उन्होंने कहा कि इसके अतिरिक्त प्रदेश में हिमाचल प्रदेश एनर्जी कंजर्वेशन बिल्डिंग कोड (एचपीइसीबीसी) एंड रूल्स 2018 अनिवार्य किए गए हैं।
उन्होंने कहा कि इसके अतिरिक्त प्रदेश में हिमाचल प्रदेश एनर्जी कंजर्वेशन बिल्डिंग कोड (एचपीइसीबीसी) एंड रूल्स 2018 अनिवार्य किए गए हैं।
खबर खास, शिमला :
नगर एवं ग्राम नियोजन मंत्री राजेश धर्माणी ने आज यहां कहा कि हरित ऊर्जा राज्य के लक्ष्य को हासिल करने के लिए सरकार प्रतिबद्धता से प्रभावी कदम उठा रही है। इस दिशा में हिमाचल प्रदेश टाउन एंड कंट्री प्लानिंग (सत्रहवां संशोधन) रूल्स, 2026 के अनुसार सभी कमर्शियल, पब्लिक और सेमी-पब्लिक बिल्डिंग और रियल एस्टेट परियोजनाओं में इलेक्ट्रिक व्हीकल चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए मॉडल बिल्डिंग बाय-लॉज़ के संशोधनों के अनुसार इलेक्ट्रिक व्हीकल चार्जिंग पॉइंटस बनाए जाएगें। सरकार के इस कदम से राज्य में इलैक्ट्रिक वाहनों के लिए आधारभूत अधोसंरचना का निर्माण सुनिश्चित होगा।
उन्होंने कहा कि इसके अतिरिक्त प्रदेश में हिमाचल प्रदेश एनर्जी कंजर्वेशन बिल्डिंग कोड (एचपीइसीबीसी) एंड रूल्स 2018 अनिवार्य किए गए हैं। इन नियमों के तहत 750 वर्ग मीटर अथवा इससे अधिक क्षेत्र में निर्मित हॉस्पिटैलिटी, स्वास्थ्य सेवा, सभागार, व्यवसायिक, शैक्षणिक, शॉपिंग कॉपलेक्स और मिक्सड यूज भवन जो इसीबीसी प्रावधानों के अनुरूप हैं के बेस एफएआर 1.75 को अतिरिक्त 0.25 फ्लोर एरिया रेशो (एफएआर) की अनुमति प्रदान की जाएगी।
एचपीईसीबीसी नियमों के अनुरूप भवन निर्माण प्रक्रिया के लिए आवेदक, मालिक, डेवलपर को ब्यूरो ऑफ एनर्जी एफिशेंसी द्वारा अधिकृत एनर्जी ऑडिटर शामिल करना अनिवार्य होगा। आवेदक द्वारा पैनल्ड एनर्जी ऑडिटर को परियोजना डिजाइन अथवा ड्राइंग जमा करवानी होगी। इसके उपरान्त आवेदक भवन निर्माण की अनुमति हेतू सक्षम प्राधिकारी को आवेदन करेगा। जिनमें नगर निगम, नगर परिषद, टाउन एंड कंट्री प्लानिंग तथा अन्य प्राधिकारी शामिल होगें। सक्षम प्राधिकारी जांच के उपरान्त निर्माण कार्य की अनुमति देगा। आवेदक सक्षम प्राधिकारी को निर्माण कार्य शुरू करने संबंधी जानकारी उपलब्ध करवाएगा। निर्माण के दौरान एनर्जी ऑडिटर निर्माणाधीन परियोजना का निरीक्षण करेगा। निर्माण कार्य पूरा होने पर आवेदक कनस्ट्रकशन कम्पलिशन सर्टिफिकेट सक्षम प्राधिकारी को जमा करवाएगा। इसके उपरान्त सक्षम प्राधिकारी वेरीफिकेशन के उपरान्त आवेदक को ऑक्युपेन्सी सर्टिफिकेट जारी करेगा।
नगर नियोजन मंत्री ने कहा कि हिमाचल प्रदेश टाउन एंड कंट्री प्लानिंग (18वां संशोधन) रूल्स, 2026 के अनुसार रियल एस्टेट परियोजनाओं में प्रीमियम फ्लोर एरिया रेशो (एफएआर) के लिए शुल्क का निर्धारण किया गया है। इसके तहत 0.25 तक के प्रीमियम एफएआर के लिए 3,000 प्रति वर्ग मीटर बिल्ट एरिया, 0.25 से अधिक से 0.50 प्रीमियम एफएआर के लिए 5000 प्रति वर्ग मीटर बिल्ट एरिया, 0.50 से अधिक से 0.75 प्रीमियम एफएआर के लिए 7000 प्रति वर्ग मीटर बिल्ट एरिया शुल्क निर्धारित किया गया है। ये दरें पहले से बने और पूरे हो चुके रियल एस्टेट परियोजनाओं पर लागू नहीं होगी जिनके लिए कंप्लीशन सर्टिफिकेट पहले ही जारी किया जा चुके है। निर्माणाधीन और आंशिक रूप से पूरी रियल एस्टेट परियोजनाओं में यह दरें नई निर्माणाधीन ब्लॉक्स प्रोजेक्ट के लिए लागू होगी।
उन्होंने कहा कि नए एवं प्रस्तावित रियल एस्टेट परियोजनाओं के लिए डेवलपर्स के पास शुरुआती निर्माणाधीन परियोजनाओं के प्लान के साथ-साथ अतिरिक्त एफएआर खरीदने का विकल्प रहेगा।
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