बनासकांठा में किसान सम्मेलन को संबोधित करते हुए डेयरी क्षेत्र के विकास, पशुओं के टीकाकरण और आधुनिक तकनीक पर दिया जोर; किसानों के लिए कुर्सियों की जगह पारंपरिक चारपाइयों की व्यवस्था की सराहना
बनासकांठा में किसान सम्मेलन को संबोधित करते हुए डेयरी क्षेत्र के विकास, पशुओं के टीकाकरण और आधुनिक तकनीक पर दिया जोर; किसानों के लिए कुर्सियों की जगह पारंपरिक चारपाइयों की व्यवस्था की सराहना
खबर खास | अहमदाबाद
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को गुजरात के बनासकांठा से प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (पीएम-किसान) योजना की 24वीं किस्त जारी की। इस दौरान उन्होंने ₹14,000 करोड़ से अधिक की विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया। साथ ही दो नई ट्रेनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।
कार्यक्रम में किसानों के बैठने के लिए कुर्सियों के बजाय पारंपरिक चारपाइयों की व्यवस्था की गई थी। इस अनोखी व्यवस्था ने प्रधानमंत्री का ध्यान आकर्षित किया।
चारपाइयों पर बैठकर किसान सम्मेलन में शामिल हुए लोग
सभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि देशभर के लोगों के लिए यह दृश्य आश्चर्यजनक हो सकता है कि किसी सार्वजनिक कार्यक्रम में सभी लोग चारपाइयों पर बैठे हों। उन्होंने बनासकांठा के लोगों की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने देश की पारंपरिक ग्रामीण संस्कृति को जीवित रखा है। उन्होंने यह भी कहा कि इस अनूठी व्यवस्था का नाम गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में भी दर्ज हो सकता था।
गोबर से बायोगैस, बायो-सीएनजी और जैविक खाद बनाने पर जोर
डेयरी और पशुपालन क्षेत्र का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार किसानों की आय बढ़ाने के लिए पशुओं के गोबर का भी बेहतर इस्तेमाल करना चाहती है। इसके लिए गोबर और कृषि अपशिष्ट से बायोगैस, बायो-सीएनजी और जैविक खाद तैयार करने के बुनियादी ढांचे का विस्तार किया जा रहा है। इस दिशा में उन्होंने क्षेत्र में दो बायो-सीएनजी संयंत्रों की आधारशिला भी रखी।
पशुओं को अब तक दी गईं करीब 150 करोड़ वैक्सीन खुराक
प्रधानमंत्री ने कहा कि पशुओं को बीमारियों से बचाना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। मुफ्त टीकाकरण कार्यक्रम के तहत अब तक पशुओं को करीब 150 करोड़ वैक्सीन खुराक दी जा चुकी हैं। इससे आठ करोड़ से अधिक किसानों के पशुधन को लाभ मिला है।
उन्होंने कहा कि इस पहल से किसानों का खर्च कम करने में मदद मिली है और दूध उत्पादन में भी बढ़ोतरी हुई है। प्रधानमंत्री के अनुसार, वर्ष 2013-14 में एक गाय या भैंस से औसतन पांच लीटर से कम दूध प्राप्त होता था, जो अब बढ़कर करीब आठ लीटर हो गया है। उन्होंने कहा कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा दूध उत्पादक देश है और यहां दूध उत्पादन में सबसे तेज वृद्धि भी दर्ज की जा रही है।
राष्ट्रीय गोकुल मिशन से देशी नस्लों के संरक्षण को बढ़ावा
राष्ट्रीय गोकुल मिशन का उल्लेख करते हुए मोदी ने कहा कि इस योजना का उद्देश्य देशी पशु नस्लों का संरक्षण और संवर्धन करना है। बनासकांठा में स्थापित नया अनुसंधान केंद्र इस मिशन को मजबूती देगा। यहां मुर्रा और जाफराबादी जैसी नस्लों के संरक्षण पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। प्रधानमंत्री ने इसे देश में अपनी तरह की पहली सुविधा बताया।
आईवीएफ तकनीक से बेहतर नस्ल के पशुओं को मिलेगा बढ़ावा
प्रधानमंत्री ने पशुओं की नस्ल सुधारने में आधुनिक प्रजनन तकनीकों, विशेषकर इन-विट्रो फर्टिलाइजेशन (आईवीएफ) के महत्व पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि अधिक दूध देने वाली और बीमारियों से लड़ने की बेहतर क्षमता रखने वाली गायों के गुणों को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने में ऐसी तकनीकें किसानों के लिए उपयोगी साबित हो सकती हैं।
जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए बीजों की नई किस्में
मोदी ने कहा कि जलवायु परिवर्तन किसानों के सामने बड़ी चुनौती बनकर उभरा है। बदलते मौसम के प्रभावों से निपटने में किसानों की मदद के लिए पिछले कुछ वर्षों में करीब 3,000 नई बीज किस्में उपलब्ध कराई गई हैं।
कृषि और पशुपालन में विज्ञान एवं तकनीक की भूमिका पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि बेहतर नस्ल के पशुओं से दूध उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है। समय पर टीकाकरण और इलाज से पशुओं में होने वाली बीमारियों के कारण किसानों को होने वाले नुकसान को भी कम किया जा सकता है।
प्रधानमंत्री ने कहा, "यदि पशुधन की गुणवत्ता में सुधार होता है तो दूध उत्पादन बढ़ेगा। समय पर टीकाकरण और उपचार से बीमारियों के कारण होने वाले नुकसान को कम किया जा सकता है। स्वस्थ पशु अंततः किसानों और पशुपालकों की आय बढ़ाने में मदद करेंगे।"
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