यूके में पियरे जेनरेट के डिजाइनों को मिली ऊंची बोली, संरक्षण और जवाबदेही पर नई बहस
यूके में पियरे जेनरेट के डिजाइनों को मिली ऊंची बोली, संरक्षण और जवाबदेही पर नई बहस
खबर खास | चंडीगढ़
चंडीगढ़ की विश्व-प्रसिद्ध वास्तुकला विरासत एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय नीलामी बाजार में सामने आई है, जिससे इसके संरक्षण और अवैध निर्यात को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा हो गई हैं। यूनाइटेड किंगडम में स्वोर्ड्स ऑक्शन हाउस द्वारा आयोजित हालिया नीलामी में पियरे जीनरेट द्वारा डिजाइन किए गए चार दुर्लभ फर्नीचर आइटम कुल £20,800 (लगभग ₹21.8 लाख) में बिके। इससे वैश्विक बाजार में चंडीगढ़ की आधुनिक डिजाइन विरासत की बढ़ती मांग स्पष्ट होती है।
विवाद को और बढ़ाने वाली बात यह है कि इन फर्नीचर पर चंडीगढ़ के सरकारी विभागों के आधिकारिक पहचान चिन्ह मौजूद थे। इसके बावजूद इनकी बिक्री को रोकने के लिए कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई, जिससे निगरानी तंत्र और जवाबदेही पर सवाल खड़े हो गए हैं।
वरिष्ठ अधिवक्ता अजय जग्गा ने इस मुद्दे को गंभीरता से उठाते हुए केंद्र सरकार से तुरंत हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने विदेश मंत्री एस. जयशंकर और संस्कृति मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ** को पत्र लिखकर एक मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) लागू करने का सुझाव दिया है, ताकि विदेशों में स्थित भारतीय दूतावास ऐसी नीलामियों पर नजर रख सकें और अवैध बिक्री को समय रहते रोक सकें।
जग्गा ने यह भी बताया कि पहले नीलामी घर इन वस्तुओं की उत्पत्ति छिपाते थे, लेकिन अब वे “NIS/WHB/48” और “P.B.S.-005” जैसे कोड को प्रमुखता से दिखा रहे हैं, जिससे इनकी प्रामाणिकता साबित होती है और ऊंची बोली लगती है। उनके अनुसार, यह प्रवृत्ति भारत की विरासत संपत्तियों के दुरुपयोग को बढ़ावा दे रही है।
नीलामी में बिके प्रमुख सामानों में एक डे-बेड ₹4.41 लाख में, पिजनहोल डेस्क ₹7.87 लाख में, 1955 का फाइल रैक ₹5.77 लाख में और चार कुर्सियों का सेट ₹3.78 लाख में शामिल है। वर्ष 2025–26 के दौरान इस तरह की 11 से अधिक नीलामियों के सामने आने के बाद चंडीगढ़ की आधुनिक विरासत को सुरक्षित रखने की जरूरत पर बहस फिर तेज हो गई है।
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