हरियाणा किसान कल्याण प्राधिकरण" की चौथी बैठक की अध्यक्षता की
हरियाणा किसान कल्याण प्राधिकरण" की चौथी बैठक की अध्यक्षता की
खबर खास, चंडीगढ़ :
हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि अधिकारी ऑर्गेनिक फसलों की उपज के प्रमाणीकरण हेतु लैब स्थापित करने की दिशा में कदम उठाएं ताकि प्रमाणीकरण के बाद किसानों को उपज की अच्छी कीमत मिल सके।
मुख्यमंत्री आज "हरियाणा किसान कल्याण प्राधिकरण" की चौथी बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। इस अवसर पर पर्यावरण एवं वन मंत्री राव नरबीर सिंह , सहकारिता मंत्री अरविंद शर्मा , कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्याम सिंह राणा , सिंचाई एवं जल संसाधन मंत्री श्रुति चौधरी, खाद्य, नागरिक एवं उपभोक्ता मामले राज्य मंत्री राजेश नागर, मुख्यमंत्री के ओएसडी वीरेंद्र बढ़खालसा भी उपस्थित थे।
बैठक के बाद, मुख्यमंत्री द्वारा मत्स्य पालन विभाग की पुस्तिका " Report of Working group on Fisheries Development in Haryana " का विमोचन भी किया गया।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे किसानों को जैविक एवं प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए प्रोत्साहित करें, इसके लिए सबसे पहले पायलट योजना के तहत करीब 5 हजार एकड़ में "स्मार्ट एग्रीकल्चर जोन" तैयार करें। इस जोन के किसानों को प्राकृतिक खेती करने के लिए जागरूक करें कि उनको खेती में घाटा नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि वैसे तो इस उपज की किसानों को बेहतरीन कीमत मिलेगी , फिर भी आमदनी में नुकसान हुआ तो राज्य सरकार इसकी भरपाई करेगी।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्राकृतिक खेती की उपज के प्रमाणीकरण के लिए जल्द से जल्द एक लैब स्थापित करें ताकि प्रमाणित फसल के अच्छे दाम मिल सकें। उन्होंने अधिकारियों को उक्त स्मार्ट एग्रीकल्चर जोन में जल प्रबंधन करके सूक्ष्म सिंचाई की प्रणाली को अपनाने की बात कही। उन्होंने अधिकारियों को फसलों के उत्तम किस्म के बीज तैयार करने के भी निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को किसानों के बीच ज्ञान और नीतिगत पहलुओं के प्रसार के लिए ब्लॉक स्तर तक किसान गोष्ठियों , कार्यशालाओं , सेमिनारों , प्रशिक्षण कार्यक्रमों और जागरूकता अभियानों का कैलेंडर बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इन अभियानों के दौरान किसानों को रासायनिक दवाओं एवं खाद के प्रयोग से होने वाले नुकसान तथा प्राकृतिक खेती के फायदों के लिए भी जागरूक करें।
सैनी ने "हरियाणा किसान कल्याण प्राधिकरण" द्वारा पायलट सहकारी खेती के कलस्टर , जल निकासी तकनीक के उपयोग ,पीएम कुसुम योजना के तहत फीडरों के सोलराइजेशन , फसल विविधीकरण , सांझी डेयरी परियोजना, झींगा मछली पालन, बकरी एवं भेड़ पालन को बढ़ावा देने , खरीफ फसल तिलहन और दालों को बढ़ावा देने जैसे मामलों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि राज्य में महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए अधिक से अधिक योजनाएं महिला -केंद्रित बनाएं।
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