नदियां खतरे के निशान से ऊपर, हॉस्टल में फंसे 300 से ज्यादा छात्रों का रेस्क्यू; करीब 100 राहत-बचाव टीमें तैनात
नदियां खतरे के निशान से ऊपर, हॉस्टल में फंसे 300 से ज्यादा छात्रों का रेस्क्यू; करीब 100 राहत-बचाव टीमें तैनात
ओडिशा में बारिश का दौर कमजोर पड़ने के बावजूद बाढ़ का संकट लगातार गहराता जा रहा है। राज्य की कई प्रमुख नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ने के कारण बालासोर, भद्रक, जाजपुर, केंद्रपाड़ा, मयूरभंज और क्योंझर समेत छह जिले बाढ़ की चपेट में हैं। प्रशासन ने स्थिति को देखते हुए अब तक 3.5 लाख से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया है।
अधिकारियों के मुताबिक पड़ोसी राज्य झारखंड के ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों में हुई भारी बारिश का असर ओडिशा की नदियों पर पड़ा है। सुवर्णरेखा नदी का जलस्तर लगातार बढ़ने के कारण बालासोर के जलेश्वर स्थित राजघाट पर नदी खतरे के निशान 10.36 मीटर को पार कर गई। सुबह 9 बजे यहां जलस्तर 10.40 मीटर दर्ज किया गया, जिसके बाद जलेश्वर, बास्ता और बालियापाल ब्लॉक के कई इलाकों में बाढ़ का पानी पहुंच गया।
बास्ता के मथानी में जलका नदी भी खतरे के निशान 6.5 मीटर से ऊपर बह रही है। वहीं गोविंदपुर में बुढ़ाबलंगा नदी का जलस्तर 7.26 मीटर दर्ज किया गया, जो चेतावनी स्तर से ऊपर है। अधिकारियों का कहना है कि बालासोर जिले के कई हिस्सों में बाढ़ की स्थिति गंभीर बनी हुई है और राहत-बचाव अभियान तेज कर दिया गया है।
भद्रक और जाजपुर जिलों में भी बाढ़ का असर देखने को मिल रहा है। राजघाट पर सलंदी नदी 17 मीटर के खतरे के निशान के मुकाबले 17.10 मीटर पर बह रही है। वहीं अखुआपाड़ा में बैतरणी नदी का जलस्तर 18.65 मीटर तक पहुंच गया, जबकि यहां खतरे का निशान 18.33 मीटर है।
हॉस्टल में फंसे 300 से ज्यादा छात्रों का रेस्क्यू
केंद्रपाड़ा जिले के कुलासाही इलाके में ब्राह्मणी नदी के कारण आई बाढ़ के बाद एक आवासीय स्कूल में 300 से ज्यादा छात्र फंस गए। हॉस्टल में पानी भरने के बाद छात्रों को स्कूल की दूसरी और तीसरी मंजिल पर सुरक्षित पहुंचाया गया। इसके बाद ओडिशा डिजास्टर रैपिड एक्शन फोर्स (ODRAF) ने पांच पावर बोट की मदद से छात्रों को बाहर निकालने का अभियान शुरू किया।
एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, प्रत्येक नाव में करीब 50 छात्रों को ले जाने की क्षमता है। प्रशासन की टीमें लगातार रेस्क्यू अभियान में जुटी हुई हैं, ताकि सभी छात्रों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया जा सके।
3.5 लाख से ज्यादा लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया
बाढ़ के दूसरे दौर से छह जिलों में बड़ी संख्या में लोग प्रभावित हुए हैं। प्रशासन ने अब तक 3.5 लाख से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया है। प्रभावित इलाकों में राहत शिविरों के जरिए पका हुआ भोजन और अन्य जरूरी सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है। बचाव और राहत कार्यों के लिए करीब 100 टीमें तैनात की गई हैं।
मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने अधिकारियों को बाढ़ प्रभावित लोगों तक हर संभव मदद पहुंचाने के निर्देश दिए हैं। प्रशासन का पूरा ध्यान प्रभावित क्षेत्रों में राहत सामग्री पहुंचाने, लोगों को सुरक्षित निकालने और बाढ़ की स्थिति पर लगातार नजर बनाए रखने पर है।
हालांकि, भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 21 अगस्त तक अगले तीन दिनों के लिए भारी बारिश को लेकर कोई चेतावनी जारी नहीं की है। इसके बावजूद नदियों के बढ़ते जलस्तर के कारण प्रशासन ने एहतियातन निगरानी और राहत-बचाव अभियान तेज रखा है।
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