कांग्रेस कार्यकाल पर उठाये सवाल, कहा: अपात्रों को पेंशन, बड़ा घोटाला
कांग्रेस कार्यकाल पर उठाये सवाल, कहा: अपात्रों को पेंशन, बड़ा घोटाला
खबर खास, चंडीगढ़ :
हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने वृद्धावस्था पेंशन को लेकर विपक्ष द्वारा रखी गई बातों पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि विपक्षी बुजुर्गों की पेंशन काटने जैसे संवेदनशील विषय पर झूठ और भ्रम फैलाकर सस्ती राजनीति चमकाने में लगे हैं। सरकार किसी की पेंशन छीनने नहीं, बल्कि हर पात्र व्यक्ति तक उसका हक पहुंचाने के लिए काम कर रही है। उन्होंने सवाल किया कि विपक्षियों का क्या झूठ बोलकर राजनीति करना ही एकमात्र एजेंडा रह गया है?
मुख्यमंत्री शुक्रवार को विधानसभा में चल रहे बजट सत्र के दौरान राज्यपाल अभिभाषण पर विपक्षियों द्वारा रखी गई बात पर जवाब दे रहे थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि बीजेपी सरकार पारदर्शी सिस्टम लेकर आई है। जो लूट कांग्रेस के समय चलती थी, उसे उनकी सरकार ने रोका है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि लगभग 1 लाख 30 हजार मामलों में कुछ गलतियां मिलीं, जो उम्र, आय इत्यादि से संबंधित थीं। इनकी पेंशन बंद नहीं की गई है। बल्कि, इन कमियों की जांच की जा रही है। उन्होंने कहा कि विपक्ष को इतिहास भी याद रखना चाहिए। 1992 में कांग्रेस सरकार ने पहली बार 10 हजार रुपये की आय सीमा रखी और उस समय पेंशन 100 रुपये थी। वर्षों तक उन्होंने सीमा नहीं बदली। वर्ष 1992 से लेकर वर्ष 2009 तक कांग्रेस व इनेलो की सरकारों ने ना तो आय सीमा हटाई और ना ही कभी बढ़ाई गई।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश की बीजेपी सरकार ने वर्ष 2023 में आय सीमा 2 लाख रुपये से बढ़ाकर 3 लाख रुपये की और लाभार्थियों की संख्या 17 लाख 98 हजार तक पहुंचाई। आज 20 लाख से ज्यादा बुजुर्ग पेंशन ले रहे हैं। अगर पेंशन काटी गई होती, तो यह संख्या कैसे बढ़ती? इस सवाल का जवाब कौन देगा?
उन्होंने कहा कि आज हमारी सरकार ने 11 साल में पेंशन को 1,000 से बढ़ाकर 3,200 रुपये मासिक किया है। यह सबसे बड़ी 2,200 रुपये की बढ़ोतरी है। यह बुजुर्गों के सम्मान का प्रमाण है।
मुख्यमंत्री ने कांग्रेस के समय में 50 हजार से अधिक अपात्र लोगों को पेंशन देने पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के समय में वर्ष 2011 में वृद्धावस्था पेंशन घोटाला सामने आया था। उसके अनुसार 50 हजार से अधिक ऐसे लोगों की पेंशन जारी की गई, जो या तो अपात्र थे या स्वर्गवासी हो चुके थे। उन्होंने कहा कि उस समय 16 जिलों में 15 लाख 98 हजार 126 लोगों को सामाजिक सुरक्षा पेंशन दी जा रही थी। जब पेंशन लेने वालों को बैंक खाते खुलवाने के लिए कहा गया, तो केवल 11 लाख 44 हजार 98 लोगों ने ही खाते खुलवाए।
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