धान-गेहूं के चक्र से बाहर निकलने की तैयारी, केंद्र ने राष्ट्रीय बांस मिशन के तहत मंजूर किए ₹2.49 करोड़; किसानों को नई फसल और नए बाजार का विकल्प
धान-गेहूं के चक्र से बाहर निकलने की तैयारी, केंद्र ने राष्ट्रीय बांस मिशन के तहत मंजूर किए ₹2.49 करोड़; किसानों को नई फसल और नए बाजार का विकल्प
खास खबर | पंजाब
पंजाब की खेती को दशकों पुराने धान-गेहूं के फसल चक्र से बाहर निकालने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया गया है। केंद्र सरकार ने राज्य में बांस की खेती को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय बांस मिशन के तहत ₹2.49 करोड़ की मंजूरी दी है। इस राशि से 857 एकड़ से अधिक क्षेत्र में बांस की प्रदर्शन परियोजना शुरू की जाएगी।
इस परियोजना का उद्देश्य किसानों को पारंपरिक धान और गेहूं के अलावा ऐसी फसलों की ओर आकर्षित करना है, जिनमें भविष्य में बेहतर बाजार और औद्योगिक मांग की संभावनाएं हों। बांस को इसी दिशा में एक संभावित विकल्प के तौर पर देखा जा रहा है।
बांस की खासियत यह है कि इसका इस्तेमाल केवल खेती तक सीमित नहीं है। इससे कागज और पल्प, टेक्सटाइल, हस्तशिल्प और कई वैल्यू-एडेड उत्पाद तैयार किए जाते हैं। ऐसे में बांस की खेती किसानों को कृषि के साथ-साथ प्रसंस्करण और उद्योगों से जुड़ने का अवसर भी दे सकती है।
857 एकड़ से अधिक क्षेत्र में होने वाली यह प्रदर्शन परियोजना पंजाब की मिट्टी और जलवायु में बांस की खेती की व्यवहारिकता को परखेगी। अगर इसके परिणाम बेहतर रहे तो आने वाले समय में ज्यादा किसान इस फसल को अपनाने के लिए आगे आ सकते हैं।
पंजाब लंबे समय से धान-गेहूं की खेती पर निर्भर रहा है। खाद्यान्न उत्पादन में इस चक्र की बड़ी भूमिका रही है, लेकिन बदलते समय के साथ फसल विविधीकरण और किसानों की आय के नए स्रोत तलाशना जरूरी हो गया है।
हालांकि बांस की खेती को बड़े स्तर पर सफल बनाने के लिए बाजार, उचित कीमत, प्रसंस्करण इकाइयों और खरीद की व्यवस्था अहम होगी। किसानों का भरोसा भी इसकी सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
अगर यह मॉडल सफल रहा तो बांस पंजाब के किसानों के लिए नई आमदनी का रास्ता खोल सकता है और राज्य की कृषि को पारंपरिक धान-गेहूं चक्र से बाहर निकालने में अहम भूमिका निभा सकता है।
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