आप के पंजाब मीडिया प्रभारी ने कृषि कानूनों, बेअदबी की घटनाओं और सिख समुदाय से जुड़े संवेदनशील मुद्दों पर अकाली नेतृत्व के बार-बार बदलते रुख पर उठाए सवाल
आप के पंजाब मीडिया प्रभारी ने कृषि कानूनों, बेअदबी की घटनाओं और सिख समुदाय से जुड़े संवेदनशील मुद्दों पर अकाली नेतृत्व के बार-बार बदलते रुख पर उठाए सवाल
खबर खास | चंडीगढ़
आम आदमी पार्टी (आप) के पंजाब मीडिया प्रभारी बलतेज पन्नू ने मंगलवार को शिरोमणि अकाली दल (बादल) के नए ‘पंजाब बचाओ’ अभियान को पंजाब के लोगों को गुमराह करने की एक और कोशिश करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि पंजाब के लोग अकाली दल के शासनकाल, तीन कृषि कानूनों को उसके समर्थन और पंजाब तथा सिख समुदाय से जुड़े संवेदनशील मुद्दों पर पार्टी के बार-बार बदलते रुख को नहीं भूले हैं।
प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए पन्नू ने कहा कि अकाली नेतृत्व राजनीतिक नारों के सहारे अपने अतीत को नहीं मिटा सकता और न ही अपने फैसलों तथा कार्यों से जुड़े सवालों से बच सकता है।
उन्होंने कहा, “वर्ष 2007 से 2017 के बीच जब पंजाब में अकाली-भाजपा सरकार सत्ता में थी, तब राज्य में चिट्टे का प्रसार हुआ, अपराधी गिरोहों का प्रभाव बढ़ा और परिवहन, केबल तथा रेत के कारोबार में माफिया का विस्तार हुआ। आज पंजाब को बचाने का दावा करने वाले यही नेता उस समय सत्ता की बागडोर संभाल रहे थे। पंजाब के लोगों को उनके कार्यकाल पर सवाल उठाने का पूरा अधिकार है।”
कृषि कानूनों पर अकाली दल के रुख पर सवाल
केंद्र सरकार की ओर से लाए गए तीन विवादित कृषि कानूनों का उल्लेख करते हुए पन्नू ने आरोप लगाया कि कानून लागू किए जाने के समय बादल परिवार ने खुले तौर पर उनका समर्थन किया था और जनता को बार-बार उनके फायदे समझाने की कोशिश की थी।
उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल, सुखबीर सिंह बादल और हरसिमरत कौर बादल के उन बयानों का हवाला दिया, जिनमें इन कानूनों का समर्थन किया गया था।
पन्नू ने कहा, “सुखबीर बादल स्वयं मौजूदा मंडी व्यवस्था को खत्म करने की अकाली दल की मांग के बारे में बोल चुके हैं। तीनों कृषि कानून उस मंडी ढांचे के लिए खतरा थे, जिसके माध्यम से पंजाब के किसान अपनी उपज बेचते हैं।”
उन्होंने आरोप लगाया कि अकाली नेतृत्व ने अपना रुख तब बदला, जब किसानों और पंजाब के लोगों को इन कानूनों से कृषि क्षेत्र को होने वाले संभावित नुकसान का एहसास होने लगा और पार्टी के समर्थन के राजनीतिक परिणाम सामने आने लगे।
पन्नू ने केंद्र सरकार की ओर से ग्रामीण विकास निधि (आरडीएफ) का भुगतान रोके जाने के मुद्दे को पंजाब की मंडी व्यवस्था से जुड़ी चिंताओं के साथ जोड़ते हुए कहा कि अकाली दल को किसानों और राज्य की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सीधे प्रभावित करने वाले मामलों पर अपना रुख स्पष्ट करना चाहिए।
वर्ष 2015 की बेअदबी की घटनाओं पर घेरा
पन्नू ने वर्ष 2015 में हुई बेअदबी की घटनाओं और इसके बाद कोटकपूरा तथा बहबल कलां में हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर भी अकाली नेतृत्व पर सवाल उठाए।
उन्होंने कहा कि दो दिसंबर को श्री अकाल तख्त साहिब के समक्ष पेश होने के बाद सुखबीर सिंह बादल के रुख में बदलाव आया। पन्नू के अनुसार, सुखबीर बादल ने पहले बेअदबी की घटनाओं और उसके बाद हुई पुलिस कार्रवाई की जिम्मेदारी स्वीकार की थी, लेकिन बाद में दावा किया कि उनके बयान दबाव में दिए गए थे।
