पहले गैर-टाटा परिवार के कार्यकारी ने किया नेतृत्व; कार्यकाल बढ़ाने पर बोर्ड में सर्वसम्मति नहीं बनने के बाद लिया फैसला
पहले गैर-टाटा परिवार के कार्यकारी ने किया नेतृत्व; कार्यकाल बढ़ाने पर बोर्ड में सर्वसम्मति नहीं बनने के बाद लिया फैसला
खबर खास | मुंबई
टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन ने कंपनी की 18 अगस्त को होने वाली वार्षिक आम बैठक से कुछ दिन पहले अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। हालांकि, वह 20 फरवरी 2027 तक चेयरमैन पद पर बने रहेंगे, जब उनका मौजूदा कार्यकाल आधिकारिक रूप से समाप्त होगा।
चंद्रशेखरन ने 2017 में टाटा संस की कमान संभाली थी। वह टाटा परिवार से बाहर के पहले पेशेवर प्रबंधक थे, जिन्हें टाटा समूह का नेतृत्व करने की जिम्मेदारी मिली। उनके कार्यकाल के दौरान समूह का राजस्व दोगुने से अधिक हुआ और टाटा समूह ने कई नए कारोबारों में तेजी से विस्तार किया।
चंद्रशेखरन ने अपने विस्तृत बयान में बताया कि सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट और सर रतन टाटा ट्रस्ट ने सर्वसम्मति से उनके कार्यकाल को पांच साल के लिए बढ़ाने की सिफारिश की थी।
इसके बाद नामांकन एवं पारिश्रमिक समिति ने भी इस प्रस्ताव का समर्थन किया और टाटा संस के बोर्ड ने इसे आगे बढ़ाने की सिफारिश की। यह मामला 24 फरवरी 2026 को बोर्ड के सामने रखा गया था।
हालांकि, एक बोर्ड सदस्य के समर्थन में नहीं होने के कारण प्रस्ताव आगे नहीं बढ़ सका। चंद्रशेखरन ने कहा कि सर्वसम्मत समर्थन नहीं मिलने के कारण उन्होंने इस फैसले को आगे बढ़ाने पर जोर नहीं दिया।
उन्होंने कहा कि फरवरी में हुई बोर्ड बैठक को छह महीने बीत चुके हैं, लेकिन अब तक इस मामले पर कोई निर्णय नहीं लिया गया है।
सूत्रों के अनुसार, टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा कथित तौर पर चंद्रशेखरन को पूरे पांच साल का कार्यकाल देने के पक्ष में नहीं थे। टाटा ट्रस्ट्स के पास टाटा संस में करीब 66 प्रतिशत हिस्सेदारी है।
बताया जा रहा है कि फरवरी में बोर्ड ने पांच साल के एक और कार्यकाल का समर्थन किया था, लेकिन नोएल टाटा ने हाल में शुरू किए गए नए कारोबारों के प्रदर्शन को लेकर चिंता जताई थी। वह कथित तौर पर केवल दो साल के कार्यकारी विस्तार के पक्ष में थे।
चंद्रशेखरन के इस्तीफे की खबर सामने आने के बाद टाटा समूह की कई सूचीबद्ध कंपनियों के शेयरों पर दबाव देखा गया। टीसीएस, टाटा मोटर्स, टाटा स्टील और टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स के शेयरों में कारोबार के दौरान करीब 3 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई।
चंद्रशेखरन के कार्यकाल में टाटा समूह ने इलेक्ट्रिक वाहन, सेमीकंडक्टर, डिजिटल कारोबार, विमानन और कंज्यूमर टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों में बड़े निवेश किए। इन पहलों ने समूह के भविष्य के विस्तार की नींव मजबूत की, लेकिन इनमें बड़े स्तर पर पूंजी निवेश भी हुआ।
इसी वजह से टाटा ट्रस्ट्स के नेतृत्व के कुछ वर्गों के साथ रणनीति और नए कारोबारों के प्रदर्शन को लेकर मतभेद की खबरें सामने आती रही हैं।
अब फरवरी 2027 के बाद टाटा संस की कमान किसे सौंपी जाएगी, इसे लेकर अटकलें तेज हो गई हैं। चंद्रशेखरन के इस्तीफे ने भारत के सबसे बड़े कारोबारी समूह टाटा समूह के भविष्य के नेतृत्व और रणनीतिक दिशा को लेकर भी नई चर्चा छेड़ दी है।
Like
Dislike
Love
Angry
Sad
Funny
Wow
पंजाब : सभी पुलिस थानों व सरकारी स्थानों पर मौजूद लावारिस वाहन 30 दिन के भीतर हटाने के आदेश
January 18, 2026
Comments 0