इन्हें साबित करने का जिम्मा पक्षकारों पर छोड़ा, गवाह-सबूत पेश करने होंगे अदालत ने कहा—हर मुद्दा साबित करना पक्षकारों की जिम्मेदारी; गवाह और सबूत पेश करने होंगे
इन्हें साबित करने का जिम्मा पक्षकारों पर छोड़ा, गवाह-सबूत पेश करने होंगे अदालत ने कहा—हर मुद्दा साबित करना पक्षकारों की जिम्मेदारी; गवाह और सबूत पेश करने होंगे
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने सांसद कंगना रनोट के चुनाव को चुनौती देने वाली याचिका में महत्वपूर्ण प्रगति करते हुए सुनवाई के लिए मुद्दों (Issues) को औपचारिक रूप से तय कर दिया है। यह मुद्दे जस्टिस ज्योत्सना रिवाल दुआ ने दोनों पक्षों—याचिकाकर्ता और प्रत्युत्तर पक्ष—की दलीलों को सुनने के बाद निर्धारित किए। अदालत ने स्पष्ट किया कि अब प्रत्येक मुद्दे को साबित करना संबंधित पक्ष की जिम्मेदारी होगी और इसके लिए गवाह तथा दस्तावेजी सबूत अदालत के समक्ष पेश करने होंगे।
पहला मुख्य मुद्दा याचिकाकर्ता लायक राम नेगी द्वारा दायर जानकारी से संबंधित है। अदालत ने कहा है कि अब नेगी को यह साबित करना होगा कि उन्होंने 15 मई 2024 को, यानी स्क्रूटनी की तय तारीख पर, अपने नामांकन पत्रों के साथ ‘नो ड्यूज सर्टिफिकेट’ वास्तव में जमा करवाया था। यह साबित करना भी जरूरी होगा कि यदि यह सर्टिफिकेट जमा किया गया था, तो उसका नामांकन प्रक्रिया पर क्या प्रभाव पड़ा या क्या पड़ना चाहिए था।
अदालत ने कहा है कि याचिकाकर्ता को यह भी सिद्ध करना होगा कि रिटर्निंग ऑफिसर ने 15 मई को ही ‘नो ड्यूज सर्टिफिकेट’ की अनुपस्थिति के आधार पर उनकी नामांकन पर्ची को गलत तरीके से खारिज कर दिया। यह फैसला क्या कानूनी त्रुटि था और क्या यह नियमों के विपरीत था—अब यह भी याचिकाकर्ता को सबूतों के साथ अदालत को बताना होगा। अदालत ने स्पष्ट किया है कि सिर्फ आरोप लगाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि सबूतों के साथ यह सिद्ध करना होगा कि नामांकन रद्द करने का निर्णय अनुचित और अवैध था।
हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि चुनाव याचिका से जुड़े मामलों में न्यायालय का दायरा निश्चित होता है और प्रत्येक मुद्दे के समर्थन में सटीक दस्तावेजी प्रमाण, रिकॉर्ड और प्रत्यक्षदर्शी गवाहों के बयान जरूरी हैं। यह भी कहा गया कि चुनाव प्रक्रिया में लिए गए हर फैसले का कानूनी परीक्षण सबूतों के आधार पर ही संभव है। अदालत ने दोनों पक्षों को निर्देश दिया है कि वे अपने-अपने पक्ष के समर्थन में समय पर रिकॉर्ड और गवाह प्रस्तुत करें, ताकि मुकदमे की सुनवाई सुचारू रूप से आगे बढ़ सके।
यह मामला सुर्खियों में इसलिए है क्योंकि यह सांसद कंगना रनोट के चुनाव को सीधे चुनौती देने से जुड़ा है। हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट द्वारा मुद्दे तय किए जाने के बाद अब सुनवाई अपने अगले चरण में प्रवेश करेगी, जहां सबूत, गवाह और क्रॉस-एग्ज़ामिनेशन के आधार पर अदालत तय करेगी कि याचिका में लगाए गए आरोप सिद्ध होते हैं या नहीं। राजनीतिक और कानूनी दोनों ही दृष्टियों से यह केस अब और भी महत्वपूर्ण हो गया है।
Like
Dislike
Love
Angry
Sad
Funny
Wow
Comments 0