कार्यक्रम में असमिया बिहू नृत्य, बोडो नृत्य, मणिपुरी नृत्य, अरुणाचली नृत्य, गारो लोकगीत, नागालैंड की अंगामी जनजाति की लोककथा तथा सभी पूर्वोत्तर राज्यों की पारंपरिक वेशभूषा का आकर्षक प्रदर्शन किया गया।
कार्यक्रम में असमिया बिहू नृत्य, बोडो नृत्य, मणिपुरी नृत्य, अरुणाचली नृत्य, गारो लोकगीत, नागालैंड की अंगामी जनजाति की लोककथा तथा सभी पूर्वोत्तर राज्यों की पारंपरिक वेशभूषा का आकर्षक प्रदर्शन किया गया।
खबर खास, बठिंडा :
पंजाब केंद्रीय विश्वविद्यालय (सीयू पंजाब) में अध्ययनरत पूर्वोत्तर भारत के छात्रों एवं संकाय सदस्यों द्वारा कुलपति प्रो. राघवेन्द्र प्रसाद तिवारी एवं सम कुलपति प्रो. किरण हजारिका के संरक्षण में “नॉर्थईस्ट कल्चरल फेस्ट” का आयोजन किया गया। यह आयोजन भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विविधता का जीवंत उत्सव साबित हुआ।
इस उत्सव का उद्देश्य पूर्वोत्तर भारत और देश के अन्य हिस्सों के बीच सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करना था। इसके तहत क्षेत्र की विशिष्ट सांस्कृतिक परंपराओं को लोक नृत्य, लोक गीत और विविध प्रस्तुतियों के माध्यम से प्रदर्शित किया गया। इस कार्यक्रम ने विश्वविद्यालय की समावेशी सोच, राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा देने और पूर्वोत्तर भारत को देश के अभिन्न एवं सशक्त हिस्से के रूप में प्रस्तुत करने की प्रतिबद्धता को भी उजागर किया।
अपने संबोधन में कुलपति तिवारी ने आयोजन की सराहना करते हुए विश्वविद्यालय की समावेशी एवं सशक्त शैक्षणिक वातावरण के निर्माण के प्रति प्रतिबद्धता दोहराई। सम कुलपति प्रो. किरण हजारिका ने भी इस पहल की प्रशंसा करते हुए पूर्वोत्तर भारत को पर्यटन एवं सांस्कृतिक विविधता का महत्वपूर्ण केंद्र बताया। वहीं, श्री गुरप्रीम सिंह लहरी ने पूर्वोत्तर भारत के अपने अनुभव साझा करते हुए विशेष रूप से नागालैंड की यात्रा का उल्लेख किया तथा अपने अनुभवों पर आधारित एक पुस्तक कुलपति को भेंट की।
कार्यक्रम की शुरुआत विश्वविद्यालय कुलगीत से हुई। इसके अंतर्गत असमिया बिहू नृत्य, बोडो नृत्य, मणिपुरी नृत्य, अरुणाचली नृत्य, गारो लोकगीत, नागालैंड की अंगामी जनजाति की लोककथा तथा सभी पूर्वोत्तर राज्यों की पारंपरिक वेशभूषा का आकर्षक प्रदर्शन किया गया। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ, जिसने उपस्थित दर्शकों को भारत की सांस्कृतिक विविधता के प्रति और अधिक जागरूक एवं समृद्ध किया।
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