दिल्ली जल बोर्ड टेंडर घोटाले में गिरफ्तार AAP नेता की जमानत याचिका पर सुनवाई पूरी, एसीबी ने 18 अगस्त को छह आरोपियों को किया था गिरफ्तार
दिल्ली जल बोर्ड टेंडर घोटाले में गिरफ्तार AAP नेता की जमानत याचिका पर सुनवाई पूरी, एसीबी ने 18 अगस्त को छह आरोपियों को किया था गिरफ्तार
दिल्ली जल बोर्ड (DJB) के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) के टेंडर में कथित अनियमितताओं और भ्रष्टाचार से जुड़े मामले में गिरफ्तार आम आदमी पार्टी के नेता और पूर्व मंत्री सत्येंद्र जैन की जमानत याचिका पर राउज एवेन्यू कोर्ट ने सुनवाई पूरी कर ली है। अदालत ने जमानत अर्जी पर अपना फैसला 3 सितंबर तक सुरक्षित रख लिया है।
एंटी करप्शन ब्रांच (ACB) ने 18 अगस्त को सत्येंद्र जैन समेत छह आरोपियों को गिरफ्तार किया था। इसके बाद अदालत ने सत्येंद्र जैन और दिल्ली जल बोर्ड के पूर्व CEO उदित प्रकाश राय समेत पांच आरोपियों को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया था। वहीं, मामले के एक अन्य आरोपी और जल बोर्ड के पूर्व संविदा सलाहकार अंकित श्रीवास्तव को पूछताछ के लिए दो दिन की पुलिस हिरासत में भेजा गया था।
इस मामले में गिरफ्तार आरोपियों में पूर्व मंत्री सत्येंद्र जैन, पूर्व CEO उदित प्रकाश राय, नागेंद्र यादव, राजा कुमार कुर्रा और पंकज वर्मा शामिल हैं। अंकित श्रीवास्तव को एसीबी की मांग पर पुलिस कस्टडी दी गई, ताकि जांच एजेंसी उनसे पूछताछ कर सके और मामले से जुड़े साक्ष्य जुटा सके।
सुनवाई के दौरान आरोपियों के वकीलों ने गिरफ्तारी की प्रक्रिया और उसके आधार पर सवाल उठाए। सत्येंद्र जैन की ओर से पेश वकील ने अदालत में दावा किया कि 10 मई 2024 को एफआईआर दर्ज होने के करीब 27 महीने बाद 5 अगस्त 2026 को जैन को पहली बार पूछताछ के लिए बुलाया गया। इसके बाद मंगलवार को फोन पर दूसरी बार संपर्क किए जाने के बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।
जैन के वकील ने यह भी दावा किया कि इसी मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) पहले ही बिना गिरफ्तारी के आरोपपत्र दाखिल कर चुका है। बचाव पक्ष का आरोप था कि एसीबी ने ईडी के आरोपपत्र में मौजूद सामग्री के आधार पर ही गिरफ्तारी की है और गिरफ्तारी को उचित ठहराने के लिए पर्याप्त ठोस सामग्री उपलब्ध नहीं है।
पूर्व CEO उदित प्रकाश राय की ओर से भी गिरफ्तारी का विरोध किया गया। उनके वकील ने अदालत को बताया कि राय वर्तमान में मिजोरम सरकार में सचिव के पद पर कार्यरत हैं। अन्य आरोपियों के अधिवक्ताओं ने भी गिरफ्तारी के आधार पर सवाल उठाते हुए कहा कि पर्याप्त सबूतों के बिना उन्हें हिरासत में लेना उचित नहीं है। हालांकि, अदालत ने एसीबी की दलीलों पर विचार करने के बाद आरोपियों को न्यायिक हिरासत और पुलिस कस्टडी में भेजने के आदेश दिए थे।
10 STP के टेंडर में अनियमितताओं का आरोप
यह मामला मई 2024 में सतर्कता निदेशालय की शिकायत के आधार पर एसीबी ने दर्ज किया था। शिकायत में दिल्ली जल बोर्ड के 10 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट्स के विस्तार और नवीनीकरण से जुड़ी टेंडर प्रक्रिया में कथित बड़े पैमाने पर अनियमितताओं, टेंडर शर्तों में हेरफेर, आपराधिक साजिश और करोड़ों रुपये के भ्रष्टाचार के आरोप लगाए गए थे।
मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल यानी SIT का गठन किया गया है, जो सरकारी अधिकारियों, कर्मचारियों और निजी व्यक्तियों की कथित भूमिका की जांच कर रहा है। एसीबी के अनुसार, जांच के दौरान अलग-अलग परियोजनाओं की टेंडर प्रक्रिया और फर्जी बिलों से जुड़े कथित वित्तीय अनियमितताओं के मामले सामने आए हैं।
जांच एजेंसी का आरोप है कि कुछ मामलों में बिना वास्तविक काम किए ही करोड़ों रुपये के बिल और चालान पेश कर भुगतान हासिल किया गया। अब इस मामले में सत्येंद्र जैन की जमानत याचिका पर अदालत 3 सितंबर को अपना फैसला सुनाएगी।
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