₹2,000 से अधिक के चुनिंदा कारोबारी UPI भुगतान पर 0.4% MDR लागू, राहुल गांधी ने फैसला वापस लेने की मांग की
₹2,000 से अधिक के चुनिंदा कारोबारी UPI भुगतान पर 0.4% MDR लागू, राहुल गांधी ने फैसला वापस लेने की मांग की
यूपीआई भुगतान पर नए शुल्क को लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि सरकार का यह फैसला अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सामने भारत के रुख से जुड़ा है। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी से यूपीआई पर लगाए गए शुल्क को वापस लेने की मांग की है।
दरअसल, नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने 15 सितंबर को घोषणा की कि 15 अक्टूबर 2026 से ₹2,000 से अधिक के चुनिंदा व्यक्ति से व्यापारी यानी Person-to-Merchant (P2M) UPI भुगतानों पर 0.4 प्रतिशत मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू होगा। इस शुल्क की अधिकतम सीमा प्रति लेनदेन ₹300 तय की गई है। वहीं, व्यक्ति से व्यक्ति यानी Person-to-Person (P2P) UPI लेनदेन पर कोई शुल्क नहीं लगाया गया है। ₹2,000 तक के P2M भुगतान भी MDR के दायरे से बाहर रहेंगे।
सरकार की ओर से स्पष्ट किया गया है कि यह MDR ग्राहकों से वसूला जाने वाला शुल्क नहीं है, बल्कि मर्चेंट पेमेंट इकोसिस्टम में लागू होगा। वित्त मंत्रालय ने बैंकों को यह सुनिश्चित करने की सलाह दी है कि व्यापारी इस शुल्क को ग्राहकों पर न डालें। कुछ श्रेणियों, जैसे रेलवे, टेलीकॉम, बीमा और ईंधन से जुड़े ₹2,000 से अधिक के भुगतान के लिए ₹5 का फ्लैट MDR तय किया गया है।
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर साझा किए गए वीडियो में प्रधानमंत्री मोदी पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्हें अमेरिका के सामने झुकने के बजाय मजबूती से खड़ा होना चाहिए। उन्होंने अपने बयान में पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का भी जिक्र किया। राहुल गांधी ने बताया कि जब इंदिरा गांधी से पूछा गया था कि वह बाएं झुकती हैं या दाएं, तो उन्होंने खुद को सीधा खड़ा रहने वाला बताया था। इसी संदर्भ में राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री मोदी के रुख पर टिप्पणी करते हुए ट्रंप का जिक्र किया।
राहुल गांधी ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में यूपीआई शुल्क को वापस लेने की मांग की और इसे आम भारतीयों पर आर्थिक बोझ से जोड़कर सरकार की आलोचना की। वहीं, सरकार के घोषित नियमों के अनुसार आम लोगों के बीच होने वाले P2P लेनदेन पर कोई शुल्क नहीं लगेगा और ₹2,000 तक के P2M भुगतान भी MDR से बाहर रहेंगे। नए शुल्क का मुख्य प्रभाव ₹2,000 से अधिक के निर्धारित कारोबारी UPI भुगतानों पर होगा।
यूपीआई देश में डिजिटल भुगतान का एक प्रमुख माध्यम है और नए MDR को लेकर सरकार के फैसले पर राजनीतिक बहस भी शुरू हो गई है। सरकार ने इसे UPI के भुगतान ढांचे और उससे जुड़े सिस्टम को बनाए रखने के लिए लागू किए गए नए शुल्क ढांचे के रूप में पेश किया है, जबकि कांग्रेस ने इसके खिलाफ राजनीतिक सवाल उठाए हैं।
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