शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने कहा—स्कूलों के बुनियादी ढांचे पर ₹2,300 करोड़ खर्च, 2022 से 3.64 लाख विद्यार्थियों ने निजी स्कूल छोड़ सरकारी स्कूलों में लिया दाखिला; NITI आयोग की 2026-27 रिपोर्ट में पंजाब स्कूल शिक्षा में देश का शीर्ष राज्य बना
शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने कहा—स्कूलों के बुनियादी ढांचे पर ₹2,300 करोड़ खर्च, 2022 से 3.64 लाख विद्यार्थियों ने निजी स्कूल छोड़ सरकारी स्कूलों में लिया दाखिला; NITI आयोग की 2026-27 रिपोर्ट में पंजाब स्कूल शिक्षा में देश का शीर्ष राज्य बना
खबर खास | चंडीगढ़
पंजाब के शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने मंगलवार को राज्य की स्कूली शिक्षा व्यवस्था की साढ़े चार साल की प्रगति रिपोर्ट पेश करते हुए दावा किया कि भगवंत मान सरकार ने ₹2,300 करोड़ के सुधार कार्यक्रम के जरिए पंजाब की शिक्षा व्यवस्था में बड़े स्तर पर बदलाव किया है।
बैंस ने कहा कि पंजाब ने केरल को पीछे छोड़ते हुए NITI आयोग की 2026-27 रिपोर्ट में स्कूली शिक्षा के क्षेत्र में देश का शीर्ष प्रदर्शन करने वाला राज्य बनने का गौरव हासिल किया है। खास तौर पर कक्षा में विद्यार्थियों के सीखने के परिणामों में पंजाब ने बेहतर प्रदर्शन किया है।
पंजाब भवन में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में बैंस ने कहा कि 2022 से अब तक 3.64 लाख विद्यार्थी निजी स्कूलों से सरकारी स्कूलों में दाखिला ले चुके हैं। उन्होंने इसे सरकारी स्कूलों के प्रति अभिभावकों और विद्यार्थियों के बढ़ते विश्वास का प्रमाण बताया।
बैंस ने कहा कि मार्च 2022 में सरकार के सत्ता संभालने के समय पंजाब के कई सरकारी स्कूल बुनियादी सुविधाओं की कमी से जूझ रहे थे। कई स्कूलों में चारदीवारी और उचित शौचालय नहीं थे, जबकि विद्यार्थियों को फर्श पर बैठकर पढ़ना पड़ता था और किताबों की आपूर्ति में भी देरी होती थी।
उन्होंने बताया कि पिछले साढ़े चार वर्षों में स्कूलों के बुनियादी ढांचे पर ₹2,300 करोड़ खर्च किए गए, जो औसतन लगभग ₹15 लाख प्रति स्कूल है।
सरकार के अनुसार, 13,920 नए शौचालय बनाए गए हैं और 2 लाख डेस्क वितरित किए गए हैं। इसके अलावा 9,000 से अधिक नए कक्षाओं और प्रयोगशालाओं का निर्माण किया गया है तथा 10,000 से अधिक इंटरैक्टिव पैनल लगाए गए हैं।
बैंस के मुताबिक, 5,012 सरकारी स्कूलों में आधुनिक कंप्यूटर लैब स्थापित की गई हैं, सभी सरकारी स्कूलों में वाई-फाई की सुविधा उपलब्ध है और 99.9 प्रतिशत स्कूलों में चारदीवारी का काम पूरा हो चुका है।
सरकारी स्कूलों में खेल सुविधाओं का भी विस्तार किया गया है। इनमें स्विमिंग पूल, शूटिंग रेंज, बास्केटबॉल और टेनिस कोर्ट, कबड्डी मैट तथा कुश्ती और बॉक्सिंग रिंग शामिल हैं।
शिक्षा मंत्री ने शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रमों का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि प्रिंसिपलों के कई बैचों को सिंगापुर, प्राथमिक शिक्षकों को फिनलैंड और हेडमास्टरों को IIM अहमदाबाद में प्रशिक्षण के लिए भेजा गया।
