विमानन क्षेत्र में गहराया थकान और सेहत का संकट; 'फेडरेशन ऑफ इंडियन पायलट' ने डीजीसीए से मांगी स्वतंत्र वैज्ञानिक जांच और रोस्टरिंग सिस्टम की समीक्षा।
विमानन क्षेत्र में गहराया थकान और सेहत का संकट; 'फेडरेशन ऑफ इंडियन पायलट' ने डीजीसीए से मांगी स्वतंत्र वैज्ञानिक जांच और रोस्टरिंग सिस्टम की समीक्षा।
खबर खास | नई दिल्ली
भारतीय विमानन क्षेत्र में पायलटों की बिगड़ती सेहत और अत्यधिक थकान को लेकर एक बार फिर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। पिछले तीन वर्षों के भीतर ड्यूटी के दौरान या ड्यूटी से जुड़ी गतिविधियों के समय छह भारतीय एयरलाइन पायलटों की असामयिक मौत ने सुरक्षा व्यवस्था पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस खतरनाक प्रवृत्ति से चिंतित 'फेडरेशन ऑफ इंडियन पायलट' (FIP) ने देश के विमानन नियामक 'नागरिक उड्डयन महानिदेशालय' (DGCA) का दरवाजा खटखटाया है। संघ ने मांग की है कि फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन (FDTL) नियमों से एयरलाइंस को दी गई सभी प्रकार की छूट को तुरंत प्रभाव से रद्द किया जाए और एक सख्त 'फटीग रिस्क मैनेजमेंट सिस्टम' (FRMS) लागू किया जाए।
डीजीसीए को लिखे गए एक नए और कड़े पत्र में एफआईपी (FIP) के अध्यक्ष कैप्टन सीएस रंधावा ने हाल ही में हुए इन दुखद हादसों और पायलटों के स्वास्थ्य रुझानों की एक स्वतंत्र वैज्ञानिक जांच कराने की पुरजोर वकालत की है। उन्होंने एयरलाइंस द्वारा बनाए जाने वाले रोस्टर, रिकवरी टाइम, नाइट शिफ्ट्स (सर्केडियन डिसरप्शन) और पायलटों पर बढ़ रहे काम के दबाव की गहन जांच की मांग की है। हालांकि, कैप्टन रंधावा ने यह स्पष्ट किया कि किसी भी आधिकारिक जांच में मौतों और थकान के बीच सीधा संबंध स्थापित नहीं हुआ है, लेकिन मौतों का यह आंकड़ा इतना गंभीर जरूर है कि पूरे नियामक ढांचे की व्यापक समीक्षा की जानी चाहिए।
पायलटों का यह संगठन लंबे समय से उन छूटों का विरोध कर रहा है जो एयरलाइंस को निर्धारित ड्यूटी घंटों के बावजूद उड़ानें संचालित करने की अनुमति देती हैं। संघ का मानना है कि केवल तय समय-सीमा तय कर देना काफी नहीं है, बल्कि एक व्यापक थकान प्रबंधन प्रणाली की तत्काल आवश्यकता है। 'फेडरेशन ऑफ इंडियन पायलट' के इस कड़े रुख ने विमानन उद्योग में खलबली मचा दी है, जिससे अब डीजीसीए पर पायलटों के स्वास्थ्य की सुरक्षा और उड़ानों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कड़े कदम उठाने का चौतरफा दबाव बन गया है।
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