'युद्ध नशे विरुद्ध' अभियान के तहत जनता की बढ़ी भागीदारी, 17,120 मामले दर्ज; 3,440 गांवों में ई-रिक्शा के जरिए भी जुटाई जा रही गुप्त सूचनाएं
'युद्ध नशे विरुद्ध' अभियान के तहत जनता की बढ़ी भागीदारी, 17,120 मामले दर्ज; 3,440 गांवों में ई-रिक्शा के जरिए भी जुटाई जा रही गुप्त सूचनाएं
खबर खास । चंडीगढ़
पंजाब में नशे के खिलाफ चलाया जा रहा अभियान अब जन आंदोलन का रूप लेता जा रहा है। मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व में चल रहे 'युद्ध नशे विरुद्ध' अभियान के तहत शुरू की गई 'सेफ पंजाब' व्हाट्सएप हेल्पलाइन (97791-00200) पर राज्यभर से हजारों लोग गुमनाम रहकर नशा तस्करों और सप्लायरों की जानकारी साझा कर रहे हैं।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, अब तक हेल्पलाइन पर 43,520 गुमनाम शिकायतें प्राप्त हुई हैं। इन सूचनाओं के आधार पर जांच के बाद पंजाब पुलिस ने 17,120 मामले दर्ज किए हैं और 21,962 आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
सरकार ने इस हेल्पलाइन की शुरुआत लोगों को बिना किसी डर या पहचान उजागर होने की चिंता के नशा तस्करों की जानकारी देने के उद्देश्य से की थी। अधिकारियों का कहना है कि शिकायतकर्ताओं की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखने और पुलिस द्वारा त्वरित कार्रवाई किए जाने से लोगों का भरोसा लगातार बढ़ा है।
व्हाट्सएप हेल्पलाइन के अलावा सरकार ने ई-रिक्शा के माध्यम से भी गुमनाम शिकायतें एकत्र करने की व्यवस्था शुरू की है। फिलहाल यह व्यवस्था 3,440 गांवों में संचालित हो रही है, जो पंजाब के लगभग एक-तिहाई गांवों को कवर करती है। ये मोबाइल प्लेटफॉर्म नशा तस्करों की पहचान और गिरफ्तारी में पुलिस के लिए अहम सूचना स्रोत बन रहे हैं।
अधिकारियों के मुताबिक, हर शिकायत का पहले गहन सत्यापन किया जाता है। विश्वसनीय सूचना मिलने पर उसे संबंधित जिला पुलिस इकाई को तत्काल भेजा जाता है, ताकि आरोपियों के खिलाफ तेजी से कानूनी कार्रवाई की जा सके।
पंजाब के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) गौरव यादव ने कहा कि 'सेफ पंजाब' पहल को मिल रही जबरदस्त प्रतिक्रिया इस बात का प्रमाण है कि राज्य के लोग नशामुक्त समाज चाहते हैं और जब उनकी पहचान सुरक्षित रहती है तो वे कानून व्यवस्था को मजबूत करने में खुलकर सहयोग करते हैं।
उन्होंने कहा कि जनता की भागीदारी और पुलिस की त्वरित कार्रवाई ने इस अभियान को और अधिक प्रभावी बनाया है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने कहा कि यह पहल राज्य की व्यापक नशा विरोधी रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसमें पुलिस कार्रवाई के साथ-साथ जनसहभागिता, जागरूकता और नशा मुक्ति एवं पुनर्वास पर भी समान रूप से जोर दिया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि केवल कानून लागू करने से ही नहीं, बल्कि समाज के सक्रिय सहयोग से ही नशे के खिलाफ स्थायी सफलता हासिल की जा सकती है।
सरकार का कहना है कि शिकायतकर्ताओं की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जा रही है, जिससे अधिक से अधिक लोग आगे आकर उपयोगी सूचनाएं दे रहे हैं। सरकार को विश्वास है कि जनता के निरंतर सहयोग और पुलिस की प्रभावी कार्रवाई से पंजाब को नशामुक्त बनाने के अभियान को और मजबूती मिलेगी।
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