कैश कांड में नाम आने के बाद जस्टिस वर्मा के खिलाफ लोकसभा में महाभियोग प्रस्ताव लाया गया था।
कैश कांड में नाम आने के बाद जस्टिस वर्मा के खिलाफ लोकसभा में महाभियोग प्रस्ताव लाया गया था।
खबर खास, नई दिल्ली :
इलाहाबाद के जस्टिस यशवंत वर्मा ने राष्ट्रपति को अपना इस्तीफा भेज दिया है। वह तब सुर्खियों में आए जब पिछले साल 14 मार्च को उनके दिल्ली स्थित घर में लगी आग में 500-500 के नोटों के बंडल जले हुए मिले थे। इस विवाद के बाद उनका तबादला दिल्ली हाईकोर्ट से इलाहाबाद कर दिया गया था। हालांकि उन्होंने बीते वर्ष 5 अप्रैल को इलाहाबाद हाईकोर्ट में शपथ ली थी लेकिन उन्हें कोई जिम्मेदारी नहीं दी गई थी। उन्हें उनके खिलाफ चल रही जांच के पूरा होने तक न्यायिक कामों से दूर रखा गया था।
हालांकि उन्होंने राष्ट्रपति को इस्तीफा कब भेजा, इसके बारे में कुछ पता नहीं चल पाया है लेकिन यह जानकारी मीडिया में शुक्रवार को आई। गौर रहे कि कैश कांड में नाम आने के बाद जस्टिस वर्मा के खिलाफ लोकसभा में महाभियोग प्रस्ताव लाया गया था। उन्होंने अपने खिलाफ लाए गए महाभियोग प्रस्ताव को चुनौती देते हुए याचिका में कहा था कि दोनों सदनों में महाभियोग प्रस्ताव लाया गया था, लेकिन राज्यसभा ने उसे मंजूर नहीं किया। इसके बावजूद लोकसभा ने अकेले जांच समिति बना दी, जो उनके अनुसार गलत है।
इसी साल 6 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि जांच समिति के गठन में कुछ खामियां दिखाई देती हैं। इसलिए अदालत यह देखेगी कि क्या यह खामी इतनी गंभीर है कि पूरी कार्यवाही को रद्द किया जाए। जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की बेंच ने दो दिन की सुनवाई के बाद आठ जनवरी को जस्टिस वर्मा की याचिका पर फैसला सुरक्षित रखा। हालांकि बेंच ने जस्टिस वर्मा को पार्लियामेंट्री कमेटी के सामने जवाब दाखिल करने के लिए समय बढ़ाने से मना कर दिया।
इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने 16 दिसंबर 2025 को लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को नोटिस जारी किया। जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस एजे मसीह की बेंच ने लोकसभा स्पीकर कार्यालय और दोनों सदनों के महासचिवों से जवाब मांगा था।
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