मौन व्रत और एकांतवास के दौरान प्रेमानंद महाराज ने भक्तों को दिया भरोसा—भजन, नाम जप और राधा रानी की भक्ति से बनाए रखें आध्यात्मिक जुड़ाव
मौन व्रत और एकांतवास के दौरान प्रेमानंद महाराज ने भक्तों को दिया भरोसा—भजन, नाम जप और राधा रानी की भक्ति से बनाए रखें आध्यात्मिक जुड़ाव
खबर खास | मथुरा
प्रसिद्ध संत प्रेमानंद महाराज ने अपने एकांतवास और मौन व्रत के दौरान अपने अनुयायियों के लिए एक भावुक संदेश जारी किया है। उन्होंने भक्तों को आश्वस्त किया कि भले ही वे उनसे शारीरिक रूप से न मिल पाएं या बात न कर सकें, लेकिन उनकी कृपा और उपस्थिति हमेशा आध्यात्मिक रूप से उनके साथ बनी रहेगी।
यह संदेश उस समय आया जब महाराज के आश्रम की ओर से एक एडवाइजरी जारी कर उनकी पदयात्रा, निजी दर्शन और व्यक्तिगत मुलाकातों को रद्द करने की घोषणा की गई। यह निर्णय उनके एकांतवास और मौन व्रत (मौन रहने की साधना) के पालन के कारण लिया गया है। इस घोषणा के बाद वृंदावन पहुंचे हजारों श्रद्धालु उनसे न मिल पाने के कारण निराश हो गए।
हालांकि, बाद में प्रेमानंद महाराज आश्रम के बाहर कुछ समय के लिए दर्शन देने पहुंचे और अपने भक्तों को सांत्वना दी। उन्होंने कहा कि चिंता करने की कोई आवश्यकता नहीं है, क्योंकि प्रेम और आध्यात्मिक संबंध शारीरिक उपस्थिति पर निर्भर नहीं होते। उन्होंने श्रद्धालुओं से श्रीजी के चरणों में समर्पित रहने और भजन व नाम जप के माध्यम से अपनी साधना जारी रखने का आग्रह किया।
महाराज ने आध्यात्मिक आत्मनिर्भरता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि मनुष्य का पालन-पोषण और रक्षा उसके इष्ट देव द्वारा होती है, किसी व्यक्ति विशेष द्वारा नहीं। उन्होंने भक्तों को सांसारिक चिंताओं से मुक्त रहने, निर्भय और शांत जीवन जीने तथा अपने जीवन को भक्ति और प्रार्थना में समर्पित करने की सलाह दी।
अपने संदेश को दोहराते हुए उन्होंने भक्तों से कहा कि वे निरंतर नाम जप करें, राधा रानी की शरण में रहें और बिना किसी चिंता के प्रसन्न जीवन जिएं। उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि वे भले ही मौन और एकांत में हों, लेकिन अपनी प्रार्थनाओं और आशीर्वाद के माध्यम से अपने अनुयायियों के साथ आध्यात्मिक रूप से जुड़े हुए हैं।
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