योग स्थापित करने और यहां से दुनिया के बाजारों के लिए उत्पादन करने का ‘प्लग-एंड-प्ले’ ढांचा उपलब्ध कराया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार राज्य को ब्रिटिश कंपनियों के लिए पसंदीदा निवेश गंतव्य बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। उनके मुताबिक, मजबूत औद्योगिक साझेदारी से निवेश बढ़ेगा, आर्थिक गतिविधियों को गति मिलेगी और युवाओं के लिए उच्च गुणवत्ता वाले रोजगार के अवसर पैदा होंगे।
ब्रिटिश प्रतिनिधिमंडल ने पंजाब के कुशल श्रमबल और उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप कौशल प्रशिक्षण को विकसित करने के प्रयासों में भी रुचि दिखाई। विशेष रूप से विनिर्माण और खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्रों में प्रशिक्षित कर्मचारियों की उपलब्धता तथा उद्योग आधारित कौशल विकास की संभावनाओं पर चर्चा हुई।
उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के प्रशासनिक सचिव डॉ. बसंत गर्ग ने कहा कि पंजाब बड़े बाजार तक पहुंच, बेहतर लॉजिस्टिक्स संपर्क और कुशल श्रमबल जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराता है। उन्होंने बताया कि एफटीए एवं निर्यात सुविधा प्रकोष्ठ ब्रिटिश कंपनियों को नियामकीय अनुपालन, बाजार से जुड़ाव और सीईटीए के तहत निर्यात को बढ़ावा देने सहित हर स्तर पर सहायता प्रदान करेगा।
उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों के बीच बातचीत आगे भी जारी रहेगी और पंजाब के उद्योगों तथा ब्रिटिश कंपनियों के बीच व्यवस्थित कारोबारी बैठकें आयोजित कराई जाएंगी। इसका उद्देश्य शुरुआती चर्चाओं को ठोस निवेश और व्यावसायिक साझेदारी में बदलना है।
बैठक में उद्योग निदेशक जसप्रीत सिंह, पंजाब वित्तीय निगम की प्रबंध निदेशक सेनु दुग्गल और अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे। यह बैठक अंतरराष्ट्रीय निवेश आकर्षित करने तथा विनिर्माण, निर्यात और वैश्विक व्यापार साझेदारी के क्षेत्र में पंजाब की भूमिका मजबूत करने के राज्य सरकार के प्रयासों की एक कड़ी है।
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