परिवारिक कार्यक्रमों में शामिल होने की दलील भी नहीं आई काम, सर्वोच्च अदालत ने याचिका खारिज की
परिवारिक कार्यक्रमों में शामिल होने की दलील भी नहीं आई काम, सर्वोच्च अदालत ने याचिका खारिज की
लखीमपुर खीरी हिंसा मामले के मुख्य आरोपी आशीष मिश्रा को सुप्रीम कोर्ट से फिलहाल कोई राहत नहीं मिली है। सर्वोच्च अदालत ने उनकी जमानत की शर्तों में और ढील देने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहन की पीठ ने साफ कहा कि इस समय जमानत की शर्तों में बदलाव का कोई आधार नहीं बनता। सुनवाई के दौरान आशीष मिश्रा की ओर से पेश वकील ने अदालत को बताया कि मौजूदा जमानत शर्तों के कारण वह अपने परिवार के महत्वपूर्ण कार्यक्रमों में भी शामिल नहीं हो पा रहे हैं। उन्होंने दलील दी कि अपनी बेटियों के जन्मदिन जैसे पारिवारिक आयोजनों से भी उन्हें दूर रहना पड़ता है, इसलिए जमानत की शर्तों में अतिरिक्त राहत दी जाए। हालांकि, मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया और स्पष्ट शब्दों में कहा कि फिलहाल इस प्रार्थना पर विचार करने का कोई औचित्य नहीं है। इसके साथ ही अदालत ने आशीष मिश्रा की याचिका को खारिज कर दिया और जमानत की मौजूदा शर्तों को यथावत रखा। गौरतलब है कि यह मामला 3 अक्टूबर 2021 का है, जब उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले के टिकुनिया गांव में किसानों के प्रदर्शन के दौरान हिंसा भड़क गई थी। उस समय किसान तत्कालीन उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के दौरे का विरोध कर रहे थे। इस घटना ने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींचा था। अभियोजन पक्ष के अनुसार, हिंसा के दौरान एक एसयूवी ने चार किसानों को कुचल दिया था। इसके बाद हुई हिंसा में वाहन चालक, भारतीय जनता पार्टी के दो कार्यकर्ताओं और एक पत्रकार की भी मौत हो गई थी। इस घटना में कुल आठ लोगों की जान गई थी। आशीष मिश्रा इस मामले के प्रमुख आरोपियों में शामिल हैं और उनके खिलाफ अदालत में मुकदमा चल रहा है। उन्हें पहले जमानत मिल चुकी है, लेकिन अब जमानत की शर्तों में अतिरिक्त राहत पाने की उनकी कोशिश सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दी है। मामले की सुनवाई और कानूनी प्रक्रिया आगे भी जारी रहेगी।
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January 18, 2026
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