एंटाली हॉकी एकेडमी बना बच्चों का सहारा; खेल के जरिए अनुशासन, आत्मविश्वास और बेहतर भविष्य की ओर बढ़ रहे नन्हे खिलाड़ी
एंटाली हॉकी एकेडमी बना बच्चों का सहारा; खेल के जरिए अनुशासन, आत्मविश्वास और बेहतर भविष्य की ओर बढ़ रहे नन्हे खिलाड़ी
ख़बर ख़ास | कोलकाता
कोलकाता की उमस भरी सुबह में जहां सियालदह स्टेशन के आसपास हर तरफ भागती भीड़ और चुनावी पोस्टरों का शोर दिखाई देता है, वहीं डॉ. सुरेश सरकार रोड की एक तंग गली में अलग ही दुनिया बसती है। यहां सुबह सात बजे से हॉकी स्टिक की आवाज गूंजने लगती है। छोटे-छोटे बच्चे मैदान में दौड़ते नजर आते हैं और उनके बीच गूंजती है कोच की सख्त लेकिन उम्मीद से भरी आवाज। यही है एंटाली हॉकी एकेडमी, जो आज इलाके के गरीब बच्चों के लिए उम्मीद की नई पहचान बन चुकी है।
बाहर से देखने पर यह मैदान छोटा जरूर लगता है, लेकिन इसी छोटे से मैदान ने कई बच्चों को बड़े सपने देखने का हौसला दिया है। यहां आने वाले ज्यादातर बच्चे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से हैं। किसी के पिता रिक्शा चलाते हैं तो किसी की मां सड़क किनारे खाना बेचकर परिवार चलाती हैं। तंग गलियों और मुश्किल हालात के बीच यह एकेडमी बच्चों को गलत रास्तों से दूर रखकर खेल के जरिए नई दिशा देने का काम कर रही है।
एकेडमी के संयुक्त सचिव और कोच सुभीर कुमार पान कहते हैं कि उनके लिए हॉकी सिर्फ खेल नहीं, बल्कि जिंदगी है। इसी खेल ने उन्हें पहचान और सम्मान दिया, इसलिए अब वे इसे नई पीढ़ी तक पहुंचाना चाहते हैं। सुभीर और उनके भाई प्रबीर दोनों राज्य स्तर के खिलाड़ी रह चुके हैं। उनके गुरु असीम गांगुली ने वर्षों पहले इस एकेडमी की शुरुआत इस सोच के साथ की थी कि इलाके के बच्चे अपराध और नशे से दूर रहकर खेल में भविष्य बना सकें।
पैसों की कमी यहां हमेशा बनी रहती है। कई बार बच्चों को जरूरी उपकरण उपलब्ध कराना भी मुश्किल हो जाता है, लेकिन इसके बावजूद बच्चों के उत्साह में कोई कमी नहीं दिखती। चौथी कक्षा में पढ़ने वाली एंजेला की मां पुतुल मंडल बताती हैं कि उनकी बेटी पहले यहां ड्रॉइंग प्रतियोगिता में आई थी, लेकिन बाद में उसने हॉकी सीखने की जिद पकड़ ली। वहीं जुड़वां बहनें तापुर और तुपुर पिछले पांच साल से यहां अभ्यास कर रही हैं।
एंटाली की यह छोटी सी एकेडमी अब सिर्फ खेल का मैदान नहीं रही, बल्कि उन बच्चों के सपनों का घर बन चुकी है, जो संघर्ष के बीच भी अपनी जिंदगी बदलने का हौसला रखते हैं।
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