• 2.54 लाख से अधिक विद्यार्थियों ने पास की बोर्ड परीक्षा, पास प्रतिशत 94.52% रहा : बैंस शिक्षा मंत्री ने सफल विद्यार्थियों को दी हार्दिक बधाई, उज्ज्वल भविष्य की कामना की
• 2.54 लाख से अधिक विद्यार्थियों ने पास की बोर्ड परीक्षा, पास प्रतिशत 94.52% रहा : बैंस शिक्षा मंत्री ने सफल विद्यार्थियों को दी हार्दिक बधाई, उज्ज्वल भविष्य की कामना की
खबर खास | चंडीगढ़
मुख्यमंत्री सरदार भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार के शिक्षा सुधारों को बड़ा समर्थन मिला है, क्योंकि इस बार 10वीं बोर्ड परीक्षा में ग्रामीण क्षेत्रों के छात्रों ने शहरी विद्यार्थियों से बेहतर प्रदर्शन किया है। ग्रामीण छात्रों का पास प्रतिशत 95.35% रहा, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह 92.98% दर्ज किया गया।
सोमवार को यह जानकारी देते हुए पंजाब के शिक्षा मंत्री सरदार हरजोत सिंह बैंस ने कहा कि यह परिणाम इस बात का प्रमाण है कि ‘सिख्या क्रांति’ जमीनी स्तर पर असर दिखा रही है।
फरीदकोट जिले के जैतो स्थित सरस्वती सीनियर सेकेंडरी स्कूल की छात्रा हरलीन शर्मा ने 650 में से 646 अंक हासिल कर (99.38%) पूरे पंजाब में पहला स्थान प्राप्त किया। बेहद करीबी मुकाबले में रूपनगर के सरकारी सीनियर सेकेंडरी स्कूल, चनौली बस्सी के छात्र मणिमहेश शर्मा ने 650 में से 645 अंक (99.23%) लेकर दूसरा स्थान हासिल किया। वहीं होशियारपुर के मॉडल टाउन स्थित श्री गुरु हरकृष्ण पब्लिक स्कूल, चीफ खालसा दीवान की छात्रा रिया रानी ने भी 645 अंक (99.23%) प्राप्त कर तीसरा स्थान हासिल किया।
सरदार हरजोत सिंह बैंस ने बताया कि 10वीं बोर्ड परीक्षा में कुल 2,69,505 विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया, जिनमें से 2,54,744 छात्र सफल हुए। इस प्रकार कुल पास प्रतिशत 94.52% रहा।
उन्होंने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों से 1,74,958 विद्यार्थियों ने परीक्षा दी, जिनमें से 1,66,830 छात्र पास हुए और पास प्रतिशत 95.35% दर्ज किया गया। वहीं शहरी क्षेत्रों में 94,547 विद्यार्थियों ने परीक्षा दी, जिनमें से 87,914 छात्र सफल रहे और पास प्रतिशत 92.98% रहा।
सफल विद्यार्थियों को हार्दिक बधाई देते हुए शिक्षा मंत्री ने कहा कि ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच 2.3 प्रतिशत से अधिक का यह अंतर ऐतिहासिक बदलाव को दर्शाता है। पहले आमतौर पर शहरी क्षेत्र आगे रहते थे, लेकिन अब ग्रामीण विद्यार्थियों ने बेहतर प्रदर्शन कर नई मिसाल पेश की है।
उन्होंने इस बदलाव का श्रेय शिक्षा ढांचे में किए गए निवेश और शिक्षकों के नियमित प्रशिक्षण को दिया। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ परीक्षा परिणाम नहीं, बल्कि उस सरकार की रिपोर्ट कार्ड है जो विशेषाधिकार नहीं बल्कि अवसरों में विश्वास रखती है।
Like
Dislike
Love
Angry
Sad
Funny
Wow
Comments 0