कृषि निर्यात बढ़ाने के लिए गुरमीत सिंह खुड्डियां ने कोल्ड चेन, डेयरी तकनीक और आधुनिक बुनियादी ढांचे में ब्रिटिश निवेश आमंत्रित किया; वेरका और फाइव रिवर्स जैसे ब्रांडों को वैश्विक बाजारों तक पहुंचाने की योजना
कृषि निर्यात बढ़ाने के लिए गुरमीत सिंह खुड्डियां ने कोल्ड चेन, डेयरी तकनीक और आधुनिक बुनियादी ढांचे में ब्रिटिश निवेश आमंत्रित किया; वेरका और फाइव रिवर्स जैसे ब्रांडों को वैश्विक बाजारों तक पहुंचाने की योजना
खबर खास | चंडीगढ़
पंजाब के कृषि एवं किसान कल्याण तथा खाद्य प्रसंस्करण मंत्री एस. गुरमीत सिंह खुड्डियां ने बुधवार को जैविक खेती, पैक-हाउस, कोल्ड चेन बुनियादी ढांचे और डेयरी तकनीक के क्षेत्र में ब्रिटिश निवेश आमंत्रित किया। इसका उद्देश्य कृषि निर्यात को बढ़ावा देना और वेरका तथा फाइव रिवर्स जैसे स्थानीय ब्रांडों की वैश्विक बाजारों तक पहुंच का विस्तार करना है।
खुड्डियां ने खाद्य प्रसंस्करण विभाग की प्रमुख सचिव राखी गुप्ता भंडारी के साथ किसान भवन में ब्रिटिश प्रतिनिधिमंडल से विस्तृत चर्चा की। बैठक में जैविक खेती, डेयरी, फसल अवशेष प्रबंधन, गुणवत्ता प्रमाणन और अन्य संबंधित क्षेत्रों में दोनों पक्षों के बीच सहयोग की संभावनाओं पर विचार किया गया।
प्रतिनिधिमंडल में चंडीगढ़ स्थित ब्रिटिश उप उच्चायुक्त अल्बा स्मेरिग्लियो, ब्रिटिश उच्चायोग में व्यापार मामलों के प्रथम सचिव डॉ. निकोलस ग्रिबिट और वरिष्ठ व्यापार सलाहकार अनूप नारायण शामिल थे।
प्रतिनिधिमंडल का स्वागत करते हुए खुड्डियां ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों में पंजाब के किसानों का कल्याण सर्वोच्च प्राथमिकता रहेगा। उन्होंने कृषि, खाद्य प्रसंस्करण और निर्यात के अवसरों को मजबूत करने के उद्देश्य से किए जाने वाले सहयोग में राज्य सरकार की ओर से पूर्ण समर्थन का आश्वासन दिया।
पंजाब के कृषि उत्पादों और खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र की क्षमता पर जोर
पंजाब को भारत का खाद्यान्न भंडार बताते हुए मंत्री ने कहा कि राज्य के पास मजबूत कृषि आधार है। यहां गेहूं, बासमती चावल, किन्नू, नाशपाती, लीची, दूध और डेयरी उत्पादों, बीज आलू तथा गाजर का उत्पादन होता है।
उन्होंने कहा कि पंजाब में खाद्य प्रसंस्करण का एक स्थापित तंत्र भी मौजूद है। यहां नेस्ले, हिंदुस्तान यूनिलीवर, आईटीसी और अमूल जैसी बहुराष्ट्रीय कंपनियों के साथ-साथ क्रीमिका, वेरका, सोहना और पंजाब एग्रो एक्सपोर्ट्स कॉरपोरेशन (पैग्रेक्सको) द्वारा प्रचारित फाइव रिवर्स जैसे स्थानीय ब्रांड भी सक्रिय हैं।
खुड्डियां ने कहा कि राज्य का लक्ष्य केवल कच्चे कृषि उत्पादों की आपूर्ति तक सीमित रहने के बजाय पंजाब में ही प्रसंस्करण, पैकेजिंग और ब्रांडिंग को बढ़ावा देना है, ताकि किसानों और खाद्य प्रसंस्करण उद्यमों को अधिक मूल्य मिल सके।
उन्होंने कहा, “पंजाब के पास मजबूत कृषि आधार, स्थापित प्रसंस्करण क्षमताएं, पहचान वाले ब्रांड और नवाचार करने वाले उद्यमों का बढ़ता समूह है। किन्नू, गाजर और रोगमुक्त बीज आलू के उत्पादन में पंजाब देश में पहले स्थान पर है। नाशपाती में दूसरा और मटर तथा शहद के उत्पादन में तीसरा स्थान है। प्रति व्यक्ति दूध की उपलब्धता 1.28 लीटर प्रतिदिन होने के कारण भी राज्य देश में शीर्ष पर है।”
मंत्री ने कहा कि पंजाब अपने कृषि क्षेत्र की ताकत को ब्रिटेन की बाजार मांग, तकनीक, निवेश और विशेषज्ञता से जोड़ना चाहता है, ताकि किसानों और कारोबारियों के लिए नए अवसर पैदा किए जा सकें।
राज्य की अर्थव्यवस्था में कृषि और खाद्य प्रसंस्करण का अहम योगदान
