पीड़िता के परिवार और ससुराल पक्ष के बीच पंचायत के माध्यम से कथित समझौते की खबरों के बाद दोनों पक्षों ने चुप्पी साध ली है, जबकि गांव के लोगों ने बैठक में उन्हें शामिल न किए जाने पर नाराजगी जताई है।
पीड़िता के परिवार और ससुराल पक्ष के बीच पंचायत के माध्यम से कथित समझौते की खबरों के बाद दोनों पक्षों ने चुप्पी साध ली है, जबकि गांव के लोगों ने बैठक में उन्हें शामिल न किए जाने पर नाराजगी जताई है।
खबर खास | ग्रेटर नोएडा
निक्की भाटी हत्याकांड में पंचायत के जरिए कथित समझौते की खबरों के बाद पीड़िता के मायके और ससुराल पक्ष दोनों की ओर से चुप्पी देखी जा रही है। ग्रामीणों के अनुसार, यह पंचायत बैठक रूपवास गांव के लोगों को शामिल किए बिना आयोजित की गई, जिससे स्थानीय लोगों में नाराजगी फैल गई है।
निक्की भाटी की मौत के बाद पहले लोगों में भारी आक्रोश देखने को मिला था और न्याय की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन भी हुए थे। हालांकि अब खबरें सामने आ रही हैं कि दोनों परिवार पंचायत के माध्यम से समझौते पर सहमत हो गए हैं और पीड़िता का परिवार मामला वापस लेने की तैयारी में है।
सूत्रों के अनुसार, समझौते के तहत ससुराल पक्ष ने निक्की की बहन कंचन के लिए रूपवास गांव में एक प्लॉट खरीदा है। यह भी चर्चा है कि कंचन अब अपने पति के साथ रूपवास गांव में ही रह सकती हैं और अपने ससुराल वापस नहीं जाएंगी। इसके अलावा निक्की के बच्चों के नाम संपत्ति ट्रांसफर करने पर भी सहमति बनने की बात कही जा रही है।
यह मामला 21 अगस्त 2025 का है, जब 26 वर्षीय निक्की भाटी की सिरसा गांव में संदिग्ध परिस्थितियों में जलने से मौत हो गई थी। परिवार ने आरोप लगाया था कि दहेज प्रताड़ना और घरेलू विवाद के चलते ससुराल पक्ष ने उसे आग के हवाले किया।
घटना के बाद पुलिस ने 23 अगस्त 2025 को मुख्य आरोपी और निक्की के पति विपिन भाटी को मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार किया था। बाद में सास दयावती, ससुर सत्यवीर और देवर रोहित भाटी को भी गिरफ्तार किया गया, हालांकि उन्हें इलाहाबाद हाईकोर्ट से जमानत मिल चुकी है। वहीं विपिन भाटी अब भी जेल में बंद है और उसकी जमानत याचिका पर सुनवाई जारी है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, दोनों पक्षों के बीच लगभग एक महीने से बातचीत चल रही थी और करीब 20 दिन पहले पंचायत में अंतिम सहमति बनी। निक्की के पिता भिखारी सिंह समेत परिवार के अन्य सदस्य भी इस मामले पर चुप्पी साधे हुए हैं।
कथित समझौते की शर्तों में परिवार को आर्थिक सहायता, बच्चों के नाम संपत्ति ट्रांसफर करने और किराए से मिलने वाली आय का लाभ जारी रखने जैसी बातें भी शामिल बताई जा रही हैं। यह भी कहा जा रहा है कि कंचन अपने बच्चों के साथ रूपवास गांव में ही रह सकती हैं और सिरसा गांव वापस नहीं जाएंगी।
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