जब कुदरत ने मचाया कहर और जमीनी रास्ते हुए पस्त, तब 10,000 फीट की ऊंचाई पर प्रिया के हौसले ने बुझते चिरागों में फूंकी जिंदगी की नई सांस!
जब कुदरत ने मचाया कहर और जमीनी रास्ते हुए पस्त, तब 10,000 फीट की ऊंचाई पर प्रिया के हौसले ने बुझते चिरागों में फूंकी जिंदगी की नई सांस!
ख़बर ख़ास | नेपाल
नेपाल के इतिहास में जब-जब खौफनाक प्राकृतिक आपदाओं और भयावह तबाही का जिक्र होगा, तब-तब एक नाम उम्मीद की सबसे बुलंद मिसाल बनकर उभरेगा—प्रिया अधिकारी। नेपाल की पहली महिला व्यावसायिक हेलीकॉप्टर पायलट प्रिया अधिकारी ने अपनी जान की परवाह किए बिना उस वक्त आसमान की ओर उड़ान भरी, जब चारों तरफ केवल तबाही का मंजर और चीख-पुकार थी। भयानक भूकंप और विनाशकारी भूस्खलन के दौरान, जहां बड़े-बड़े अनुभवी पायलट भी उड़ान भरने से कतरा रहे थे, वहां प्रिया ने अपने अदम्य साहस, फौलादी इरादों और बेजोड़ निर्णय क्षमता का परिचय देते हुए सैकड़ों असहाय लोगों को मौत के मुंह से सुरक्षित बाहर निकाला।
हिमालय की दुर्गम पहाड़ियों, पतली घाटियों और अचानक बदलने वाले बेहद खतरनाक मौसम के बीच हेलीकॉप्टर उड़ाना कोई आसान खेल नहीं है। लेकिन जब तबाही ने नेपाल के जमीनी रास्तों को पूरी तरह से तबाह कर दिया और संपर्क टूट गया, तब प्रिया का हेलीकॉप्टर राहत और बचाव का एकमात्र जरिया बना। ऑक्सीजन की कमी, बर्फीली हवाएं और शून्य दृश्यता जैसी जानलेवा परिस्थितियों में भी उन्होंने पहाड़ों की तंग चोटियों पर चमत्कारिक लैंडिंग की। उन्होंने न केवल फंसे हुए पर्यटकों और गंभीर रूप से घायल स्थानीय लोगों को एयरलिफ्ट किया, बल्कि आपदा प्रभावित इलाकों में भोजन, पानी और जीवनरक्षक दवाएं पहुंचाकर हजारों परिवारों का सहारा बनीं।
उनकी इस साहसिक यात्रा की सबसे अविश्वसनीय बात यह रही कि कई मौकों पर उन्हें ऐसे दूरस्थ और संकरे इलाकों में उतरना पड़ा, जहां उतरने के लिए कोई आधिकारिक पैड मौजूद नहीं था। जरा सी चूक का मतलब सीधा मौत था, लेकिन प्रिया के स्थिर हाथों और मजबूत हौसले ने हर बार मौत को मात दी। बच्चे हों, बुजुर्ग हों या फिर गंभीर रूप से घायल मरीज, प्रिया के हेलीकॉप्टर की गड़गड़ाहट उनके लिए किसी देवदूत की आहट जैसी साबित हुई।
प्रिया की यह गौरवगाथा केवल एक सफल रेस्क्यू ऑपरेशन की कहानी नहीं है, बल्कि यह रूढ़िवादी सोच और लैंगिक सीमाओं को तोड़ने वाला एक नया अध्याय है। एक ऐसे क्षेत्र में जहां पुरुषों का वर्चस्व माना जाता था, वहां अपनी अमिट छाप छोड़कर प्रिया ने साबित कर दिया कि जब इरादे चट्टान जैसे मजबूत हों, तो आसमान की कोई सीमा नहीं होती। आज प्रिया अधिकारी की यह जांबाजी पूरे दक्षिण एशिया में लाखों महिलाओं और युवाओं के लिए प्रेरणा का एक जगमगाता प्रतीक बन चुकी है।
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