स्कूलों की सुरक्षा और रखरखाव के लिए सभी सीनियर सेकेंडरी स्कूलों में पूर्व सैनिकों को कैंपस मैनेजर के रूप में नियुक्त किया गया है। 500 से अधिक विद्यार्थियों वाले सीनियर सेकेंडरी स्कूलों में दो सुरक्षा गार्ड भी तैनात किए गए हैं।
स्कूलों को विद्यार्थियों की संख्या के आधार पर हर महीने ₹3,000 से ₹50,000 तक सफाई फंड भी उपलब्ध कराया जा रहा है।
बैंस ने दावा किया कि सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों ने प्रतियोगी परीक्षाओं में भी बेहतर प्रदर्शन किया है। उनके अनुसार, पिछले चार वर्षों में 786 सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों ने JEE और 2,166 विद्यार्थियों ने NEET क्वालीफाई किया।
सरकारी स्कूलों से NEET-UG क्वालीफाई करने वाले विद्यार्थियों की संख्या 2021 में महज 80 थी, जो 2024 में 437, 2025 में 847 और 2026 में बढ़कर 882 हो गई।
उन्होंने बताया कि 361 विद्यार्थियों ने JEE Main और 64 विद्यार्थियों ने JEE Advanced क्वालीफाई किया है।
बैंस ने कहा कि पंजाब कक्षा पहली से 12वीं तक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को मुख्य विषय के रूप में लागू करने वाला देश का पहला राज्य बन गया है।
Business Blasters कार्यक्रम के तहत 2.30 लाख विद्यार्थियों को व्यावहारिक कारोबारी अनुभव दिया गया। मंत्री के मुताबिक विद्यार्थियों को ₹29 करोड़ की सीड फंडिंग मिली और उन्होंने ₹3 करोड़ का मुनाफा कमाया।
इसके अलावा कक्षा 10वीं के बाद पढ़ाई छोड़ने वाले विद्यार्थियों को दोबारा शिक्षा व्यवस्था से जोड़ने के उद्देश्य से 40 समर्पित कौशल शिक्षा स्कूल शुरू किए गए हैं।
परिवारों पर आर्थिक बोझ कम करने के लिए सरकार ने वार्षिक स्कूल फीस में बढ़ोतरी को अधिकतम 5 प्रतिशत तक सीमित किया है।
बैंस ने कहा कि सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों के लिए मुफ्त बस सेवा भी शुरू की गई है, जिसका लाभ राज्यभर में हर दिन 15,000 से अधिक विद्यार्थी उठा रहे हैं।
बैंस ने कहा कि 2023 और 2025 की विनाशकारी बाढ़ के बावजूद शिक्षा व्यवस्था पर सरकार का ध्यान जारी रहा। इन बाढ़ों में अमृतसर, गुरदासपुर, रोपड़, फिरोजपुर और फाजिल्का सहित कई जिलों में 7,000 से अधिक स्कूल प्रभावित हुए थे।
विश्व बैंक के सहयोग से 500 गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त स्कूलों की बहाली का काम चल रहा है। इनमें से अधिकांश परियोजनाओं को छह महीने के भीतर पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
बैंस ने कहा कि उन्होंने स्वयं पंजाब के 2,000 से अधिक स्कूलों का दौरा किया है। उन्होंने दावा किया कि सरकार का लक्ष्य अगले दो वर्षों में राज्य के किसी भी स्कूल को जरूरी बुनियादी सुविधाओं से वंचित नहीं रहने देना है।
उन्होंने कहा, “शिक्षा मेरा जुनून है, यह मेरा जुनून से भी बढ़कर है। पंजाब के 20 हजार स्कूल हैं और मैं एक मिशन पर हूं।”
शिक्षा मंत्री ने दोहराया कि पंजाब सरकार के लिए शिक्षा सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है और सरकारी स्कूलों को आधुनिक, सुरक्षित और बेहतर शिक्षण सुविधाओं से लैस करने का अभियान आगे भी जारी रहेगा।
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