पन्नू ने कहा, “पंजाब के लोग वर्ष 2015 की बेअदबी की घटनाओं, कोटकपूरा में सिख संगत पर हुई पुलिस कार्रवाई और बहबल कलां गोलीकांड को नहीं भूले हैं, जिसमें दो लोगों की जान चली गई थी। ये घटनाएं आज भी पंजाब के लोगों के लिए गहरे दुख का विषय हैं।”
उन्होंने कहा कि अकाली नेतृत्व को अपने कार्यों के लिए जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए, न कि राजनीतिक दबाव पड़ने पर अपना पक्ष बदलना चाहिए।
हरसिमरत बादल की हटाई गई सोशल मीडिया पोस्ट पर जवाब मांगा
पन्नू ने अकाली सांसद हरसिमरत कौर बादल की एक कथित सोशल मीडिया पोस्ट प्रकाशित होने के कुछ घंटों बाद हटाए जाने पर सवाल उठाए। उन्होंने दिल्ली के गुरुद्वारा बंगला साहिब में हाल ही में हुई एक घटना को लेकर अकाली नेतृत्व से उसका रुख स्पष्ट करने की मांग की।
उन्होंने पूछा कि पंजाब और सिख समुदाय का प्रतिनिधित्व करने का दावा करने वाला अकाली नेतृत्व सिख समुदाय से जुड़े संवेदनशील मुद्दों पर बार-बार अपना पक्ष क्यों बदलता है।
पन्नू ने कहा कि सिख भावनाओं और धार्मिक संस्थाओं का उल्लेख कर राजनीतिक अभियान चलाने वाले नेताओं से जनता स्पष्टता और एकसमान रुख की अपेक्षा करती है।
श्री आनंदपुर साहिब की सराय में रह रही महिला के मामले पर सवाल
आप नेता ने श्री आनंदपुर साहिब की एक सराय में रह रही महिला से जुड़े मामले पर भी सुखबीर सिंह बादल, हरसिमरत कौर बादल और बिक्रम सिंह मजीठिया से सवाल किए। उन्होंने महिला के रहने की परिस्थितियों और इस मामले के बारे में अकाली नेतृत्व को जानकारी होने या न होने पर स्पष्टीकरण मांगा।
पन्नू ने कहा कि अकाली नेतृत्व शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) के कामकाज और इस मामले में उसकी भूमिका से जुड़े सवालों से बच नहीं सकता।
उन्होंने कहा, “सिख संस्थाओं से जुड़े मामलों में पारदर्शिता और जवाबदेही जरूरी है। कठिन सवाल उठने पर चुप्पी साध लेना उचित नहीं है।”
बंदी सिंहों के मुद्दे पर भी उठाए सवाल
बंदी सिंहों की रिहाई के मुद्दे पर पन्नू ने कहा कि अकाली नेताओं की ओर से लिखे गए पत्र और इस मामले पर उनके पुराने रुख पहले से ही सार्वजनिक हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी के सार्वजनिक दावों और उसके पिछले कार्यों के बीच अंतर उसकी विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
पन्नू ने कहा कि पंजाब के लोगों को यह जानने का अधिकार है कि इतने महत्वपूर्ण मुद्दों पर अकाली दल का रुख बार-बार क्यों बदलता है।
‘राजनीतिक नारों से अतीत नहीं मिटाया जा सकता’
अपनी बात समाप्त करते हुए पन्नू ने आरोप लगाया कि अकाली दल (बादल) अपने ‘पंजाब बचाओ’ अभियान के माध्यम से एक बार फिर पंजाब के लोगों को गुमराह करने की कोशिश कर रहा है।
उन्होंने कहा कि लोग तीन कृषि कानूनों पर अकाली दल के रुख, वर्ष 2015 की बेअदबी की घटनाओं, कोटकपूरा में हुई पुलिस कार्रवाई और बहबल कलां गोलीकांड को नहीं भूले हैं।
पन्नू ने कहा, “कोई भी राजनीतिक नाटक या नया नारा इन यादों को मिटा नहीं सकता। पंजाब के लोग उन लोगों के बीच अंतर समझते हैं जो उनके साथ खड़े रहते हैं और जो बार-बार उनके विश्वास को ठेस पहुंचाते हैं।”
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