खुड्डियां ने बताया कि पंजाब के सकल राज्य मूल्य वर्धन (जीएसवीए) में कृषि और इससे जुड़ी गतिविधियों का योगदान 27 प्रतिशत है। वहीं, खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र का पंजीकृत कारखानों में हिस्सा 8 प्रतिशत और राज्य के पंजीकृत विनिर्माण क्षेत्र के जीएसवीए में योगदान 26.68 प्रतिशत है।
उन्होंने कहा कि केंद्रीय पूल में पंजाब का योगदान गेहूं में 47 प्रतिशत और चावल में 37 प्रतिशत है। राज्य के खाद्य प्रसंस्करण तंत्र में 3,292 पंजीकृत खाद्य प्रसंस्करण कारखाने, 151 किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ) और प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम औपचारिकीकरण योजना (पीएमएफएमई) के तहत 3,750 सूक्ष्म उद्यम शामिल हैं।
इसके अतिरिक्त, राज्य में तीन मेगा फूड पार्क, 12 लाख मीट्रिक टन की शीत भंडारण क्षमता और चार एनएबीएल-मान्यता प्राप्त खाद्य परीक्षण प्रयोगशालाएं हैं।
वेरका और फाइव रिवर्स जैसे ब्रांडों के लिए ब्रिटिश सहयोग की संभावना
निवेश के अवसरों का उल्लेख करते हुए खुड्डियां ने तकनीक हस्तांतरण और ब्रांड साझेदारी पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि वेरका और फाइव रिवर्स जैसे राज्य समर्थित ब्रांड पंजाब की प्रसंस्करण क्षमताओं को ब्रिटिश तकनीक और बाजारों तक पहुंच से जोड़ने के लिए संभावित साझेदार बन सकते हैं।
उन्होंने बताया कि इन्वेस्ट पंजाब ब्रिटेन के निवेशकों को परियोजना से संबंधित सुविधाएं और सहयोग उपलब्ध कराने के लिए शुरू से अंत तक सहायता प्रदान करेगा।
मंत्री ने ब्रिटिश कंपनियों को पैक-हाउस, प्री-कूलिंग सुविधाओं और कोल्ड चेन संपर्क व्यवस्था सहित साझा बुनियादी ढांचा विकसित करने में सहयोग का निमंत्रण दिया। आधुनिक खाद्य प्रसंस्करण उपकरण, नए उत्पादों का विकास तथा किन्नू के छिलकों और अन्य उप-उत्पादों का व्यावसायिक उपयोग भी संभावित सहयोग के क्षेत्रों में शामिल हैं।
ब्रिटेन के बाजार में निर्यात की संभावनाओं वाले उत्पादों में किन्नू जूस कंसंट्रेट, शहद, मक्खन, पनीर, स्किम्ड मिल्क पाउडर (एसएमपी) जैसे डेयरी उत्पाद तथा डिब्बाबंद राजमा जैसे खाने के लिए तैयार उत्पाद शामिल हैं।
भारत-ब्रिटेन व्यापार समझौते से निर्यात को मिल सकता है बढ़ावा
भारत-ब्रिटेन व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौते (सीईटीए) पर चर्चा करते हुए खाद्य प्रसंस्करण विभाग की प्रमुख सचिव राखी गुप्ता भंडारी ने कहा कि यह समझौता पंजाब के उत्पादों को ब्रिटेन की 99 प्रतिशत टैरिफ श्रेणियों में शून्य शुल्क के साथ पहुंच उपलब्ध कराता है।
उन्होंने बताया कि इसके तहत प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों, बासमती चावल, मसालों, शहद, अचार और किन्नू से बने उत्पादों जैसे सामान के निर्यात को लाभ मिल सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि स्थानीय किसानों के हितों की रक्षा के लिए डेयरी और अनाज जैसे संवेदनशील क्षेत्रों को संरक्षण दिया गया है।
भंडारी ने कहा, “शून्य शुल्क बाजार के दरवाजे खोलता है, लेकिन ब्रिटेन के गुणवत्ता और खाद्य सुरक्षा मानकों को पूरा करना ही उस बाजार में प्रवेश का रास्ता है। इस काम में ब्रिटेन के साथ साझेदारी सबसे अधिक मदद कर सकती है।”
बैठक में कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के अतिरिक्त सचिव लतीफ अहमद, पंजाब मंडी बोर्ड के संयुक्त सचिव हरजीत सिंह संधू, कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के निदेशक गुरजीत सिंह बराड़, पशुपालन विभाग के निदेशक परमदीप सिंह वालिया, पंजाब कृषि विश्वविद्यालय के अनुसंधान निदेशक डॉ. अजमेर सिंह धट्ट और अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे।
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