CJP का दावा—आश्रम स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं की कमी, दीपके ने सरकारों पर लगाया लंबे समय से अनदेखी का आरोप
CJP का दावा—आश्रम स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं की कमी, दीपके ने सरकारों पर लगाया लंबे समय से अनदेखी का आरोप
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने आदिवासी क्षेत्रों में स्कूलों की स्थिति को लेकर नए अभियान का ऐलान किया है। नागपुर में मीडिया से बातचीत के दौरान दीपके ने कहा कि उनका संगठन 17 सितंबर से महाराष्ट्र के गढ़चिरौली जिले में ‘आदिवासी स्कूल ठीक करो’ अभियान शुरू करेगा। उनके मुताबिक, अभियान के जरिए आदिवासी छात्रों की शिक्षा, सुविधाओं और स्कूलों की बुनियादी व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को सामने लाया जाएगा।
दीपके ने कहा कि अभियान के तहत CJP के प्रतिनिधि आदिवासी क्षेत्रों के स्कूलों का दौरा करेंगे और वहां उपलब्ध बुनियादी सुविधाओं तथा स्कूलों के ढांचे का जायजा लेंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि आजादी के बाद से आदिवासी क्षेत्रों के स्कूलों को पर्याप्त ध्यान नहीं मिला है। इससे पहले संगठन की ओर से ग्रामीण और शहरी सरकारी स्कूलों की स्थिति सुधारने के उद्देश्य से ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान भी शुरू किया गया था।
दीपके ने राजनीतिक दलों और सरकारों पर निशाना साधते हुए कहा कि राजनीतिक संगठन अपने कार्यालयों पर बड़ी रकम खर्च करते हैं, लेकिन आदिवासी आवासीय स्कूलों की सुविधाओं पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जाता। उन्होंने कहा कि देश की आर्थिक प्रगति के आंकड़ों के साथ-साथ यह भी देखना जरूरी है कि ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों के बच्चों को शिक्षा के लिए किस तरह की सुविधाएं मिल रही हैं।
आदिवासी छात्रों की स्थिति को लेकर दीपके ने महाराष्ट्र के आश्रम स्कूलों में पिछले दो वर्षों के दौरान 590 से अधिक छात्रों की मौत का दावा किया है। यह आंकड़ा उनके सार्वजनिक बयानों में भी सामने आया है। उन्होंने आरोप लगाया कि इन स्कूलों में भोजन, बिस्तर और अन्य बुनियादी सुविधाओं की कमी है तथा कुछ स्थानों पर छात्रों को फर्श पर सोने तक की स्थिति का सामना करना पड़ता है।
दीपके ने यह भी दावा किया कि आदिवासी छात्रों की मौत के मामलों में उनके परिवारों को पर्याप्त मुआवजा नहीं मिलता। महाराष्ट्र में 590 से अधिक छात्रों की मौत और उनके परिवारों को दो लाख रुपये मुआवजा दिए जाने का दावा उन्होंने हाल में सोशल मीडिया पर भी किया था। हालांकि, ये आंकड़े और आरोप दीपके के दावे के रूप में ही सामने आए हैं।
उन्होंने आदिवासी छात्रों के लिए बेहतर शिक्षा और सुरक्षित आवासीय व्यवस्था की जरूरत पर जोर देते हुए कहा कि देश के विकास की चर्चा के साथ इन बच्चों की शिक्षा और बुनियादी सुविधाओं को भी प्राथमिकता मिलनी चाहिए। अब ‘आदिवासी स्कूल ठीक करो’ अभियान के तहत CJP गढ़चिरौली से शुरुआत कर आदिवासी क्षेत्रों के स्कूलों की स्थिति को सार्वजनिक रूप से सामने लाने की तैयारी में है।
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