राज्यपाल ने मानसिक स्वास्थ्य में कृत्रिम बुद्धिमत्ता की आवश्यकता पर दिया बल कहा, चिकित्सा क्षेत्र में नई आशा और संभावनाओं का द्वार खोल रही कृत्रिम बुद्धिमत्ता
राज्यपाल ने मानसिक स्वास्थ्य में कृत्रिम बुद्धिमत्ता की आवश्यकता पर दिया बल कहा, चिकित्सा क्षेत्र में नई आशा और संभावनाओं का द्वार खोल रही कृत्रिम बुद्धिमत्ता
खबर खास, शिमला/नोएडा:
हिमाचल के राज्यपाल कविंद्र गुप्ता ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता के माध्यम से मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सुलभ, प्रभावी और व्यक्तिगत बनाया जा सकता है, जिसके माध्यम से समय रहते उचित सहायता और उपचार उपलब्ध कराना संभव है। उन्होंने कहा कि चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के उपयोग से रोगों की पहचान और उपचार की प्रक्रिया अधिक तेज और सटीक हुई है।
राज्यपाल आज उत्तरप्रदेश के ग्रेटर नोएडा स्थित गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय में 51वें राष्ट्रीय चिकित्सा मनोविज्ञान सम्मेलन (एन.ए.सी.आई.ए.सी.पी. 2026) के उद्घाटन अवसर पर बोल रहे थे। राज्यपाल यहां बतौर मुख्य अतिथि उपस्थित थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो राणा पी. सिंह ने की। सम्मेलन का विषय था, ‘‘मानसिक स्वास्थ्य में कृत्रिम बुद्धिमत्ता की भूमिका’’।
इस अवसर पर, राज्यपाल ने कहा कि आज तनाव, अवसाद, चिंता और अन्य मनोवैज्ञानिक समस्याएँ तेजी से बढ़ रही हैं, जिससे समाज के प्रत्येक वर्ग पर प्रभाव पड़ रहा है। ऐसे समय में, कृत्रिम बुद्धिमत्ता एक नई आशा और संभावनाओं का द्वार खोल रही है। आज अनेक डिजिटल प्लेटफॉर्म और एप्लिकेशन ऐसे विकसित हो चुके हैं, जो व्यक्ति की भावनाओं, व्यवहार और भाषा का विश्लेषण करके प्रारंभिक स्तर पर मानसिक समस्याओं की पहचान करने में सक्षम हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में यह और अधिक प्रभावी सिद्ध हो सकती है।
कविंद्र गुप्ता ने कहा कि भारत सरकार ने इस दिशा में अनेक महत्वपूर्ण पहल की हैं। उन्होंने कहा कि मानस टेली-मानसिक स्वास्थ्य सेवा जैसी पहल देश के दूरदराज क्षेत्रों तक मानसिक स्वास्थ्य सेवाएँ पहुँचाने में सहायक सिद्ध हो रही हैं। इसके साथ ही, राष्ट्रीय स्तर पर मानसिक स्वास्थ्य संस्थानों और सेवाओं को सुदृढ़ करने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य केवल चिकित्सा का विषय नहीं, बल्कि सामाजिक संवेदनशीलता और सामूहिक सहयोग का विषय है।
उन्होंने इस बात पर बल दिया कि मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को स्वास्थ्य योजनाओं के साथ और अधिक प्रभावी ढंग से जोड़ा जाना चाहिए ताकि प्रत्येक व्यक्ति को समय पर सहायता मिल सके। साथ ही, मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े सामाजिक कलंक को समाप्त करने के लिए व्यापक जागरूकता अभियान चलाने की आवश्यक है। इस दिशा में कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित तकनीकें जागरूकता फैलाने और सहायता प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। राज्यपाल ने कहा, ‘‘कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित वर्चुअल थेरेपिस्ट और डिजिटल प्लेटफॉर्म आज 24×7 सहायता प्रदान कर रहे हैं। विशेषकर, उन क्षेत्रों में, जहाँ मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों की कमी है, ए.आई एक प्रभावी माध्यम बन सकता है।’’
राज्यपाल ने कहा कि न्यूरोफीडबैक, ब्रेन इमेजिंग और डेटा विश्लेषण जैसे क्षेत्रों में भी कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग मानसिक विकारों को बेहतर ढंग से समझने और उपचार की नई संभावनाएँ विकसित करने में सहायक हो रहा है। उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता केवल एक सहायक उपकरण है, यह मानव संवेदनशीलता, सहानुभूति और मानवीय स्पर्श का पूर्ण विकल्प नहीं हो सकती। इसलिए, मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में मानवीय संवाद, समझ और करुणा का अपना विशेष महत्व है। उन्होंने डेटा गोपनीयता, नैतिकता और सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर भी विशेष ध्यान देने पर बल दिया।
गुप्ता ने कहा कि यदि कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग सही दिशा में और मानवीय मूल्यों के साथ किया जाए तो यह मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सशक्त, सुलभ और प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
इस अवसर पर, प्रो राणा पी. सिंह, कुलपति, गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय ने आयोजन को उच्च अकादमिक मानकों से अभिसिंचित करते हुए इसकी प्रासंगिकता को रेखांकित किया।
इससे पूर्व, सम्मेलन संयोजक एवं विभागाध्यक्ष, मनोविज्ञान एवं मानसिक स्वास्थ्य विभाग, डॉ. आनंद पी. सिंह ने राज्यपाल का स्वागत किया। प्रोफेसर माधव गोविंद, प्रोफेसर गौरी शंकर कालोइया, प्रोफेसर आशा श्रीवास्तव, डॉ. निशी मिश्रा एवं डॉ. आलोक मिश्रा ने भी इस अवसर पर अपने विचार व्यक्त किए।
इस अवसर पर इंडियन एसोसिएशन ऑफ क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट्स (आई.ए.सी.पी.) के पूर्व अध्यक्ष एवं संस्थापक सदस्य डॉ. मनोरंजन सहाय ने सम्मेलन के ऐतिहासिक महत्व पर चर्चा की। इस अवसर पर, राज्यपाल ने प्रतिभागियों को सम्मानित भी किया।
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