अमेरिकी संघीय जांच में दावा—सोशल मीडिया के जरिए युवाओं की भर्ती, अंतरराष्ट्रीय ड्रग तस्करी और भारत, अमेरिका व कनाडा तक फैला आपराधिक नेटवर्क
अमेरिकी संघीय जांच में दावा—सोशल मीडिया के जरिए युवाओं की भर्ती, अंतरराष्ट्रीय ड्रग तस्करी और भारत, अमेरिका व कनाडा तक फैला आपराधिक नेटवर्क
खबर खास | नई दिल्ली
अमेरिकी न्याय विभाग (U.S. Department of Justice) और एफबीआई (FBI) की संयुक्त जांच में गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई और जग्गू भगवानपुरिया के कथित संगठित अपराध नेटवर्क से जुड़े कई अहम खुलासे सामने आए हैं। जांच दस्तावेजों के अनुसार, दोनों गिरोहों ने कथित तौर पर नाबालिगों, आर्थिक रूप से कमजोर युवाओं और महिलाओं को आपराधिक गतिविधियों के लिए भर्ती किया।
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि गुजरात की साबरमती सेंट्रल जेल से कथित रूप से संचालित लॉरेंस बिश्नोई के नेटवर्क ने पंजाब के आर्थिक रूप से कमजोर इलाकों के नाबालिगों को निशाना बनाया। जांचकर्ताओं के अनुसार, गिरोह ने किशोर न्याय कानून के प्रावधानों का फायदा उठाने के लिए ऐसे किशोरों की भर्ती की, जिन्हें गिरफ्तारी की स्थिति में अपेक्षाकृत कम सजा मिलने की संभावना होती है।
रिपोर्ट के मुताबिक, अपराधों को अंजाम देने के बदले भर्ती किए गए युवाओं को बहुत कम रकम दी जाती थी, जबकि वफादार सदस्यों को कथित रूप से फर्जी स्टूडेंट या वर्क वीजा उपलब्ध कराकर अमेरिका और कनाडा भेजा जाता था।
एफबीआई के "ऑपरेशन हार्ड बॉल" (Operation Hard Ball) के तहत लॉस एंजिलिस की एक संघीय अदालत में दायर 44 पन्नों के अभियोग (Federal Indictment) में आरोप लगाया गया है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का व्यापक इस्तेमाल युवाओं को पैसे, पहचान और सुरक्षा का लालच देकर गिरोह में शामिल करने के लिए किया गया।
अभियोग में यह भी दावा किया गया है कि जग्गू भगवानपुरिया गिरोह के सदस्यों को भारत के विभिन्न हिस्सों में हत्या की सुपारी पूरी करने के लिए मात्र 20,000 रुपये तक का भुगतान किया जाता था।
जांच एजेंसियों के अनुसार, लॉरेंस बिश्नोई ने अपने अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क की जिम्मेदारी अपने भरोसेमंद सहयोगियों को सौंप रखी थी।
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि गोल्डी बराड़ उत्तर अमेरिका में नेटवर्क की गतिविधियों का संचालन करता था, जबकि रोहित गोदारा यूरोप में कथित तौर पर नेटवर्क की कमान संभालता था। अमेरिकी अभियोग के अनुसार, यह नेटवर्क अमेरिका में कोकीन, मेथामफेटामाइन और हेरोइन की तस्करी, प्रतिद्वंद्वी गिरोहों की ड्रग खेप लूटने तथा अवैध कमाई को भारत भेजने जैसी गतिविधियों में शामिल था।
जग्गू भगवानपुरिया नेटवर्क की जांच में पुलिस अधिकारी का भी नाम
जग्गू भगवानपुरिया, जो वर्तमान में जेल में बंद है, उससे जुड़े अलग-अलग जांच रिकॉर्ड में एक पुलिस अधिकारी का नाम भी सामने आने का दावा किया गया है। (आगे का पाठ उपलब्ध नहीं है, इसलिए अनुवाद यहीं तक किया गया है।)
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